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JACINTA KERKETTA

@kerkettajacinta

Poet, Freelance Writer/ Journalist

ID: 1085827105256960000

calendar_today17-01-2019 09:12:10

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The Union environment ministry has given environmental clearance for open cast coal mining in Parsa in Chhattisgarh’s dense Hasdeo Arand forests, in a decision that could have far-reaching consequences for forest cover conservation in India. m.hindustantimes.com/india-news/cen…

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थोड़ी देर बाद हम दंतेवाड़ा के मरकानार गांव में थे। महुएं के फूलों की खुशबू में डूबा हुआ जंगल...नदी जहां गांव की सारी लड़कियां चिड़ियों की झुंड की तरह नहाने उतरी थीं और उनके कलरव से जंगल गूंज रहा था...

थोड़ी देर बाद हम दंतेवाड़ा के मरकानार गांव में थे। महुएं के फूलों की खुशबू में डूबा हुआ जंगल...नदी जहां गांव की सारी लड़कियां चिड़ियों की झुंड की तरह नहाने उतरी थीं और उनके कलरव से जंगल गूंज रहा था...
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अपनी कविताओं को बांग्ला भाषा में देखते हुए..... बांग्ला अनुवाद : Tusti Bhattacharyya m.banglanews24.com/cat/news/bd/70…

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'चौकीदार' रघुबर दास के झारखंड में 10,000 चौकीदारों को चार महीने से नहीं मिला वेतन #JharkhandChowkidar #UnpaidSalary #RaghubarDas #MaiBhiChowkidar #NarendraModi #झारखंडचौकीदार #सैलरी #रघुबरदास #मैंभीचौकीदार #नरेंद्रमोदी thewirehindi.com/75497/10000-ch…

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राष्ट्रवाद ........... जब मेरा पड़ोसी मेरे खून का प्यासा हो गया मैं समझ गया राष्ट्रवाद आ गया © जसिंता केरकेट्टा मार्च 2019

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आदिवासी समाज के जिस पहले व्यक्ति से किसी समुदाय के गोत्र की शुरुवात हुई थी, उसके वंशज साल में एक बार एक जगह एकत्र होते हैं और नृत्य करते हैं। नृत्य समारोह में क्षेत्र के सभी गांवों के स्त्री - पुरुष एक साथ नृत्य करते हैं। (दंतेवाड़ा के सुदूर गांव में एक ऐसे ही समारोह में ....)

आदिवासी समाज के जिस पहले व्यक्ति से किसी समुदाय के गोत्र की शुरुवात हुई थी, उसके वंशज साल में एक बार एक जगह एकत्र होते हैं और नृत्य करते हैं। नृत्य समारोह में क्षेत्र के सभी गांवों के स्त्री - पुरुष एक साथ नृत्य करते हैं। 
(दंतेवाड़ा के सुदूर गांव में एक ऐसे ही समारोह में ....)
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ऐसे समय में जब हर जगह आदिवासियों की परंपराओें व आस्था पर मुख्यधारा के संगठित धर्मो का चौतरफा हमला है, छत्तीसगढ़ में गोंड आदिवासी अपने इलाकों में पेन करसाड़ मना रहे हैं। उनकी आस्था के अनुसार पेन, पूर्वजों की आत्माओं का समूह है जिसमें एक गोत्र के सभी वंशज मृत्यु के बाद जा मिलते हैं

ऐसे समय में जब हर जगह आदिवासियों की परंपराओें व आस्था पर मुख्यधारा के संगठित धर्मो का चौतरफा हमला है, छत्तीसगढ़ में गोंड आदिवासी अपने इलाकों में पेन करसाड़ मना रहे हैं। उनकी आस्था के अनुसार पेन, पूर्वजों की आत्माओं का समूह है जिसमें एक गोत्र के सभी वंशज मृत्यु के बाद जा मिलते हैं
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बांग्ला भाषा में फिर से अनुवादित कविताएं...आदिवासी लड़कियां, किसकी है ये निर्लज्ज हंसी, मिल बांट कर खाने वाले लोग, खेलते हुए जिया, धूल में खेलती लड़की, शोर मचाती लड़कियां और अभी मैं बहिष्कृत हूं..... 4numberplatform.com/?p=12137

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प्रकृति पूजक आदिवासियों के जल, जंगल, ज़मीन के संघर्ष को समझने के लिए उनकी नार व्यवस्था, पेन व्यवस्था, उनकी आस्था के दार्शनिक पहलुओं और किस तरह वे मनुवादी व्यवस्था या किसी भी संगठित धर्म से अलग हैं, इसको समझना ज़रूरी है। thewirehindi.com/77448/chhattis…

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झारखंड: गोहत्या के शक़ में भीड़ ने की आदिवासियों की पिटाई, एक की मौत #झारखंड #गोहत्या #आदिवासी #Jharkhand #CowSlaughter #Adivasis thewirehindi.com/77914/jharkhan…

