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Vinod Kumar

@vinodku76313156

जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा

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calendar_today11-11-2020 16:22:36

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#WhoCreatedNature परब्रह्म :- यह केवल सात शंख ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। यह अक्षर पुरुष भी कहलाता है। परन्तु यह तथा इसके ब्रह्माण्ड भी वास्तव में अविनाशी नहीं है। अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी शाम 7:30 बजे और पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक God Kabir

#WhoCreatedNature
परब्रह्म :- यह केवल सात शंख ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। यह अक्षर पुरुष भी कहलाता है। परन्तु यह तथा इसके ब्रह्माण्ड भी वास्तव में अविनाशी नहीं है।
अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी शाम 7:30 बजे और पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक
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#WhoCreatedNature ब्रह्म :- यह केवल इक्कीस ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। इसे क्षर पुरुष, ज्योति निरंजन, काल आदि उपमा से जाना जाता है। यह तथा इसके सर्व ब्रह्माण्ड नाशवान हैंअधिक जानकारी के लिए देखिए MH श्रद्धा चैनल दोपहर 2:00 बजेऔर पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक

#WhoCreatedNature
ब्रह्म :- यह केवल इक्कीस ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। इसे क्षर पुरुष, ज्योति निरंजन, काल आदि उपमा से जाना जाता है। यह तथा इसके सर्व ब्रह्माण्ड नाशवान हैंअधिक जानकारी के लिए देखिए  MH श्रद्धा चैनल दोपहर 2:00 बजेऔर पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक
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#WhoCreatedNature ब्रह्मा :- ब्रह्मा ब्रह्म का ज्येष्ठ पुत्र है, विष्णु मध्य वाला पुत्र है तथा शिव अंतिम तीसरा पुत्र है। ये तीनों ब्रह्म के पुत्र केवल एक ब्रह्माण्ड में एक विभाग (गुण) के स्वामी (प्रभु) हैं तथा नाशवान हैं।अधिक जानकारी के लिए देखिए ईश्वर चैनल रात 8:30 बजे!

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ब्रह्मा :- ब्रह्मा ब्रह्म का ज्येष्ठ पुत्र है, विष्णु मध्य वाला पुत्र है तथा शिव अंतिम तीसरा पुत्र है। ये तीनों ब्रह्म के पुत्र केवल एक ब्रह्माण्ड में एक विभाग (गुण) के स्वामी (प्रभु) हैं तथा
नाशवान हैं।अधिक जानकारी के लिए देखिए ईश्वर चैनल रात 8:30 बजे!
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#WhoCreatedNature पूर्ण ब्रह्म कबीर परमात्मा ने सर्व आत्माओं को अपने ही अन्दर से अपनी वचन शक्ति से अपने मानव शरीर सदृश उत्पन्न किया। प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा ही शरीर रचा जिसका तेज 16 (सोलह) सूर्यों जैसा मानव सदृश ही है।

#WhoCreatedNature

पूर्ण ब्रह्म कबीर परमात्मा ने सर्व आत्माओं को अपने ही अन्दर से अपनी वचन शक्ति से अपने मानव शरीर सदृश उत्पन्न किया। प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा ही शरीर रचा जिसका तेज 16 (सोलह) सूर्यों जैसा मानव सदृश ही है।
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#WhoCreatedNature सतलोक में परमात्मा के शब्द से16पुत्र उत्पन्न हुए, वह सब अपने अपने द्वीप में रहते थे। लेकिन अचिंत ने सृष्टि रचना में मदद के लिए अक्षर पुरुष को उत्पन्न किया जो मानसरोवर में सो गया। उसे जगाने के लिए परमात्मा ने ज्योति निरंजन कि उत्पत्ति की। फिर उन तीनों को साथ रहने

#WhoCreatedNature
सतलोक में परमात्मा के शब्द से16पुत्र उत्पन्न हुए, वह सब अपने अपने द्वीप में रहते थे। लेकिन अचिंत ने सृष्टि रचना में मदद के लिए अक्षर पुरुष को उत्पन्न किया जो मानसरोवर में सो गया। उसे जगाने के लिए परमात्मा ने ज्योति निरंजन कि उत्पत्ति की। फिर उन तीनों को साथ रहने
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#WhoCreatedNature बहुत समय उपरान्त क्षर पुरुष (ज्योति निरंजन) ने सोचा कि हम तीनों (अचिन्त - अक्षर पुरुष - क्षर पुरुष) एक द्वीप में रह रहे हैं तथा अन्य एक-एक द्वीप में रह रहे हैं।मैं भी साधना करके अलग द्वीप प्राप्त करूँगा। उसने ऐसा विचार करके एक पैर पर खड़ा होकर सत्तर (70) युग तक

