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आचार्य जितेन्द्र

@jitende38919251

अध्यक्ष, राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा।

ID: 1270708542605889538

calendar_today10-06-2020 13:25:23

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वेद सनातन हैं। विश्व के सब मनुष्य के लिए हैं। सब विद्याएं इसमें हैं जो मनुष्य जीवन को सफल करती हैं। आधुनिक विज्ञान मानता है कि संसार का प्राचीनतम ग्रन्थ वेद है। सौभाग्य से हमारी संस्कृति वेदाधारित है, तभी आर्य सर्वश्रेष्ठ थे। आर्य महासंघ पुनः इस गौरव को प्राप्त कराएगा #जय_आर्य।

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यज्ञ सर्वोपकारक कर्म है जिससे कभी कोई हानि नहीं होती।देवपूजा, संगतिकरण व दान से यज्ञ करने वाले जन, सदा प्राणियों को सुख ही देते हैं और स्वयं भी सुखी रहते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि हम संगठित भी रहें, तभी सर्वश्रेष्ठ कहलाएंगे। आओआर्य महासंघ से जुड़ संसार का उपकार करें। #जय_आर्य।

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सबसे पहली गुरु मां होती है। लेकिन कौन सी?जो विदुषी- धार्मिकी होनी चाहिए। अन्यथा, बालकों में दुर्गुण, दुर्व्यसन निश्चित बढ़ेंगे। वर्तमान में ये सब बढ़ते दिख रहे हैं। इसका अर्थ है कि मातृवर्ग धर्म शिक्षा से अनभिज्ञ है। नारी शिक्षा आर्य समाज व आर्य महासंघ की प्राथमिकता है #जय_आर्य।

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पुनर्जन्म सत्य है। तर्क-प्रमाण से सिद्ध है। विपरित का विचार बड़ा भयावह है। फिर पाप-पुण्य का कोई महत्व ही नहीं।तब चोरी डकैती हत्या में यदि सुख दिखे, तो करें। ऐसे में eat, drink.... अन्तिम लक्ष्य रह जाएगा। फिर संसार श्मशान बनेगा। पुनर्जन्म सिद्धान्त इसे सुखकारी बनाता है #जय_आर्य ।

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मानव की उन्नति का मूल सत्य है। आर्य समाज का नियम-4 इसी सत्य के ग्रहण व असत्य के त्याग पर बल देता है क्योंकि उत्तम गुण कर्म स्वभाव और चरित्र का यही एक आधार है। विवेक प्राप्ति से सत्य असत्य का भेद समझ में आता है। महासंघ विद्या द्वारा विवेक का सृजन कर मानव निर्माण करता है #जय_आर्य।

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व्यायाम को व्यायाम बता, व्यापार करे तो इसमें कोई बुराई नहीं। शारीरिक स्वस्थ के प्रति सजग कर धन कमाना पाप नहीं। ऋषि पतंजलि की योग विद्या को भ्रष्ट कर, जनता को बुद्धु बना अपना उल्लू सीधा करना, वो भी एक लाल कपड़े वाले द्वारा, अपराध से कम नहीं।आओ महासंघ से सीखें सच्चा योग। #जय_आर्य।

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धर्म एक सर्वतन्त्र सिद्धान्त है जो सर्वकालिक, सार्वजनिक, सार्वभौमिक, सब परिस्थितियों में लागू होता है। इसका उल्लंघन दुखदाई है ।धर्म को न समझने से हमने बहुत कष्ट सहे हैं। देश ही पराधीन कर बैठे हैं। महासंघ के सत्रों से विद्या प्राप्त कर धर्म- राष्ट्र की रक्षा कर सकते हैं #जय_आर्य।

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आर्यों ने आत्मिक उन्नति हेतु जीवन को चार भागों में बांटा। ऋषियों ने तीसरे भाग को नाम दिया वानप्रस्थाश्रम। इसकी योग्यता व पद्धति भी बनाई। लेकिन विगत काल में ये सब उल्टा हो गया। महासंघ ने इस प्राचीन व्यवस्था को योग्यता और नियमानुसार पुनर्जीवित किया है।आपके प्रयास को नमन। #जय_आर्य।

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'वेद अखिलो धर्म मूलम्' कहने वाले ही जब चारों वेदों को गुमाकर पुराणों को पञ्चम वेद मान बैठे। वो भी नकली 18 पुराणों को। सनातन धर्म की जड़ तो आर्य वंशजों ने स्वयं काटी है। मूल की इस भूल ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा।आओ! धर्म के मूल से पुनः जुड़ें। आरंभ वेद पारायण पाठ से करें। #जय_आर्य।

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संसार की सबसे महत्वपूर्ण इकाई श्रेष्ठ मनुष्य है। लेकिन उसका निर्माण होना चाहिए, अन्यथा यह मानव शरीर का ढांचा मात्र है। वेद विद्या वह पाठ्यक्रम है जो मननशीलता पैदा करती है। ऋषि जी ने आर्य समाज की स्थापना इस विद्या के विस्तार हेतु की थी।यही कार्य महासंघ कर रहा है। नमन है। #जय_आर्य।

