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#संत_रामपालजी_के_उद्देश्य यथार्थ अध्यतामिक ज्ञान के अभाव में भटकते मानव समाज को पुनः मूल शास्त्रों की और मोड़कर, उन्हें यथार्थ भक्ति विधि देना संत रामपाल जी महाराज का मुख्य उद्देश्य है जिससे हम अपने मूल उदगम स्थान, सतलोक जा सकें। 8 Sept Avataran Diwas

#संत_रामपालजी_के_उद्देश्य
यथार्थ अध्यतामिक ज्ञान के अभाव में भटकते मानव समाज को पुनः मूल शास्त्रों की और मोड़कर, उन्हें यथार्थ भक्ति विधि देना संत रामपाल जी महाराज का मुख्य उद्देश्य है जिससे  हम अपने मूल उदगम स्थान, सतलोक जा सकें।
8 Sept Avataran Diwas
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हर साल दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी के रूप में मनाया जाता है। यानि बुराइयों को दूर कर अच्छाइयों को अपनाने का त्योहार है दशहरा। इस दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण को मारा था। भारतीय संस्कृति में इस त्योहार को विजयादशमी भी कहा जाता है। आइए इस वर्ष आदि राम के ब

हर साल दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी के रूप में मनाया जाता है। यानि बुराइयों को दूर कर अच्छाइयों को अपनाने का त्योहार है दशहरा। इस दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण को मारा था। भारतीय संस्कृति में इस त्योहार को विजयादशमी भी कहा जाता है। आइए इस वर्ष आदि राम के ब
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान गीता जी के अनुसार तत्वदर्शी संत की पहचान क्या है? 👉 अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक "गीता तेरा ज्ञान अमृत" Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान
गीता जी के अनुसार तत्वदर्शी संत की पहचान क्या है?

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Sant Rampal Ji Maharaj
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#RealKnowledge_Of_Gita गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।

#RealKnowledge_Of_Gita
गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।
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#RealKnowledge_Of_Gita गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।

#RealKnowledge_Of_Gita
गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।
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गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है, ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।
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#GodMorningSaturday वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं। उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता। मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है । कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।

#GodMorningSaturday
वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं।
उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता।
 मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है ।
कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।
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#GodMorningSaturday वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं। उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता। मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है । कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।

#GodMorningSaturday
वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं।
उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता।
 मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है ।
कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।
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#GodMorningSaturday वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं। उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता। मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है । कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।

#GodMorningSaturday
वृद्ध होकर या रोगी होकर जब मानव चारपाई पर पड़ा होता है और आँखों में आँसू बह रहे होते हैं।
उस समय कोई बचाव नहीं हो सकता।
 मृत्यु के समय पीड़ा हो रही होती है ।
कहते हैं कि जो भक्ति नहीं करते, उनका अन्त समय महाकष्टदायक होता है ।
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गीता अध्याय 15 श्लोक 16 इस संसार में, दो प्रकार के भगवान हैं, नाशवान और अविनाशी और सभी प्राणियों के शरीर नाशवान और आत्मा अविनाशी कही जाती है। #आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा Sant Rampal Ji Maharaj

गीता अध्याय 15 श्लोक 16 
इस संसार में, दो प्रकार के भगवान हैं, नाशवान और अविनाशी और सभी प्राणियों के शरीर नाशवान और आत्मा अविनाशी कही जाती है।

#आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा

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गीता अध्याय 15 श्लोक 16 इस संसार में, दो प्रकार के भगवान हैं, नाशवान और अविनाशी और सभी प्राणियों के शरीर नाशवान और आत्मा अविनाशी कही जाती है। #आध्यात्मिक_ज्ञान_चर्चा Sant Rampal Ji Maharaj

गीता अध्याय 15 श्लोक 16 
इस संसार में, दो प्रकार के भगवान हैं, नाशवान और अविनाशी और सभी प्राणियों के शरीर नाशवान और आत्मा अविनाशी कही जाती है।

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#Is_Jesus_God ईसा मसीह की दर्दनाक मौत से साबित होता है कि वह परमात्मा नहीं थे। परमात्मा तो अविनाशी है। तीस वर्ष की आयु में ईसा मसीह जी को शुक्रवार के दिन सलीब मौत (दीवार) के साथ एक आकार के लकड़ के ऊपर खड़ा करके हाथों व पैरों में मेख (मोटी कील) गाड़ दी।

#Is_Jesus_God
ईसा मसीह की दर्दनाक मौत से साबित होता है कि वह परमात्मा नहीं थे। परमात्मा तो अविनाशी है।
तीस वर्ष की आयु में ईसा मसीह जी को शुक्रवार के दिन सलीब मौत (दीवार) के साथ एक आकार के लकड़ के ऊपर खड़ा करके हाथों व पैरों में मेख (मोटी कील) गाड़ दी।
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#हिन्दू_भाई_संभलो नकली संतों द्वारा हिन्दुओं से धोखा संत रामपाल जी महाराज पवित्र हिन्दु धर्म के गुरूओं द्वारा गीता अध्याय 18 श्लोक 66 के अर्थ में व्रज शब्द का अर्थ आना किया है जबकि व्रज शब्द का वास्तविक अर्थ जाना होता है।

#हिन्दू_भाई_संभलो
नकली संतों द्वारा हिन्दुओं से धोखा 
संत रामपाल जी महाराज
पवित्र हिन्दु धर्म के गुरूओं द्वारा गीता अध्याय 18 श्लोक 66 के अर्थ में व्रज शब्द का अर्थ आना किया है जबकि व्रज शब्द का वास्तविक अर्थ जाना होता है।
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#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर Do you know that the Jagannath temple was built by King Indradaman, it was built with the grace of God Kabir Sahib Ji, to know why the sea god demolished the under-construction Jagannath temple 5 times. Real Jagannath God Kabir #GodMorningWednesday

#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
Do you know that the Jagannath temple was built by King Indradaman, it was built with the grace of God Kabir Sahib Ji, to know why the sea god demolished the under-construction Jagannath temple 5 times.
Real Jagannath God Kabir
#GodMorningWednesday
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#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर जगन्नाथ मंदिर बनने के बाद एक नाथ संत ने मंदिर में मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। राजा इन्द्रदमन ने नाथ जी को बताया कि भगवान ने उन्हें मूर्ति न रखने का आदेश दिया था। पर नाथ जी अपनी बात पर अड़े रहे और राजा को मूर्ति स्थापित करने के लिए मजबूर कर दिया।

#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
जगन्नाथ मंदिर बनने के बाद
एक नाथ संत ने मंदिर में मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। राजा इन्द्रदमन ने नाथ जी को बताया कि भगवान ने उन्हें मूर्ति न रखने का आदेश दिया था। पर नाथ जी अपनी बात पर अड़े रहे और राजा को मूर्ति स्थापित करने के लिए मजबूर कर दिया।