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Shreya Maurya

@shreyam25977138

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calendar_today24-05-2022 16:27:13

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Harsh Dubey (@harshdu32611429) 's Twitter Profile Photo

AzaadBharat Official पंचमहाभूत केवल सृष्टि ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का भी आधार हैं। इनका संतुलन बनाए रखने के लिए उचित आहार विहार, योग, ध्यान, प्राणायाम और हस्त मुद्राओं का अभ्यास आवश्यक है।

<a href="/AzaadBharatOrg/">AzaadBharat Official</a> पंचमहाभूत केवल सृष्टि ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का भी आधार हैं। इनका संतुलन बनाए रखने के लिए उचित आहार विहार, योग, ध्यान, प्राणायाम और हस्त मुद्राओं का अभ्यास आवश्यक है।
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भारतीय संस्कृति में पंचमहाभूत को संपूर्ण सृष्टि और मानव शरीर के मूलभूत घटक माना गया है मुद्रा विज्ञान के अनुसार,हमारे हाथों की प्रत्येक उंगली का संबंध एक विशिष्ट महाभूत से होता है।उचित मुद्राओं से इन तत्वों को संतुलित कर लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। azaadbharat.org/?p=10695

भारतीय संस्कृति में पंचमहाभूत को संपूर्ण सृष्टि और मानव शरीर के मूलभूत घटक माना गया है मुद्रा विज्ञान के अनुसार,हमारे हाथों की प्रत्येक उंगली का संबंध एक विशिष्ट महाभूत से होता है।उचित मुद्राओं से इन तत्वों को संतुलित कर लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।  

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|| आर्यावर्त || (@aryavrta_) 's Twitter Profile Photo

होली के बाद २०-२५ दिन तक बिना नमक का अथवा कम नमक वाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हितकारी है। इन दिनों में भुने हुए चने - 'होला' का सेवन शरीर से वात, कफ आदि दोषों का शमन करता है । इन दिनों सुबह नीम के २०-२५ कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खाने से व्यक्ति वर्षभर निरोग रहता है।

होली के बाद २०-२५ दिन तक बिना
नमक का अथवा कम नमक वाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हितकारी है।

इन दिनों में भुने हुए चने -
'होला' का सेवन शरीर से वात, कफ आदि दोषों का शमन करता है । इन दिनों सुबह नीम के २०-२५ कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा
के खाने से व्यक्ति वर्षभर निरोग रहता है।
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|| आर्यावर्त || G बिल्कुल , होलिकोत्सव वैदिक उत्सव है, साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, पूरे साल स्वस्थ्य रहने के लिए... होली के बाद 15-20 दिन नीम की कोंपलें 20-25-30 व एक काली मिर्च चबा के खाये । समझो, वर्षभर रोगप्रतिकारकशक्ति का खजाना उसके शरीर में रहेगा । - पूज्य बापूजी

<a href="/Aryavrta_/">|| आर्यावर्त ||</a> G बिल्कुल , होलिकोत्सव वैदिक उत्सव है, साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, पूरे साल स्वस्थ्य रहने के लिए...

होली के बाद 15-20 दिन नीम की कोंपलें 20-25-30 व एक काली मिर्च चबा के खाये । समझो, वर्षभर रोगप्रतिकारकशक्ति का खजाना उसके शरीर में रहेगा ।
- पूज्य बापूजी
Ashhok Modaani (@ashokma81098907) 's Twitter Profile Photo

Young India Speaks *🔹गुजरात केस समाचार🔹* *20 मार्च 2025* *🔹आज कोर्ट में पूज्यश्री की अंतरिम जमानत (Interim Bail) को 31 मार्च के बाद आगे बढ़ाने के लिए सुनवाई थी l* *🔹 कोर्ट ने फरियादी के वकील के द्वारा समय मांगने के कारण सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च दी है।* 🙏🏻संत श्री आशारामजी आश्रम🙏🏻

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God’s power is beyond imagination; just believe! धर्म और भगवान की शक्ति का सामर्थ्य...

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हिंदू धर्म केवल जाति व्यवस्था नहीं हैं बल्कि यह मोक्ष की असीम यात्रा है! हिंदू धर्म उन लोगों को भी स्वीकार करता है जो देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा करते हैं, और उन लोगों को भी जो केवल ध्यान और योग को ही आध्यात्मिकता मानते हैं। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻azaadbharat.org/?p=10864

हिंदू धर्म केवल जाति व्यवस्था नहीं हैं बल्कि यह मोक्ष की असीम यात्रा है! 
हिंदू धर्म उन लोगों को भी स्वीकार करता है जो देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा करते हैं, और उन लोगों को भी जो केवल ध्यान और योग को ही आध्यात्मिकता मानते हैं।  
पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻azaadbharat.org/?p=10864
Vivek Bundele (@vivekbundele4) 's Twitter Profile Photo

Young India Speaks धर्म रक्षतो धर्म हा जर धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है बहुत ही सुंदर वचन

Ashhok Modaani (@ashokma81098907) 's Twitter Profile Photo

AzaadBharat Official बौद्ध धर्म चार आर्य सत्य – संसार दुखमय है, दुख का कारण तृष्णा है, दुख का अंत संभव है, और उसके लिए अष्टांगिक मार्ग का पालन करना चाहिए। आज कल्पना कीजिए कि दो लोग एक ही स्थान पर पहुँचना चाहते हैं—एक ट्रेन से जाता है, दूसरा कार से। भले ही रास्ते अलग हों, लेकिन गंतव्य एक ही है!

<a href="/AzaadBharatOrg/">AzaadBharat Official</a> बौद्ध धर्म  चार आर्य सत्य – संसार दुखमय है, दुख का कारण तृष्णा है, दुख का अंत संभव है, और उसके लिए अष्टांगिक मार्ग का पालन करना चाहिए।

आज कल्पना कीजिए कि दो लोग एक ही स्थान पर पहुँचना चाहते हैं—एक ट्रेन से जाता है, दूसरा कार से। भले ही रास्ते अलग हों, लेकिन गंतव्य एक ही है!