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⚡🅰🌴🌴⛎ Ⓜ📧❡♓ ( Sattu Meghwanshi )

@satpal25012004

यूँ ही नहीं आती खूबसूरती
दोस्ती और रिश्तों में
अलग-अलग विचारों को
एक होना पड़ता है - sattu

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calendar_today14-01-2018 14:45:38

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🇮🇳 Vikram das (@dass1vikram) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह आज से 28 वर्ष पूर्व संत रामपाल जी महाराज को परमेश्वर कबीर साहेब जी संवत् 2054 फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष एकम (मार्च 1997) को दिन के दस बजे मिले थे। जिसका जिक्र संत रामपाल जी महाराज ने अपने द्वारा लिखित पुस्तक आध्यात्मिक ज्ञान गंगा में भी कर रखा है।

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह
आज से 28 वर्ष पूर्व संत रामपाल जी महाराज को परमेश्वर कबीर साहेब जी संवत् 2054 फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष एकम (मार्च 1997) को दिन के दस बजे मिले थे। जिसका जिक्र संत रामपाल जी महाराज ने अपने द्वारा लिखित पुस्तक आध्यात्मिक ज्ञान गंगा में भी कर रखा है।
𝐎𝐟𝐟𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥_𝐏𝐚𝐲𝐚𝐥_𝐆𝐮𝐩𝐭𝐚 (@ygaikji4rrptyjk) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह JIN MOKUN NIJ NAAM DIYA, SOYI SATGURU HAMARA. DADU DOOSRA KOYE NAHIN, KABIR SRIJANHAAR. In this teaching, Dadu Ji, declared that the one who appeared and bestowed upon him the true naam was none other than Kabir Parmeshwar Ji, the Creator of all universes.

hemlata patel 100k🏳 follow back (@patelhemlata917) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह मीराबाई को भी कबीर साहेब सतगुरु रूप में मिले थे। जिसकी गवाही स्वयं संत गरीबदास जी ने दी है: गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।। गरीब, राग रूप सब तन भया, सुरति सुतार शरीर Sant Rampal Ji Maharaj

SHYAM MANOHAR PRAJAPATI (@manoharshy32163) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह संत गरीबदास जी को कबीर परमात्मा जिंदा महात्मा के रूप में गाँव छुड़ानी में मिले थे। उन्हें सतलोक दिखाया और वापिस छोड़ा। जिसकी आँखों देखी गवाही देते हुए संत गरीबदास जी ने कहा है: गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।

Munni sahu (@munni_sahu) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह इस्लाम धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मुहम्मद को कबीर परमात्मा मिले थे। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है: होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूँ मुर्शिद मिले कबीर

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह 
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मुहम्मद को कबीर परमात्मा मिले थे। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूँ मुर्शिद मिले कबीर
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#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह संत रविदास जी: "कहै रैदास कबीर गुर मेरा।" संत रविदास जी ने पहले रामानंद जी से नाम दीक्षा ली लेकिन बाद में कबीर जी की समर्थता को देखते हुए कबीर साहब को गुरु बनाया👉 भ्रम और कर्म का त्याग कर कबीर जी को गुरु माना। 6Days Left Kabir Prakat Diwas

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह
संत रविदास जी: "कहै रैदास कबीर गुर मेरा।" संत रविदास जी ने पहले रामानंद जी से नाम दीक्षा ली लेकिन बाद में कबीर जी की समर्थता को देखते हुए कबीर साहब को गुरु बनाया👉 भ्रम और कर्म का त्याग कर कबीर जी को गुरु माना।
6Days Left Kabir Prakat Diwas
Durga Prasad Das (@durgapr44826937) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह सूफी संत रूमी को कबीर परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में 15 नवंबर 1244 को कोन्या में मिले।जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद(गुरू)शम्स तबरेज की बड़ाई में लिखी दो रचनाओं मसनवी और दीवान-ए-कबीर मेंभी कबीर परमात्माअर्थातअल-खिज्र का जिक्र किया है।

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह
सूफी संत रूमी को कबीर परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में 15 नवंबर 1244 को कोन्या में मिले।जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद(गुरू)शम्स तबरेज की बड़ाई में लिखी दो रचनाओं मसनवी और दीवान-ए-कबीर मेंभी कबीर परमात्माअर्थातअल-खिज्र का जिक्र किया है।
Ajeet Kumar Yadav Ajeet Kumar Yadav (@ajeetku87564755) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह सिख धर्म के प्रवर्तक नानक जी को पूर्ण परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रूप में बेई नदी, सुल्तानपुर (वर्तमान पश्चिमी पाकिस्तान) में मिले, सच्चखंड (सतलोक) दिखाया और वापिस छोड़ा। नानक जी ने कहा है: वाह-वाह कबीर गुरू पूरा है। 6Days Left Kabir Prakat Diwas

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह
सिख धर्म के प्रवर्तक नानक जी को पूर्ण परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रूप में बेई नदी, सुल्तानपुर (वर्तमान पश्चिमी पाकिस्तान) में मिले, सच्चखंड (सतलोक) दिखाया और वापिस छोड़ा। नानक जी ने कहा है:
वाह-वाह कबीर गुरू पूरा है।
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Lalit Das (@lalit2821) 's Twitter Profile Photo

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह सूफी संत रूमी को कबीर परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में 15 नवंबर 1244 को कोन्या में मिले। जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद (गुरू) शम्स तबरेज की बड़ाई में लिखी दो रचनाओं मसनवी और दीवान-ए-कबीर में भी कबीर परमात्मा अर्थात अल-खिज्र 6Days Left Kabir Prakat Diwas

#भगवान_के_चश्मदीद_गवाह
 सूफी संत रूमी को कबीर परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में 15 नवंबर 1244 को कोन्या में मिले। जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद (गुरू) शम्स तबरेज की बड़ाई में लिखी दो रचनाओं मसनवी और दीवान-ए-कबीर में भी कबीर परमात्मा अर्थात अल-खिज्र 

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