mehrab
@mehrabbgp
Teacher n Learner.
ID: 1954840041311870976
11-08-2025 09:39:32
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2 Takipçi
34 Takip Edilen
बज़्म-ए सुख़न بزمِ سخن हमसे पहले भी कई हमसफ़र दावे तो करते गुज़रे, पर हमदर्दी में दो कदम भी बढ़ाते नज़र नहीं आए। राह सँवार जाना तो नेकियों का चलन है जनाब, ये लोग तो अपना बोझ तक उठाते नहीं— दूसरों का क्या हटाते!
mo-shaad🕊️ धूप में खड़े उस दरवाज़े पर, वक्त जैसे ठहर सा गया, एक ने उम्मीद ओढ़ रखी, एक ने ख़ामोशी कह दिया। नज़रें दोनों की मिलती हैं, पर अल्फ़ाज़ कहीं खो जाते हैं, कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो दरवाज़ों पर ही रह जाते हैं।