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Pawan Kewat

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calendar_today21-08-2022 11:34:10

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#सन1513_में_काशीभंडारा ৫০৯ বছৰ পূৰ্বে কবীৰ চাহাবে ১৮ লাখ সাধু-সন্তক মোহন ভোজ দিছিল। বৰ্তমান সন্ত ৰামপাল মহাৰাজৰ নেতৃত্বত ৯ খন আশ্ৰমত দিনাংক ৭,৮,৯, নৱেম্বৰ ২০২২ত দিব্য ধৰ্ম যজ্ঞ ( বিশাল ধৰ্ম ভোজ)ৰ আয়োজন কৰা হৈছে।

#सन1513_में_काशीभंडारा
৫০৯ বছৰ পূৰ্বে কবীৰ চাহাবে ১৮ লাখ সাধু-সন্তক মোহন ভোজ দিছিল। বৰ্তমান সন্ত ৰামপাল মহাৰাজৰ নেতৃত্বত ৯ খন আশ্ৰমত দিনাংক ৭,৮,৯, নৱেম্বৰ ২০২২ত দিব্য ধৰ্ম যজ্ঞ ( বিশাল ধৰ্ম ভোজ)ৰ আয়োজন কৰা হৈছে।
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કબીર સાહેબે જ સૌથી પહેલાં બતાવ્યું કે બ્રહ્મા, વિષ્ણુ તથા શિવજી ત્રણ લોકના ભગવાન છે, અવિનાશી પરમાત્મા નથી. તેમનું પણ જન્મ મૃત્યુ થાય છે, જેનું પ્રમાણ શ્રીમદ્દેવી પુરાણ, ત્રીજો સ્કંધ, પાના નં. 123 પર છે. Nɪsʜʌɴт Rʌɴʌ – Shahbad Markanda Railwa

કબીર સાહેબે જ સૌથી પહેલાં બતાવ્યું કે બ્રહ્મા, વિષ્ણુ તથા શિવજી ત્રણ લોકના ભગવાન છે, અવિનાશી પરમાત્મા નથી. તેમનું પણ જન્મ મૃત્યુ થાય છે, જેનું પ્રમાણ શ્રીમદ્દેવી પુરાણ, ત્રીજો સ્કંધ, પાના નં. 123 પર છે.
<a href="/Nishant00012/">Nɪsʜʌɴт Rʌɴʌ</a>  – Shahbad Markanda Railwa
Sanjay kumar (@sanjayk81000450) 's Twitter Profile Photo

કબીર સાહેબે જ સૌથી પહેલાં બતાવ્યું કે બ્રહ્મા, વિષ્ણુ તથા શિવજી ત્રણ લોકના ભગવાન છે, અવિનાશી પરમાત્મા નથી. તેમનું પણ જન્મ મૃત્યુ થાય છે, જેનું પ્રમાણ શ્રીમદ્દેવી પુરાણ, ત્રીજો સ્કંધ, પાના નં. 123 પર છે. Nɪsʜʌɴт Rʌɴʌ

કબીર સાહેબે જ સૌથી પહેલાં બતાવ્યું કે બ્રહ્મા, વિષ્ણુ તથા શિવજી ત્રણ લોકના ભગવાન છે, અવિનાશી પરમાત્મા નથી. તેમનું પણ જન્મ મૃત્યુ થાય છે, જેનું પ્રમાણ શ્રીમદ્દેવી પુરાણ, ત્રીજો સ્કંધ, પાના નં. 123 પર છે.
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Pandurang Thakare (@pandurangthak17) 's Twitter Profile Photo

#दिव्य_धर्म_यज्ञ_दिवस 7_8_9 November 🥥आज से 509 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने तीन दिन "दिव्य धर्म यज्ञ" का आयोजन किया था। जिसमें 18 लाख से अधिक साधु, संतों व लोगों ने मोहन भंडारा किया था। वही इतिहास बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में पुनः रचा जा रहा है।

#दिव्य_धर्म_यज्ञ_दिवस
7_8_9 November
🥥आज से 509 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने तीन दिन "दिव्य धर्म यज्ञ" का आयोजन किया था। जिसमें 18 लाख से अधिक साधु, संतों व लोगों ने मोहन भंडारा किया था। वही इतिहास बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में पुनः रचा जा रहा है।
Anjana Dasi (@anjanadasi17) 's Twitter Profile Photo