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मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसकी विद्या है। और यह धन खर्च करने से बढ़ता है। इसका अभाव अत्यंत दुखदाई है।विगत काल में हमने इसके परिणाम भोगे हैं। मानवता को अविद्या जनित दुखों से बचाने के लिए सर्वत्र आर्य विद्वान चाहिएं। यह 40 प्रचारक संसार का उपकार करने में निश्चित सहायक होंगे #जय_आर्य।

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गुरुकुलों का प्रयोजन वेद विद्या के विस्तार से था, परन्तु सार्वदेशिक/ प्रान्तीय प्रतिनिधि सभाओं के होते हुए भी, सब CBSE या Education Board से संबद्ध हुए। अर्थात आर्य नेतृत्व ने वेद विद्या को इतना महत्व नहीं दिया।धन्यवाद आर्य महासंघ जो आर्य समाज में नियम-3 ने पकड़ बनाइ। #जय_आर्य।

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आर्य समाज में अभी तक वानप्रस्थ और संन्यास,इन आश्रमों की स्थिति बड़ी दयनीय है। ऋषियों ने इन आश्रमों के लिए जो योग्यता व कार्यशैली निर्धारित की, अभी तक उसका सरासर उल्लंघन हुआ है। वानप्रस्थी स्रुवा, पुस्तकें आदि बेचते देखे गए हैं।आश्रम व्यवस्था सुधार में महासंघ को साधुवाद। #जय_आर्य।

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दुर्भाग्य, हिन्दू भाइयों को ईश्वर के स्वरूप का प्रतिपादन नहीं किया गया।ये तो उसे मनुष्य के भांति देहधारी व थोड़ा चमत्कारी मानते हैं। जगन्नाथ बीमार भी हो चुके हैं। हिन्दुओं ने न सृष्टि रचना का विश्लेषण किया न वेद विद्या ग्रहण की।आओ हम आर्य महासंघ सहित इनको शिक्षित करें #जय_आर्य।

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हे आर्य वंशजों! गाली को मुकुट मत बनाओ। अपने को पहचानो। तुम उन वीरों की सन्तान हो, जो मौत के मुंह में भी नहीं घबराए।कारण- वो आत्मा, परमात्मा के स्वरूप को जानते थे, वेद विद्या पढ़ते थे।हम भी वैसे बन सकते हैं । इसके लिए वेद विद्या ग्रहण करो। महासंघ सहयोग के लिए तत्पर है। #जय_आर्य।

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घटाटोप अंधेरे में किसी भी को पता नहीं चलता कहां है, किधर जाए, पास में कोई खड्डा है या नहीं?समझ में नहीं आता- क्या करूं कहां जाऊं? परिणाम भय, घबराहट, अशांति।जीवन में अविद्यारूपी अंधकार से यही होता है।तब शुरू होता है अंधविश्वास, दुखों का सिलसिला। एक ही समाधान- आर्य बनें #जय_आर्य।

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जब देशवासी एकता के नियमों को महत्व न दें, न इन्हें पढ़ें न समझें,तब देश का नाम तो क्या पहचान भी मिट सकती है। सौभाग्य से पहचान अभी पूरी तरह मिटी नहीं है। महासंघ देशवासियों की अनेकता को समाप्त कर एकता की जड़ें लगा रहा है। इसमें सबका सहयोग राष्ट्र का गौरव पुनर्जीवित करेगा #जय_आर्य।

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मानसिक गुलामी की जड़ वो बुद्धि है जो सत्य असत्य के विश्लेषण की क्षमता खो देती है। फिर कुछ भी विदेशी हो आंख मूंदकर स्वीकार करता है। योगविद्या भी योगा बन यहां प्रसिद्ध हुई है। आर्य कभी गुलाम नहीं होता।हम विश्व गुरुओं के वंशज हैं।लघु गुरुकुल आएं,आर्य बनें।कारा को तोड़ें। #जय_आर्य।

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धर्म शक्कर की तरह ऊर्जा और मिठास देता है परन्तु अविद्या और पशुवत स्वार्थ से हमने इतने दुर्बल हो गए हैं किअब धर्मरुपी स्वादिष्ट व्यंजन को भी पचा नहीं पा रहे।" उपस्थितं परित्याज्याs ..." वाली मूर्खता हमारे समाज में हो रही है।आओ! महासंघ से धर्म को जान सब सुख की ओर बढ़ें। #जय_आर्य।

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जबअपनी भाषा से विमुख हुए तो ऋषियों के साहित्य से भी विमुख हो गए। फिर विदेशी शिक्षा पद्धति की नकल करते हुए विश्वगुरु बनना चाहते हैं? वहां परिवार, संस्कार और समाज शास्त्र पर कोई प्रमाणिक समाधान है ही नहीं। वेद विद्या ही इन सब समस्याओं का हल है। इसके लिए है दो दिवसीय सत्र # जय आर्य।