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Siddharth Tripathi / SidTree (@sidtree) 's Twitter Profile Photo

कल रात दफ़्तर से वापस लौटा तो किताबों का एक जोड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था। कोई हाथ में कलम पकड़कर किताब के शीर्षक वाले पन्ने पर आपका नाम लिखे और अपनी किताबें आत्मीयता के साथ दुनिया के सबसे पुराने शहर बनारस से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे… तो उसे ग्रहण करना एक सुख है.. धीमी आँच पर

कल रात दफ़्तर से वापस लौटा तो किताबों का एक जोड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था।

कोई हाथ में कलम पकड़कर किताब के शीर्षक वाले पन्ने पर आपका नाम लिखे और अपनी किताबें आत्मीयता के साथ दुनिया के सबसे पुराने शहर बनारस से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजे…
तो उसे ग्रहण करना एक सुख है.. 
धीमी आँच पर
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.Vyomesh Shukla एक ऐसे कवि जो कभी डाकू बनना चाहते थे... की Rukh Publications से प्रकाशित 'आग और पानी' किताब बनारस को उसके सबसे गाढ़े और मनोहर रंगों में पहचानती है.. इस पुस्तक पर लेखक से वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय/ Jai Prakash Pandey की बतकही. youtu.be/CT9i7Qjqxiw

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'माँ बच्चे के दोष देखती भी है तो उसे अपनी ही विफलता मानती है अगर वह भी उसे क़ुसूरवार ठहराती तो दुनिया में मनुष्य की कोई शरण न होती' ~ पंकज चतुर्वेदी _________________________ {'आकाश में अर्द्धचन्द्र', Rukh Publications से} [Art Courtesy : सिरिस सिरिस]

'माँ बच्चे के दोष 
देखती भी है तो 
उसे अपनी ही 
विफलता मानती है 

अगर वह भी उसे 
क़ुसूरवार ठहराती 
तो दुनिया में मनुष्य की 
कोई शरण न होती'

~ पंकज चतुर्वेदी

_________________________

{'आकाश में अर्द्धचन्द्र', <a href="/Rukhpub/">Rukh Publications</a> से}

[Art Courtesy : सिरिस सिरिस]
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'यही' मैं उसके दरवाज़े पर दस्तक देता या वह मेरे प्राणों के लिए यही सबसे काम्य था मगर यही सबसे मुश्किल था दुनिया में.. (#आकाश_में_अर्द्धचन्द्र:काव्य संग्रह: "तेजी से बदलते समाज,मूल्य,राग,विराग सियासत,संत्रास को ध्वनित करती कविताएं") ~पंकज चतुर्वेदी✍️ {Art Courtesy:Pankaj Dixit}

'यही'

मैं उसके दरवाज़े पर
दस्तक देता
या वह मेरे
प्राणों के लिए
यही सबसे काम्य था
मगर यही
सबसे मुश्किल था
दुनिया में..

(#आकाश_में_अर्द्धचन्द्र:काव्य संग्रह:
"तेजी से बदलते समाज,मूल्य,राग,विराग
सियासत,संत्रास को ध्वनित करती कविताएं")

~पंकज चतुर्वेदी✍️
{Art Courtesy:Pankaj Dixit}
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"आंसू जो छलक गया आंख से... सबूत है कि बर्तन भर गया दुःख का...!" ~पंकज चतुर्वेदी ("आकाश में अर्द्धचन्द्र ":संग्रह: जहां भावनाओं की नदी,घुटन का सैलाब,अनुराग की शीतल बयार, मानवीय मूल्यों का क्षरण,सियासत के दावपेंच से उभरी जनसंत्रास की मुखर पीड़ा,निराशाओं के मध्य आशाओं का सेतु है।)

"आंसू जो
छलक गया
आंख से...
सबूत है कि
बर्तन भर गया
दुःख का...!"

~पंकज चतुर्वेदी

("आकाश में अर्द्धचन्द्र ":संग्रह:
जहां भावनाओं की नदी,घुटन का
सैलाब,अनुराग की शीतल बयार,
मानवीय मूल्यों का क्षरण,सियासत
के दावपेंच से उभरी जनसंत्रास की
मुखर पीड़ा,निराशाओं के मध्य
आशाओं का सेतु है।)
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लंदन में बस के सफ़र में अपनी प्रिय पुस्तक के साथ कवि-मित्र समर्थ वशिष्ठ Rukh Publications || Geet Chaturvedi

लंदन में बस के सफ़र में अपनी प्रिय पुस्तक के साथ कवि-मित्र समर्थ वशिष्ठ 

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सुरमई सरगम : मैं काफी दिनों से रो नहीं पा रही हूँ, लेकिन “बिल्लियाँ” पढ़ते पढ़ते मैं रोने लगी और वो बड़ी राहत की बात लग रही है मुझे, ऐसा नहीं है कि मैं उस परेशानी से आज़ाद हो गयी हूँ फिर भी बहुत सांस लेने जैसा महसूस हुआ उस दिन रो कर। Geet Chaturvedi Rukh Publications

सुरमई सरगम : 

मैं काफी दिनों से रो नहीं पा रही हूँ, लेकिन  “बिल्लियाँ” पढ़ते पढ़ते मैं रोने लगी और वो बड़ी राहत की बात लग रही है मुझे, ऐसा नहीं है कि मैं उस परेशानी से आज़ाद हो गयी हूँ फिर भी बहुत सांस लेने जैसा महसूस हुआ उस दिन रो कर। 

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'आकाश में अर्द्धचन्द्र' से एक कविता 'अब हर चीज़' का संवेदनशील और सुन्दर पाठ किया है सोमेश त्रिपाठी 'निर्झर' ने। साभार प्रस्तुत : Anurag Vats 🇺🇦 Richa K Rukh Publications

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"हर ओट का इस्तेमाल हम छिपने के लिए करते हैं. यह देह भी महज़ छिपने की एक जगह है." किताब - अधूरी चीज़ों का देवता लेखक - गीत चतुर्वेदी

"हर ओट का इस्तेमाल हम छिपने के लिए करते हैं.
यह देह भी महज़ छिपने की एक जगह है."