#WhoCreatedNature
बहुत समय उपरान्त क्षर पुरुष (ज्योति निरंजन) ने सोचा कि हम तीनों (अचिन्त - अक्षर पुरुष - क्षर पुरुष) एक द्वीप में रह रहे हैं तथा अन्य एक-एक द्वीप में रह रहे हैं।मैं भी साधना करके अलग द्वीप प्राप्त करूँगा। उसने ऐसा विचार करके एक पैर पर खड़ा होकर सत्तर (70) युग तक
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#WhoCreatedNature सम्पूर्ण सृष्टि रचना‘‘ पूर्ण ब्रह्म :- इस सृष्टि रचना में सतपुरुष-सतलोक का स्वामी (प्रभु), अलख पुरुष-अलख लोक का स्वामी, अगम पुरुष-अगम लोक का स्वामी तथा अनामी पुरुष-अनामी अकह लोक का स्वामी (प्रभु) तो एक ही पूर्ण ब्रह्म है, जो वास्तव में अविनाशी प्रभु है

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सम्पूर्ण सृष्टि रचना‘‘
पूर्ण ब्रह्म :- इस सृष्टि रचना में सतपुरुष-सतलोक का स्वामी (प्रभु), अलख पुरुष-अलख लोक का स्वामी, अगम पुरुष-अगम लोक का स्वामी तथा अनामी पुरुष-अनामी अकह लोक का स्वामी (प्रभु) तो एक ही पूर्ण ब्रह्म है, जो वास्तव में अविनाशी प्रभु है
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#WhoCreatedNature कबीर परमेश्वर ने ही शब्द से पराशक्ति की उत्पत्ति की पूर्ण धनी कविर्देव ने सर्व रचना स्वयं की। अपनी शब्द शक्ति से एक राजेश्वरी (राष्ट्री) शक्ति उत्पन्न की, जिससे सर्व ब्रह्माण्डों को स्थापित किया। इसी को पराशक्ति परानन्दनी भी कहते हैं।

#WhoCreatedNature
कबीर परमेश्वर ने ही शब्द से पराशक्ति की उत्पत्ति की
पूर्ण धनी कविर्देव ने सर्व रचना स्वयं की। अपनी शब्द शक्ति से एक राजेश्वरी (राष्ट्री) शक्ति उत्पन्न की, जिससे सर्व ब्रह्माण्डों को स्थापित किया।
इसी को पराशक्ति परानन्दनी भी कहते हैं।
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#WhoCreatedNature सतलोक में कबीर परमेश्वर के 16 पुत्रों में से एक पुत्र अचिंत को जब परमात्मा ने अन्य सृष्टि रचने को कहा तब उसने अक्षर पुरुष की उत्पत्ति की जो मानसरोवर में सोलाल गया। जिसको जगाने के लिए परमात्मा ने काल की उत्पत्ति की। अचिंत सृष्टि करने में असमर्थ रहा। God Kabir

#WhoCreatedNature
सतलोक में कबीर परमेश्वर के 16 पुत्रों में से एक पुत्र अचिंत को जब परमात्मा ने अन्य सृष्टि रचने को कहा तब उसने अक्षर पुरुष की उत्पत्ति की जो मानसरोवर में सोलाल गया। जिसको जगाने के लिए परमात्मा ने काल की उत्पत्ति की। अचिंत सृष्टि करने में असमर्थ रहा। 
God Kabir
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#WhoCreatedNature कविर्देव (कबीर प्रभु) ने सतपुरुष रूप में प्रकट होकर सतलोक में विराजमान होकर प्रथम सतलोक में अन्य रचना की। एक शब्द (वचन) से सोलह द्वीपों की रचना की। अधिक जानकारी के लिए देखिए ईश्वर चैनल रात 8:30 बजे और पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक God Kabir

