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Rahul Sankrityayan

@sankrityayan_

All About Rahul Sankrityayan's literature. He is the Father of Indian Travelogue Travel literature.
(9 Apr'1893 - 14 Apr'1963) #RahulSankrityayan

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वह प्रेम कैसा जो आदमी की विवेक-बुद्धि पर परदा डाल दे, सारी प्रतिभा को बेकार कर दे। ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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यह अच्छा तर्क है, स्त्री को पहले हाथ-पैर बाँधकर पटक दो और फिर उसके बाद कहो कि इतिहास में तो साहसी यात्रिणियों का कहीं नाम नहीं आता। ~ राहुल सांकृत्यायन

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जिस दिन भूमि को स्वर्ग के परिणत कर दिया जायेगा, उस दिन आकाश का स्वर्ग ढह पड़ेगा। ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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बँधी हुई लेखनी को खोलने का काम यदि घुमक्कड़ी नहीं कर सकती, तो कोई दूसरा नहीं कर सकता। - राहुल सांकृत्यायन

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मृत्यु को नाहक ही भय की वस्तु समझा जाता है। यदि जीवन में कोई अप्रिय वस्तु है तो वह वस्तुत: मृत्यु नहीं है, मृत्यु का भय है। - राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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यह अच्छा तर्क है, स्त्री को पहले हाथ-पैर बाँधकर पटक दो और फिर उसके बाद कहो कि इतिहास में तो साहसी यात्रिणियों का कहीं नाम नहीं आता। ~ राहुल सांकृत्यायन

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बाहरी दुनिया से अधिक बाधाएं आदमी के दिल में होती हैं। वह कैसा प्रेम जो आदमी की विवेक बुद्धि पर पर्दा डाल दे, सारी प्रतिभा को बेकार कर दे? ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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बँधी हुई लेखनी को खोलने का काम यदि घुमक्कड़ी नहीं कर सकती, तो कोई दूसरा नहीं कर सकता। - राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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बाहरी दुनिया से अधिक बाधाएँ आदमी के दिल मे होती हैं..। - राहुल सांकृत्यायन

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रूढ़ियों को लोग इसलिए मानते हैं, क्योंकि उनके सामने रूढ़ियों को तोड़ने वालों के उदाहरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। - राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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चलना मनुष्य का धर्म है, जिसने इसे छोड़ा वह मनुष्य होने का अधिकारी नहीं। ~ राहुल सांकृत्यायन

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वह प्रेम कैसा जो आदमी की विवेक-बुद्धि पर परदा डाल दे, सारी प्रतिभा को बेकार कर दे। ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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वह प्रेम कैसा जो आदमी की विवेक-बुद्धि पर परदा डाल दे, सारी प्रतिभा को बेकार कर दे। ~ राहुल सांकृत्यायन

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बाहरी दुनिया से अधिक बाधाएँ आदमी के दिल में होती हैं। ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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"रूढ़ियों को लोग इसलिए मानते हैं, क्योंकि उनके सामने रूढ़ियों को तोड़ने वालों के उदाहरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं।" ~ राहुल सांकृत्यायन

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स्त्रियों ने पहले-पहले जब घूंघट छोड़ा तो क्या कम हल्ला मचा था और उन पर क्या कम लांछन लगाए गए थे? लेकिन हमारी आधुनिक पंचकन्याओं ने दिखला दिया कि साहस करने वाला सफल होता है और सफल होने वाले के सामने सभी सिर झुकाते हैं। ~ राहुल सांकृत्यायन kavishala.in/sootradhar/rah…

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बाहरी दुनिया से अधिक बाधाएँ आदमी के दिल में होती हैं। राहुल सांकृत्यायन kavishala.com/sootradhar/rah…

बाहरी दुनिया से अधिक बाधाएँ आदमी के दिल में होती हैं।

 राहुल सांकृत्यायन

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बँधी हुई लेखनी को खोलने का काम यदि घुमक्कड़ी नहीं कर सकती, तो कोई दूसरा नहीं कर सकता। - राहुल सांकृत्यायन

बँधी हुई लेखनी को खोलने का काम यदि घुमक्कड़ी नहीं कर सकती, तो कोई दूसरा नहीं कर सकता।  

- राहुल सांकृत्यायन