किताब - अधूरी चीज़ों का देवता 
लेखक - गीत चतुर्वेदी
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‘उम्मीद प्रेम का अन्न है’ प्रेम और मृत्यु के इर्द-गिर्द लिखी गई कविताओं की किताब है। कुल 44 कविताओं के साथ गद्य का एक टुकड़ा भी है, जिसे कविता के फ़ुटनोट के तौर पर भी पढ़ा जा सकता है। Rukh Publications rukhpublication.com

‘उम्मीद प्रेम का अन्न है’ प्रेम और मृत्यु के इर्द-गिर्द लिखी गई कविताओं की किताब है। कुल 44 कविताओं के साथ गद्य का एक टुकड़ा भी है, जिसे कविता के फ़ुटनोट के तौर पर भी पढ़ा जा सकता है। 

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उम्मीद प्रेम का अन्न है Anurag Vats 🇺🇦 Click to buy : tinyurl.com/45aj73fe #ummeedpremkaannahai #anuragvats #rukhpublications #poetry #hindipoem

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•जब भी अनुचित कुछ• ______________ "जब भी अनुचित कुछ कह जाता हूँ पछताता हूँ पाता हूँ : दुर्लभ है हृदय की निर्मलता" __________ ('आकाश में अर्द्धचन्द्र', संग्रह 2022,से) #पंकज_चतुर्वेदी PANKAJ CHATURVEDI {Art Courtesy : @smritiii_01} Rukh Publications

•जब भी अनुचित कुछ•
______________

"जब भी अनुचित कुछ
कह जाता हूँ
पछताता हूँ 

पाता हूँ :
दुर्लभ है
हृदय की निर्मलता"
__________

('आकाश में अर्द्धचन्द्र', संग्रह 2022,से)
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'माँ कहती थी : जो दर्पण टूट जाए उसमें छवि नहीं देखा करते उसने यह नहीं बताया था कि दूसरा दर्पण होता नहीं है' ~ पंकज चतुर्वेदी ______________________________ {'आकाश में अर्द्धचन्द्र', रुख़ पब्लिकेशन्स Rukh Publications, नयी दिल्ली, 2022}

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जल्द ही अपने पाठकों के पास : गार्जियनता #guardianta #vyomeshshukla #rukhpublications #bookpublishing #hindiliterature #memoirs #family #hindibooks

जल्द ही अपने पाठकों के पास : गार्जियनता 

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‘मुझे यक़ीन था कि एक दिन माँ नहीं रहेंगी.’ यह पंक्ति धक से धड़कन रोक सी देती है. इस किताब में ऐसा बहुत दफ़ा होता है. लेकिन बहुत दफ़ा आनंद आता जाता है. अपने परिवार और परिजनों के साथ-साथ व्योमेश कई सारे रिश्तों के बारे में भी बताते हैं तथा पुस्तक के शीर्षक को व्यापक बनाते जाते हैं.

‘मुझे यक़ीन था कि एक दिन माँ नहीं रहेंगी.’ यह पंक्ति धक से धड़कन रोक सी देती है. इस किताब में ऐसा बहुत दफ़ा होता है. लेकिन बहुत दफ़ा आनंद आता जाता है. अपने परिवार और परिजनों के साथ-साथ व्योमेश कई सारे रिश्तों के बारे में भी बताते हैं तथा पुस्तक के शीर्षक को व्यापक बनाते जाते हैं.
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पहला उपन्यास ‘लौ’ Rukh से प्रकाशित पहली कथा-कृति है, इसलिए हमारे लिए विशिष्ट भी। पुस्तक यहाँ से प्राप्त की जा सकती है : tinyurl.com/Laubaabusha

पहला उपन्यास 

‘लौ’ Rukh से प्रकाशित पहली कथा-कृति है, इसलिए हमारे लिए विशिष्ट भी। 

पुस्तक यहाँ से प्राप्त की जा सकती है : 

tinyurl.com/Laubaabusha
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'अधूरी चीज़ों का देवता' को कथेतर गद्य के लिए प्रतिष्ठित 'वागीश्वरी पुरस्कार' दिया गया है। इसके लिए निर्णायक मंडल, मित्रों और पाठकों का आभारी हूँ। इस किताब का नया संस्करण जल्द ही आएगा।

'अधूरी चीज़ों का देवता' को कथेतर गद्य के लिए प्रतिष्ठित 'वागीश्वरी पुरस्कार' दिया गया है। इसके लिए निर्णायक मंडल, मित्रों और पाठकों का आभारी हूँ। इस किताब का नया संस्करण जल्द ही आएगा।
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दुःख की दुनिया भीतर है / Jey Sushil **** पुस्तक प्राप्त करने का लिंक : tinyurl.com/dukhkiduniyabh…

दुःख की दुनिया भीतर है / <a href="/sushiljadu/">Jey Sushil</a> 

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पुस्तक प्राप्त करने का लिंक :  tinyurl.com/dukhkiduniyabh…