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कविर्देव (कबीर प्रभु) ने सतपुरुष रूप में प्रकट होकर सतलोक में विराजमान होकर प्रथम सतलोक में अन्य रचना की।
एक शब्द (वचन) से सोलह द्वीपों की रचना की। अधिक जानकारी के लिए देखिए ईश्वर चैनल रात 8:30 बजे और पढ़ें ज्ञान गंगा पुस्तक
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#WhoCreatedNature पूर्ण प्रभु अनामी, अगम, तथा अलख लोक रचने के बाद सतलोक में प्रकट हुआ तथा सतलोक का भी अधिपति यही है। इसी का नाम अकालमूर्ति - शब्द स्वरूपी राम - पूर्ण ब्रह्म - परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं। कबीर प्रभु का मानव सदृश शरीर तेजोमय है। God Kabir

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पूर्ण प्रभु अनामी, अगम, तथा अलख लोक रचने के बाद सतलोक में प्रकट हुआ तथा सतलोक का भी अधिपति यही है। इसी का नाम अकालमूर्ति - शब्द स्वरूपी राम - पूर्ण ब्रह्म - परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं। कबीर प्रभु का मानव सदृश शरीर तेजोमय है।
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#WhoCreatedNature सतलोक में शब्द से 16 पुत्रों की उत्पत्ति कबीर परमात्मा ने सतलोक में 16 द्वीप रचने के बाद सोलह शब्दों से सोलह पुत्रों की उत्पत्ति की। एक मानसरोवर की रचना की जिसमें अमृत भरा। सत ज्ञान प्राप्त करने के लिए Satlok Ashram Youtube Channel पर Visit करें | God Kabir

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सतलोक में शब्द से 16 पुत्रों की उत्पत्ति
कबीर परमात्मा ने सतलोक में 16 द्वीप रचने के बाद सोलह शब्दों से सोलह पुत्रों की उत्पत्ति की। एक मानसरोवर की रचना की जिसमें अमृत भरा। सत ज्ञान प्राप्त करने के लिए Satlok Ashram Youtube Channel पर Visit करें |
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#WhoCreatedNature सर्व प्रथम केवल एक स्थान ‘अनामी लोक‘ था। पूर्ण परमात्मा उस अनामी लोक में अकेला रहता था। उस परमात्मा का वास्तविक नाम कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर है। सभी आत्माऐं उस पूर्ण धनी के शरीर में समाई हुई थी।अधिक जानकारी के लिए देखिए MH श्रद्धा चैनल दोपहर 2:00 बजे

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सर्व प्रथम केवल एक स्थान ‘अनामी लोक‘ था। पूर्ण परमात्मा उस अनामी लोक में अकेला रहता था। उस परमात्मा का वास्तविक नाम कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर है। सभी आत्माऐं उस पूर्ण धनी के शरीर में समाई हुई थी।अधिक जानकारी के लिए देखिए  MH श्रद्धा चैनल दोपहर 2:00 बजे
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#WhoCreatedNature कबीर परमेश्वर (कविर्देव) की रोशनी में अंतर भिन्न-2 लोकों में होता जाता है। ठीक इसी प्रकार पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने अनामी लोक के बाद नीचे के तीन और लोकों (अगमलोक, अलख लोक, सतलोक) की रचना शब्द(वचन) से कि

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कबीर परमेश्वर (कविर्देव) की रोशनी में अंतर भिन्न-2 लोकों में होता जाता है। ठीक इसी प्रकार पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने अनामी लोक के बाद नीचे के तीन और लोकों (अगमलोक, अलख लोक, सतलोक) की रचना शब्द(वचन) से कि
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#WhoCreatedNature ज्योति निरंजन ने अपने 21 ब्रह्मण्डों के लिए जीव प्राप्त करने के लिए 64 युग तक तप किया। सतपुरुष कबीर परमेश्वर ने कहा कि ब्रह्म मैं मेरी आत्माओं को किसी भी जप-तप साधना के फल रूप में नहीं दे सकता। यदि कोई स्वेच्छा से जाना चाहे तो वह जा सकता है।

#WhoCreatedNature
ज्योति निरंजन ने अपने 21 ब्रह्मण्डों के लिए जीव प्राप्त करने के लिए 64 युग तक तप किया। सतपुरुष कबीर परमेश्वर ने कहा कि ब्रह्म मैं मेरी आत्माओं को किसी भी जप-तप साधना के फल रूप में नहीं दे सकता। यदि कोई स्वेच्छा से जाना चाहे तो वह जा सकता है।
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#WhoCreatedNature पूर्ण ब्रह्म ने सतलोक में सर्व प्रथम काल के साथ उसके 21 ब्रह्मांड में जाने की स्वीकृति देने वाले हंस को लड़की का रूप दिया परन्तु स्त्री इन्द्री नहीं रची तथा सर्व आत्माओं को (जिन्होंने ज्योति निरंजन (ब्रह्म) के साथ जाने की सहमति दी थी) उस लड़की के शरीर God Kabir