#दिव्य_धर्म_यज्ञ_दिवस Kartik 21_22_23 🎪 आज भन्दा ५०९ वर्ष अगाडि जुन भन्डारा कबीर परमेश्वरद्वारा आयोजना गरिएको थियो त्यसै गरी आज सन्त रामपालजी महाराजद्वारा भारत भूमिमा विशाल भन्डारा हुनलागेको छ जसमा देश विदेशबाट लाखौँ मानिसहरू सामेल हुनेछन्।

#दिव्य_धर्म_यज्ञ_दिवस
Kartik 21_22_23
🎪 आज भन्दा ५०९ वर्ष अगाडि जुन भन्डारा कबीर परमेश्वरद्वारा आयोजना गरिएको थियो त्यसै गरी आज सन्त रामपालजी महाराजद्वारा भारत भूमिमा विशाल भन्डारा हुनलागेको छ जसमा देश विदेशबाट लाखौँ मानिसहरू सामेल हुनेछन्।
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#दिव्यधर्मयज्ञदिवस_पर_निमंत्रण बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में विशाल भंडारा होने जा रहा है। संपूर्ण विश्व को इस धर्म यज्ञ में सम्मिलित होने का न्यौता दिया गया है। इच्छुक श्रद्धालु अपने नजदीकी सतलोक आश्रम में उपस्थित होकर इस दिव्य धर्म यज्ञ का लाभ उठा सकते हैं।

#दिव्यधर्मयज्ञदिवस_पर_निमंत्रण
बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में विशाल भंडारा होने जा रहा है।
संपूर्ण विश्व को इस धर्म यज्ञ में सम्मिलित होने का न्यौता दिया गया है। इच्छुक श्रद्धालु अपने नजदीकी सतलोक आश्रम में उपस्थित होकर इस दिव्य धर्म यज्ञ का लाभ उठा सकते हैं।
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#हिन्दू_धर्म_महानप्रश्न : यदि गीता ज्ञान देने वाला (श्री विष्णु उर्फ श्री कृष्ण जी) जन्मता-मरता है यानि नाशवान है तो अविनाशी यानि जन्म-मरण से रहित कौन प्रभु है जो गीता ज्ञान दाता से अन्य है? उत्तर:- गीता अध्याय 2 श्लोक 17:- (गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य परमेश्वर की

#हिन्दू_धर्म_महानप्रश्न : यदि गीता ज्ञान देने वाला (श्री विष्णु उर्फ श्री कृष्ण जी) जन्मता-मरता है यानि नाशवान है तो अविनाशी यानि जन्म-मरण से रहित कौन प्रभु है जो गीता ज्ञान दाता से अन्य है?
उत्तर:- गीता अध्याय 2 श्लोक 17:- (गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य परमेश्वर की
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#हिन्दू_धर्म_महानॐ तत् सत मंत्र का रहस्य क्या है ? नि:शुल्क पुस्तक मंगाएं "गीता तेरा ज्ञान अमृत" और इस अनमोल मंत्र के रहस्य को जानें।

#हिन्दू_धर्म_महानॐ तत् सत मंत्र का रहस्य क्या है ?
 नि:शुल्क पुस्तक मंगाएं "गीता तेरा ज्ञान अमृत" और इस अनमोल मंत्र के रहस्य को जानें।
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#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 14 श्लोक 3-5 के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के माता पिता कौन हैं? सम्पूर्ण जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत।

#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 14 श्लोक 3-5 के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी के माता पिता कौन हैं?
सम्पूर्ण जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत।
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#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है।

#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है।
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#हिन्दू_धर्म_महानकाल कोई और शक्ति है। वह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत प्रवेश करके पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी के ज्ञान रूप में चारों पवित्र वेदों का सार बोल गया।

#हिन्दू_धर्म_महानकाल कोई और शक्ति है। वह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत प्रवेश करके पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी के ज्ञान रूप में चारों पवित्र वेदों का सार बोल गया।
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#हिन्दू_धर्म_महानअध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘

#हिन्दू_धर्म_महानअध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘
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#हिन्दू_धर्म_महान अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘

#हिन्दू_धर्म_महान
अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘
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#हिन्दू_धर्म_महान अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘

#हिन्दू_धर्म_महान
अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘
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#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है।

#हिन्दू_धर्म_महानगीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में कहा है कि उस तत्वदर्शी संत के मिल जाने के पश्चात् उस परमेश्वर के परम पद की खोज करनी चाहिए अर्थात् उस तत्वदर्शी संत के बताए अनुसार साधना करनी चाहिए जिससे पूर्ण मोक्ष(अनादि मोक्ष) प्राप्त होता है।