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“उन्हें भी मैं जानता हूं जो बूट पहनते हैं पर एक बार भी मरे हुए जानवर को याद नहीं करते जबकि बन्दूक वे एक बार भी नहीं भूल पाते” - लीलाधर जगूड़ी

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शहर की धूल झाड़, नंगे पांव हम लौटना चाहते हैं अपने गांव पर अब वहां भी पूंजीवाद, नक्सलवाद  और भी बहुत से वादों ने छीन ली है अमन-चैन की छांव © Jacinta Kerketta

शहर की धूल झाड़, नंगे पांव
हम लौटना चाहते हैं अपने गांव
पर अब वहां भी
पूंजीवाद, नक्सलवाद 
और भी बहुत से वादों ने
छीन ली है अमन-चैन की छांव

© Jacinta Kerketta
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ओ शहर ! .............. भागते हुए छोड़ कर अपना घर पुआल, मिट्टी और खपरे पूछते हैं अक्सर ओ शहर !  क्या तुम कभी उजड़ते हो किसी विकास के नाम पर ? © जसिंता केरकेट्टा

ओ शहर !
..............
भागते हुए छोड़ कर अपना घर
पुआल, मिट्टी और खपरे
पूछते हैं अक्सर
ओ शहर ! 
क्या तुम कभी उजड़ते हो
किसी विकास के नाम पर ?

© जसिंता केरकेट्टा
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" मैं इस चांद के टुकड़े-टुकड़े करना चाहता हूं जब लोगों की हत्या होती है, जनसंहार होता है तब भी यह इसी तरह भावविहीन चेहरा लिए निर्विकार उग आता है और ऐसे चांद से मेरी प्रेमिका को प्रेम है इसलिए मैं इसके टुकड़े-टुकड़े करना चाहता हूं " - ओड़िशा के कवि हेमन्त दलपती की कविता के अंश।

" मैं इस चांद के टुकड़े-टुकड़े करना चाहता हूं
जब लोगों की हत्या होती है, जनसंहार होता है
तब भी यह इसी तरह 
भावविहीन चेहरा लिए निर्विकार उग आता है
और ऐसे चांद से मेरी प्रेमिका को प्रेम है
इसलिए मैं इसके टुकड़े-टुकड़े करना चाहता हूं "

- ओड़िशा के कवि हेमन्त दलपती की कविता के अंश।
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सच बोलती सड़कें ................. ओह्ह क्या तुम नहीं देख सकते? चौड़ी सड़कों के लिए हज़ारों पेड़ दे रहे हैं अपनी कुर्बानी क्या अब भी चाहिए तुम्हें  विकास की कोई परिभाषा? नई सड़कें बतलातीं हैं विकास के नाम पर ही उखाड़ी जा सकती हैं जड़ें पेड़ और आदमी दोनों की © जसिंता केरकेट्टा

सच बोलती सड़कें
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ओह्ह क्या तुम नहीं देख सकते?
चौड़ी सड़कों के लिए हज़ारों पेड़
दे रहे हैं अपनी कुर्बानी
क्या अब भी चाहिए तुम्हें 
विकास की कोई परिभाषा?
नई सड़कें बतलातीं हैं
विकास के नाम पर ही
उखाड़ी जा सकती हैं जड़ें
पेड़ और आदमी दोनों की 

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धर्म ..... प्रेम, शांति और बेहतर दुनिया के सपनों को स्वर्ग के हवाले कर धरती पर धर्म युद्ध क्यों मांगता है? © जसिंता केरकेट्टा

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ये "पृथ्वी दिवस " आपके पश्चाताप के लिए काफी नहीं... ( प्रकृति और पृथ्वी के हक़ के लिए लड़ती सोनी सोढ़ी के साथ)

ये "पृथ्वी दिवस " आपके पश्चाताप के लिए काफी नहीं...

( प्रकृति और पृथ्वी के हक़ के लिए लड़ती सोनी सोढ़ी के साथ)
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और पाहन धक्के मारकर हटाए गए ............................. कल शाम रांची में प्रधानमंत्री ने रोड शो के दौरान वीर बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। आज प्रकृति पूजक आदिवासी प्रतिमा की शुद्धिकरण के लिए पहुंचे। फोर्स द्वारा पाहन सहित स्त्री, पुरुष धक्के मार कर हटाए गए...

और पाहन धक्के मारकर हटाए गए
    .............................
कल शाम रांची में प्रधानमंत्री ने रोड शो के दौरान वीर बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। आज प्रकृति पूजक आदिवासी प्रतिमा की शुद्धिकरण के लिए पहुंचे। फोर्स द्वारा पाहन सहित स्त्री, पुरुष धक्के मार कर हटाए गए...
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अब हर आदमी दूसरे समुदाय के लोगों को शक की नजर से देखने लगा है। आदमी, आदमी से डर रहा है। कुछ है जो भीतर ही भीतर टूट गया है, दरक गया है। शायद आदमी का आदमी पर से भरोसा.... adivasiresurgence.com/adivasi-tribe-…