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पूर्ण ब्रह्म ने सतलोक में सर्व प्रथम काल के साथ उसके 21 ब्रह्मांड में जाने की स्वीकृति देने वाले हंस को लड़की का रूप दिया परन्तु स्त्री इन्द्री नहीं रची तथा सर्व आत्माओं को (जिन्होंने ज्योति निरंजन (ब्रह्म) के साथ जाने की सहमति दी थी) उस लड़की के शरीर
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#WhoCreatedNature हक्का कबीर (सत् कबीर) ने ज्योति निरंजन को उसके 70 युग के तप के बदले में 21 (इक्कीस) ब्रह्माण्ड प्रदान कर दिए। ज्योति निरंजन ने70 युग फिर से तप करके पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर प्रभु) से रचना सामग्री की याचना की। सतपुरुष ने उसे तीन गुण तथा पाँच तत्त्व God Kabir

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हक्का कबीर (सत् कबीर) ने ज्योति निरंजन को उसके 70 युग के तप के बदले में 21 (इक्कीस) ब्रह्माण्ड प्रदान कर दिए। ज्योति निरंजन ने70 युग फिर से तप करके पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर प्रभु) से रचना सामग्री की याचना की। सतपुरुष ने उसे तीन गुण तथा पाँच तत्त्व
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#WhoCreatedNature आत्माऐं काल के जाल में कैसे फँसी?“ जब ब्रह्म (ज्योति निरंजन) तप कर रहा था हम सभी आत्माऐं, जो आज ज्योति निरंजन के इक्कीस ब्रह्माण्डों में रहते हैं इसकी साधना पर आसक्त हो गए तथा अन्तरात्मा से इसे चाहने लगे। अपने सुखदाई प्रभु सत्य पुरूष से विमुख हो गए। God Kabir

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आत्माऐं काल के जाल में कैसे फँसी?“
जब ब्रह्म (ज्योति निरंजन) तप कर रहा था हम सभी आत्माऐं, जो आज ज्योति निरंजन के इक्कीस ब्रह्माण्डों में रहते हैं इसकी साधना पर आसक्त हो गए तथा अन्तरात्मा से इसे चाहने लगे। अपने सुखदाई प्रभु सत्य पुरूष से विमुख हो गए। 
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#WhoCreatedNature ब्रह्म तथा ब्रह्मा में भेद - एक ब्रह्माण्ड में बने सर्वोपरि स्थान पर ब्रह्म (क्षर पुरुष) स्वयं तीन गुप्त स्थानों की रचना करके ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव रूप में रहता है तथा अपनी पत्नी प्रकृति (दुर्गा) के सहयोग से तीन पुत्रों की उत्पत्ति करता है।

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ब्रह्म तथा ब्रह्मा में भेद - एक ब्रह्माण्ड में बने सर्वोपरि स्थान पर ब्रह्म (क्षर पुरुष) स्वयं तीन गुप्त स्थानों की रचना करके ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव रूप में रहता है तथा अपनी पत्नी प्रकृति (दुर्गा) के सहयोग से तीन पुत्रों की उत्पत्ति करता है।
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#WhoCreatedNature काल ने सतलोक में प्रकृति से बलात्कार करने की ठानी। उसी समय दुर्गा ने अपनी इज्जत रक्षा के लिए सुक्ष्म रूप बनाया तथा ज्योति निरंजन के खुले मुख के द्वारा पेट में प्रवेश करके पूर्णब्रह्म कविर् देव से अपनी रक्षा के लिए याचना की। उसी समय कविर्देव अपने पुत्र योगजीत

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काल ने सतलोक में प्रकृति से बलात्कार करने की ठानी। उसी समय दुर्गा ने अपनी इज्जत रक्षा के लिए सुक्ष्म रूप बनाया तथा ज्योति निरंजन के खुले मुख के द्वारा पेट में प्रवेश करके पूर्णब्रह्म कविर् देव से अपनी रक्षा के लिए याचना की। उसी समय कविर्देव अपने पुत्र योगजीत