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Vimal Nautiyal

@saffrondevdaar

सामाजिक कार्यकर्ता | Traveler | Seeker | Activist | Dendrophile

#ProjectUkhyata

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calendar_today11-06-2020 07:26:57

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“Executive Pastry Chef” से किसान तक का सफ़र दिल्ली–चेन्नई–विदेशों की चमक छोड़कर, विमल नौटियाल लौटे अपने गाँव टिहरी गढ़वाल। लोग बोले – “पढ़-लिखकर खेती करेगा? पागल हो गया है” लेकिन आज उनके हरे-भरे बगीचे, उन सबको जवाब हैं। यह सिर्फ़ खेती नहीं, यह है गाँव के सपनों को जीने की

Imtiaz Mahmood (@imtiazmadmood) 's Twitter Profile Photo

"Nathuram Godse shot Gandhi and waited. Silently. Calmly. Not to escape, but to explain. Because to him, Gandhi wasn’t a Mahatma anymore. He was the man who surrendered Bharat’s soul. Born in 1910, Godse was first raised as a girl, with a nose ring & feminine attire, to “fool

V Ashish Nautiyal (@ashu_nauty) 's Twitter Profile Photo

#KantaraChapter1 की फ़िल्म समीक्षा लिखी है, ऑपइंडिया पर जाकर पढ़िए - मंदिर की घंटी, पायल की खनक और देवता की हुंकार: ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ ने बदल दिया फिल्मों का ‘786’ वाला अवतार, ये मनोरंजन से बढ़कर सांस्कृतिक अनुष्ठान है hindi.opindia.com/miscellaneous/…

#KantaraChapter1 की फ़िल्म समीक्षा लिखी है, <a href="/OpIndia_in/">ऑपइंडिया</a> पर जाकर पढ़िए - मंदिर की घंटी, पायल की खनक और देवता की हुंकार: ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ ने बदल दिया फिल्मों का ‘786’ वाला अवतार, ये मनोरंजन से बढ़कर सांस्कृतिक अनुष्ठान है

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Manish Shrivastava (@shrimaan) 's Twitter Profile Photo

यह सब बहुत चुपचाप होता है। न कोई शोर, न विदाई के फूल। बस एक सुबह आप देखते हैं कि घर में किसी की आवाज़ कम हो गई है। हर सुबह अख़बार अब वैसा नहीं फरफराता, घर के मंदिर की घंटी वैसे नहीं बजती और आँगन की वो कुर्सी, जो सूरज की तरफ़ मुड़ी रहती थी वो अब खाली हो चुकी है। यही नया भारत

यह सब बहुत चुपचाप होता है।  न कोई शोर, न विदाई के फूल। 
बस एक सुबह आप देखते हैं कि घर में किसी की आवाज़ कम हो गई है। हर सुबह अख़बार अब वैसा नहीं फरफराता, घर के मंदिर की घंटी वैसे नहीं बजती और आँगन की वो कुर्सी, जो सूरज की तरफ़ मुड़ी रहती थी वो अब खाली हो चुकी है।

यही नया भारत
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जब मैं कहता हूँ कि "समाज में संवाद की मृत्यु WhatsApp पर नहीं, हमारे घरों के बाहर से चौंतरे हटने से शुरू हुई" तो लोग मुस्करा देते हैं लेकिन मैं जानता हूँ कि यह हँसी कितनी खोखली है।आज वही जगह गेटेड हो चुकी है। हमारे घर ऊँचे हो गए हैं, पर नज़रें नीचे मिलना भूल गई हैं।हम डिजिटल रूप

जब मैं कहता हूँ कि "समाज में संवाद की मृत्यु WhatsApp पर नहीं, हमारे घरों के बाहर से चौंतरे हटने से शुरू हुई"  तो लोग मुस्करा देते हैं लेकिन मैं जानता हूँ कि यह हँसी कितनी खोखली है।आज वही जगह गेटेड हो चुकी है। हमारे घर ऊँचे हो गए हैं, पर नज़रें नीचे मिलना भूल गई हैं।हम डिजिटल रूप
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"सत्ता तभी सार्थक होती है जब वह सुनने की शक्ति रखती है।" ऐसा फ़्रेडरिक नीत्शे का कहना था। यही बात आज उत्तराखंड की राजनीति पर पूरी तरह लागू होती है। जिस प्रदेश ने दो दशक तक अस्थिरता देखी, वहाँ अब एक ऐसा नेतृत्व है जिसने सिर्फ़ चार साल में वो कर दिखाया जो 9 मुख्यमंत्रियों की

"सत्ता तभी सार्थक होती है जब वह सुनने की शक्ति रखती है।" ऐसा फ़्रेडरिक नीत्शे का कहना था।

यही बात आज उत्तराखंड की राजनीति पर पूरी तरह लागू होती है। जिस प्रदेश ने दो दशक तक अस्थिरता देखी, वहाँ अब एक ऐसा नेतृत्व है जिसने सिर्फ़ चार साल में वो कर दिखाया जो 9 मुख्यमंत्रियों की
उम्दा_पंक्तियां (@umda_panktiyaan) 's Twitter Profile Photo

इस वीडियो पर सबसे उम्दा पंक्ति लिखने वाले को फॉलो मिलेगा...

