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Shankar Kumar Nirala

@sk26011996

बिना निराश हुए ही हार को सह लेना साहस की सबसे बड़ी परीक्षा है”

ID: 4110427678

calendar_today04-11-2015 07:24:54

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Hindi Kavita (@hindi_kavitaa) 's Twitter Profile Photo

पानी वृत्ताकार है। जिस जगह से चला है, कभी न कभी वहाँ ज़रूर लौटकर आता है। अगर वह जगह नष्ट हो जाए, तो उस जगह को देखनेवाली आँखों में लौटकर आता है। गीत चतुर्वेदी

Ashutosh Rana (@ranaashutosh10) 's Twitter Profile Photo

मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए कोई सपना बुनो ज़िंदगी के लिए। जिसके दिल में घृणा का है ज्वालामुखी,वह ज़हर क्यों पिये खुदकुशी के लिए। सारी दुनिया को जब हमने अपना लिया,कौन बाकी रहा दुश्मनी के लिए। सब ग़लतफहमियाँ दूर हो जाएँगी, हँस मिल लो गले दो घड़ी के लिए। रचना-श्रीउदयभानु हंस

Jaiky Yadav (@jaikyyadav16) 's Twitter Profile Photo

ये बच्चा एक दिन बहुत बड़ा ब्लॉगर बनेगा क्योंकि इसकी अपनी क्षेत्रीय भाषा ही इसे आगे बढ़ाएगी।😀

Kapil Sharma F.C. (@kapil_fc) 's Twitter Profile Photo

महाराष्ट्र के बीड के युवा कवि अभि मुंडे की कविता इतनी असरदार कि उन्हें PM आवास, दिल्ली बुलाया गया रामजी को इतनी सरलता से शायद पहली बार किसी ने समझाया है बहुत सुंदर प्रस्तुति जय श्रीराम 🚩🙏

Kalamshala (@kalamshala1) 's Twitter Profile Photo

यहाँ हर शख़्स हर पल हादिसा होने से डरता है खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम-सा बच्चा बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है न बस में ज़िन्दगी इसके न क़ाबू मौत पर इसका मगर इन्सान फिर भी कब ख़ुदा होने से डरता है राजेश रेड्डी ✨

Biharology (@biharology) 's Twitter Profile Photo

🎯BPSC Prelims Pulse🎯 ✴️स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रसिद्ध समाचार पत्र और पत्रिकाएँ ​◾️बंगाल गजट (1780) 🔹संस्थापक: जेम्स ऑगस्टस हिकी 🔹तथ्य: भारत का पहला समाचार पत्र। वारेन हेस्टिंग्स की आलोचना करने के कारण इसे जब्त कर लिया गया था। ​◾️संवाद कौमुदी (1821) 🔹लेखक: राजा राम

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रोज़ सवेरे दिन का निकलना,शाम में ढलना जारी है जाने कब से रूहों का ये ज़िस्म बदलना जारी है तपती रेत पे दौड़ रहा है दरिया की उम्मीद लिए सदियों से इन्सान का अपने आपको छलना जारी है . राजेश रेड्डी(Rajesh Reddy)✨

The Lallantop (@thelallantop) 's Twitter Profile Photo

आज 'लिटरेचर कैप्सूल' में सुनिए कैलाश वाजपेयी की कविता- लयताल Literature Capsule | Poetry

काव्य कुटीर (@kavyakutir) 's Twitter Profile Photo

कलयुग में गैरों से कम सावधान रहें अपनो से ज्यादा सावधान रहें...💯💯

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दिल नाम की कोई चीज़ आदमी के शरीर में है, हमें नहीं मालूम।पता नहीं आदमी 'लंग्स' को दिल कहता है या 'हार्ट' को। जो भी हो 'हार्ट', 'लंग्स' या 'लीवर' का प्रेम से कोई संबंध नहीं है। - फणीश्वरनाथ रेणु आंचलिकता के अग्रदूत को पुण्यतिथि पर सादर नमन

दिल नाम की कोई चीज़ आदमी के शरीर में है, 
हमें नहीं मालूम।पता नहीं आदमी
'लंग्स' को दिल कहता है या 'हार्ट' को। 
जो भी हो 'हार्ट', 'लंग्स' या 'लीवर' का 
प्रेम से कोई संबंध नहीं है।

- फणीश्वरनाथ रेणु 
आंचलिकता के अग्रदूत को पुण्यतिथि पर सादर नमन
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जब चला तब दूसरे दु:ख थे अब लौटा तो कुछ और। एक लंबी यात्रा में इससे अधिक क्या हो सकता है- कि हम अपने दु:ख बदल लें। - सुशोभित । जन्मदिवस विशेष

जब चला तब
दूसरे दु:ख थे
अब लौटा तो
कुछ और।

एक लंबी यात्रा में
इससे अधिक क्या
हो सकता है-
कि हम अपने
दु:ख बदल लें।

- सुशोभित । जन्मदिवस विशेष
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एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है जोश मलीहाबादी

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हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए! - कुँअर बेचैन

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए 
ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए!

- कुँअर बेचैन
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पुल को भरोसा था अगर वह एक दिन गिर गया तो नदी उसे थाम लेगी नदी को भी यकीन था पुल उसे दूर बहने नहीं देगा पानी की हर बूँद को अपनी अलग कहानी कहने नहीं देगा - विमल कुमार

पुल को भरोसा था 
अगर वह एक दिन गिर गया 
तो नदी उसे थाम लेगी 
नदी को भी यकीन था 
पुल उसे दूर बहने नहीं देगा 
पानी की हर बूँद को 
अपनी अलग कहानी कहने नहीं देगा

- विमल कुमार
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मस्ती-भरी वो उम्र सुहानी किधर गयी वो रेत के घरों की निशानी किधर गयी चिन्ताएँ जब भी हद से बढ़ीं सोचना पड़ा थी जूझती जो इनसे जवानी किधर गयी पीपल न ताल है, न है चौपाल ही कहीं पुरखों की एक-एक निशानी किधर गयी - दरवेश भारती ✨

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चराग़ों को आँखों में महफूज़ रखना बड़ी दूर तक रात ही रात होगी

चराग़ों को आँखों में महफूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी