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Ravi maurya ☸🍁

@ravimaurya41102

I am a descendant of the valorous grandfather of united india Emperor Ashoka the Great Maurya ☸️

Namo buddhay jai samrat...🙏⛩️

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calendar_today23-02-2024 13:18:56

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Borobudur Vihar or Barbudur is a Mahayana Buddhist monastery built between 750-850 AD in Magelang city of Central Java province of Indonesia. It is still the largest Buddhist monastery in the world. 🇮🇩☸️

Borobudur Vihar or Barbudur is a Mahayana Buddhist monastery built between 750-850 AD in Magelang city of Central Java province of Indonesia.

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अखंड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पास दुनिया की सबसे विशाल सेना थी यूनानी लेखक जस्टिन के अनुसार सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की सेना में 6 लाख पैदल सैनिक 30 हजार घुड़सवार 9 हजार हाथी और 8 हजार रथ थे !

अखंड भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पास दुनिया की सबसे विशाल सेना थी 

यूनानी लेखक जस्टिन के अनुसार सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की सेना में 6 लाख पैदल सैनिक 30 हजार घुड़सवार 9 हजार हाथी और 8 हजार रथ थे !
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कोंकण के मौर्यों की राजधानी पुरी में था यह पुरी मुंबई के पास एलिफैंटा के द्वीप पर बसा था ये मौर्य भी अपने पूर्वजों की भाँति कलाप्रेमी थे जोगेश्वरी बौद्ध गुफाओ का निर्माण छठी सदी मे इन्हीं कोंकण के मौर्य राजाओं ने कराया था ऐसी बेहतरीन गुफाएं केवल सम्राट असोक के वंशज बना सकते थे

कोंकण के मौर्यों की राजधानी पुरी में था यह पुरी मुंबई के पास एलिफैंटा के द्वीप पर बसा था ये मौर्य भी अपने पूर्वजों की भाँति कलाप्रेमी थे

जोगेश्वरी बौद्ध गुफाओ का निर्माण छठी सदी मे इन्हीं कोंकण के मौर्य राजाओं ने कराया था ऐसी बेहतरीन गुफाएं केवल सम्राट असोक के वंशज बना सकते थे
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चित्तौड़गढ़ किले का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्यवंश के राजा चित्रांगद मौर्य ने करवाया था यह किला राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया है।

चित्तौड़गढ़ किले का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्यवंश के राजा चित्रांगद मौर्य ने करवाया था यह किला राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया है।
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ये बौद्ध स्तूप भारत के बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के लौरिया नंदनगढ़ में स्थित है यह स्थल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारक है जो मौर्य काल का है लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का है इसका संबंध सम्राट असोक महान द्वारा बौद्ध धर्म के प्रसार के प्रयासों से है

ये बौद्ध स्तूप भारत के बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के लौरिया नंदनगढ़ में स्थित है यह स्थल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारक है

जो मौर्य काल का है लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का है इसका संबंध सम्राट असोक महान द्वारा बौद्ध धर्म के प्रसार के प्रयासों से है
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इतिहास में राजा कनिष्क को देवपुत्रकनिष्क कहा जाता है देवपुत्र का देव वैसे ही बुद्धका सूचक है जैसे देवानंपियअसोक का देवबुद्ध का सूचक है दोनो बौद्धराजा थे इस देवका अर्थ कोई दूसरा देवीदेवता नही है बल्कि बुद्ध ही है प्राचीनभारत का मूल इतिहाससमझे बगैरभारत का इतिहास नही लिखाजा सकता है

इतिहास में राजा कनिष्क को देवपुत्रकनिष्क कहा जाता है देवपुत्र का देव वैसे ही बुद्धका सूचक है जैसे देवानंपियअसोक का देवबुद्ध का सूचक है

दोनो बौद्धराजा थे इस देवका अर्थ कोई दूसरा देवीदेवता नही है बल्कि बुद्ध ही है प्राचीनभारत का मूल इतिहाससमझे बगैरभारत का इतिहास नही लिखाजा सकता है
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जब मध्यकाल का हर राजा क्षत्रिय नही है तो प्राचीनकाल के राजाओं को जबर्दस्ती क्षत्रिय क्यों बनाया जाता है. मौर्य काल में वर्ण अव्यवस्था का कोई प्रमाण नही है. महान सम्राट असोक को क्षत्रिय बताने की कोशिश होती है. सम्राट असोक ने हजारों शिलालेख लिखवाया, 84,000 स्तूपों का निर्माण

जब मध्यकाल का हर राजा क्षत्रिय नही है तो प्राचीनकाल के राजाओं को जबर्दस्ती क्षत्रिय क्यों बनाया जाता है.

मौर्य काल में वर्ण अव्यवस्था का कोई प्रमाण नही है.

महान सम्राट असोक को क्षत्रिय बताने की कोशिश होती है. 

सम्राट असोक ने हजारों शिलालेख लिखवाया, 84,000 स्तूपों का निर्माण
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सम्राट असोक महान की जयंती पर विशाल शोभायात्रा महारैली 22 मार्च 2026 मौर्य समाज सूरत के द्वारा हर साल असोका जन्माष्टमी इसी तरह शोभायात्रा महारैली निकाली जाती है जय सम्राट.......जय मौर्यवंश ☸️🦁

सम्राट असोक महान की जयंती पर विशाल शोभायात्रा महारैली  22 मार्च 2026 मौर्य समाज सूरत के द्वारा हर साल असोका जन्माष्टमी इसी तरह शोभायात्रा महारैली निकाली जाती है 

जय सम्राट.......जय मौर्यवंश ☸️🦁
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जिस सिकंदर महान ने हमारे पंजाब में खून की होली खेली थी उसी सिकंदर के ध्वंस साम्राज्य में यूनानी राजाओं को सम्राट असोक महान ने बस दो ही पीढ़ी बाद दवाइयाँ बटवाई थी बुलंद भारत की बुलंद संस्कृति..!

जिस सिकंदर महान ने हमारे पंजाब में खून की होली खेली थी उसी सिकंदर के ध्वंस साम्राज्य में यूनानी राजाओं को

सम्राट असोक महान ने बस दो ही पीढ़ी बाद दवाइयाँ 
बटवाई थी बुलंद भारत की बुलंद संस्कृति..!
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ये मूर्तिया नई दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के परिसर मे स्थित है ये मूर्तिया मौर्य राजवंश के तीन महान सम्राटो की है चंद्रगुप्त मौर्य बिंदुसार मौर्य सम्राट असोक मौर्य मूर्ति के पीछे एक ऊंचा स्तंभ है जिसे अशोक स्तंभ कहा जाता है जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है

ये मूर्तिया नई दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के परिसर मे स्थित है ये मूर्तिया मौर्य राजवंश के तीन महान सम्राटो की है

चंद्रगुप्त मौर्य बिंदुसार मौर्य सम्राट असोक मौर्य मूर्ति के पीछे एक ऊंचा स्तंभ है जिसे अशोक स्तंभ कहा जाता है जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है