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देवलसारी, उत्तराखंड में ग्रामीण सनातन की परंपरा को जीवित रखने के प्रयास कर रहे हैं। आप चाहें तो इस रामलीला में आर्थिक मदद कर सकते हैं। (UPI- mahipalranamahipal916@oksbi) आपका नाम रामलीला में अनाउंस भी करवाया जाएगा, और जब आप पैसा भेजें तो उसमें इस ट्वीट का उल्लेख अवश्य करें। प्रभु

देवलसारी, उत्तराखंड में ग्रामीण सनातन की परंपरा को जीवित रखने के प्रयास कर रहे हैं। आप चाहें तो इस रामलीला में आर्थिक मदद कर सकते हैं। (UPI- mahipalranamahipal916@oksbi) आपका नाम रामलीला में अनाउंस भी करवाया जाएगा, और जब आप पैसा भेजें तो उसमें इस ट्वीट का उल्लेख अवश्य करें। प्रभु
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श्री रामलीला का सीधा प्रसारण नीचे दी गयी लिंक पे आप देख सकते हैं facebook.com/10006830608261…

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कॉमरेड ‘पथिक’ और उनके हनुमान कभी देवलसारी के सघन कानन में, जब माघ की भुरभुरी ठंड देवदारों की शाखों पर उतरती, तब वहाँ एक मंच पर कोई अग्नि की लौ सी नज़र आती। वह हनुमानजी थे। पर देवत्व की मूर्ति नहीं, मनुष्य के संकल्प में। उस हनुमान में जो देवत्व था, वह किसी चमत्कार से नहीं उतरा

कॉमरेड ‘पथिक’ और उनके हनुमान

कभी देवलसारी के सघन कानन में, जब माघ की भुरभुरी ठंड देवदारों की शाखों पर उतरती, तब वहाँ एक मंच पर कोई अग्नि की लौ सी नज़र आती। वह हनुमानजी थे। पर देवत्व की मूर्ति नहीं, मनुष्य के संकल्प में। उस हनुमान में जो देवत्व था, वह किसी चमत्कार से नहीं उतरा
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70 साल से अधिक की उम्र में पिता जी हनुमान जी के रूप में दृश्य में हनुमान जी श्रीराम से पूछ रहे हैं, "को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा, कठिन भूमि कोमल पद गामी..कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी"

70 साल से अधिक की उम्र में पिता जी हनुमान जी के रूप में

दृश्य में हनुमान जी श्रीराम से पूछ रहे हैं, "को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा, कठिन भूमि कोमल पद गामी..कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी"
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आपका ध्यान न्यूयॉर्क के मेयर पर है लेकिन मसूरी की मेयर मीरा सकलानी जी आज देवलसारी की रामलीला में पहुँच गई हैं। 😁

आपका ध्यान न्यूयॉर्क के मेयर पर है लेकिन मसूरी की मेयर मीरा सकलानी जी आज देवलसारी की रामलीला में पहुँच गई हैं। 😁
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I still remember that terrible phase of my life, when I was engulfed in pain so profound that my family could not help but notice, their faces etched with worry. I left home, taking up a corporate job; a 9-to-5 existence, which surprised my family and friends all the more. (Yes,

I still remember that terrible phase of my life, when I was engulfed in pain so profound that my family could not help but notice, their faces etched with worry. I left home, taking up a corporate job; a 9-to-5 existence, which surprised my family and friends all the more. (Yes,
Nupur J Sharma (@unsubtledesi) 's Twitter Profile Photo

To me, Rahul Roushan is a friend and a mentor. The OG. The man who dared to start OpIndia when everyone was a slave to mainstream media. The man who dared to treat the sold out left and insidious Jihadis exactly how they treat us OpIndia turns 11. Here’s to many more 🎉 👊

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Is Germany's DW News Quietly Building an Anti-India Narrative? PM Modi, Indian media, and Hindu society have always been in the crosshairs of DW News. During COVID, it called India "Out of Control," referred to the army in Kashmir as "Occupying Forces," and gives platform to