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@thelallantop पेश करता है 'ल ट क' यानी दी लल्लनटॉप कथाएं. सांसों से छोटी और जीवन सी गहरी. अपनी कविताओं, कहानियों को फीचर करने के लिए नीचे लिंक पर जाएं.

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एक बूढ़ा आदमी है मुल्क में या यूं कहो इस अंधेरी कोठरी में कोई रोशनदान है दुष्यंत कुमार

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नहीं हम मंडी नहीं जाएंगे खलिहान से उठते हुए कहते हैं दाने उन्होंने हिदायत भी दी, जाएंगे तो फिर लौटकर नहीं आएंगे जाते जाते कहते जाते हैं दाने अगर लौट कर आये भी तो तुम हमें पहचान नहीं पाओगे अपनी अंतिम चिट्ठी में लिख भेजते हैं दाने केदारनाथ सिंह

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सहर के दोश पर गुलनार परचम हम भी देखेंगे तुम्हें भी देखना होगा ये आलम हम भी देखेंगे साहिर

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यदि तुम्हारे अनुसरण से भिन्न भी मेरी कोई सत्ता है तो उसे आक्रांत मत करो अवसर दो कि वह पनप सके प्रसन्न ख़ुली धूप और ताज़ी हवा में उसे अपनी शक्ति से नष्ट मत करो उससे शक्ति ग्रहण करो, क्योंकि तुम्हें अभी उसके द्वारा भविष्य में भी जीना है कुंवर नारायण

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कागज़ के टुकड़ों को जोड़कर लंबा करने गोंद लगाते हैं वाक्य को लंबा करना हो तो और लगाते हैं - विनोद कुमार शुक्ल

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मुझे एक सीढ़ी की तलाश है सीढ़ी दीवार पर चढ़ने के लिए नहीं बल्कि नींव में उतरने के लिए मैं किले को जीतना नहीं उसे ध्वस्त कर देना चाहता हूं नरेश सक्सेना

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कितनी दूर जाना होता है पिता से पिता जैसा होने के लिए! -अज्ञेय

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शरद की रातें इतनी हल्की और खुली जैसे पूरी की पूरी शामें हों सुबह तक जैसे इन शामों की रातें होंगी किसी और मौसम में आलोक धन्वा

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बहुत मुश्किल है दुनिया का संवरना तिरी ज़ुल्फ़ों का पेच-ओ-ख़म नहीं है बहुत कुछ और भी है इस जहां में ये दुनिया महज़ ग़म ही ग़म नहीं है मजाज़ लखनवी

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वो पेड़ों को बर्दाश्त नहीं करते क्योंकि उनकी जड़ें ज़मीन मांगती हैं - JACINTA KERKETTA

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जिनकी आंखें श्मशान में या क़ब्रिस्तान में भी सजल नहीं होतीं, वे लोग भी उपन्यास के मर्मस्पर्शी स्थलों पर पहुंचकर रोने लगते हैं. प्रेमचंद

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प्रेम की एक और गुनगुनी रात, तुम्हारे बिना कर दिया किताबों के नाम, मुझे लगने लगा है कि लाइब्रेरी किसी दिलजले की इज़ाद है. सुधांशु फ़िरदौस

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दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता अहमद फ़राज़

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निराशाएं अपनी गतिशीलता में आशाएं हैं 'मैं रोज परास्त होता हूं' - इस बात के कम से कम बीस अर्थ हैं कुमार अंबुज

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लड़कियां ब्याही जाती है सरकारी मुलाज़िमों से ज़मीनों से दुकानों से, बस वो ब्याही नहीं जाती तो सिर्फ अपने प्रेमियों से. सीमा सिंह बौद्ध

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यूक्रेन में फंसे भारतीय अगर बताना चाहते हैं अपना हाल, रखना चाहते हैं अपनी बात, साझा करना चाहें अपनी समस्याएं और चिंताएं तो मेल करें LTpanchayat@gmail.com पर. हमारी टीम आपसे संपर्क करेगी और ज़ूम कॉल के जरिये रखेगी आपकी बात.