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Guman Singh Sahu

@gumansinghsahu3

कबीर साहेब जी पूर्ण परमात्मा हैं।

ID: 950870781025636352

calendar_today09-01-2018 23:23:55

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Prem Pawar Dws 🇮🇳 (@premraj00) 's Twitter Profile Photo

गीता ज्ञान दाता काल भगवान ने अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि अर्जुन सर्व भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा। उसकी कृपा से ही तू परम शांति को तथा सतलोक (शाश्वतम् स्थानम्) को प्राप्त होगा। #यथार्थ_गीता_ज्ञान Sant Rampal Ji Maharaj

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#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 3 श्लोक 14 से 15 में स्पष्ट किया है कि मुझ ब्रह्म काल की उत्पत्ति परम अक्षर पुरूष से हुई है। वही परम अक्षर ब्रह्म ही यज्ञों में पूज्य है। (ये ब्रह्म काल ही गीता ज्ञान दाता है)। Sant Rampal Ji Maharaj

Raj Kumar Official (@1rajkumar123) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान आध्यात्मिक ज्ञान की कमी के कारण लोग आज ही गुमराह हैं! श्री कृष्ण को ही गीता ज्ञान दाता मानते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि 21 ब्रह्मांडों के स्वामी भगवान ब्रह्म काल ने ही महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इसी का प्रमाण गीता 11:32 में भी है।

#यथार्थ_गीता_ज्ञान

आध्यात्मिक ज्ञान की कमी के कारण लोग आज ही गुमराह हैं!

श्री कृष्ण को ही गीता ज्ञान दाता मानते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि 21 ब्रह्मांडों के स्वामी भगवान ब्रह्म काल ने ही महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इसी का प्रमाण गीता 11:32 में भी है।
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#यथार्थ_गीता_ज्ञान अपने विषय में गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) प्रभु अध्याय 4 मंत्र 5 तथा अध्याय 2 श्लोक 12 में कहा है कि मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ। वास्तव में वह अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब है जो सबके पिता हैं। Sant Rampal Ji Maharaj

Official Ravindra Singh 🇮🇳 (@simple_livingr) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 66 ↪️ गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर। Sant Rampal Ji Maharaj 🙏

𝘿𝙞𝙠𝙨𝙝𝙖 𝘾𝙝𝙖𝙤𝙧𝙖𝙨𝙞𝙮𝙖 (@real_diksha) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान Gita 15:1 — The world-like tree is explained: Root = Supreme God, Trunk = Akshar Purush, Branches = Brahm, Twigs = three gunas (Brahma, Vishnu, Shiva). Saint Rampal Ji Maharaj has revealed this. Sant Rampal Ji Maharaj

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
Gita 15:1 — The world-like tree is explained:
Root = Supreme God,
Trunk = Akshar Purush,
Branches = Brahm,
Twigs = three gunas (Brahma, Vishnu, Shiva).
Saint Rampal Ji Maharaj has revealed this.
Sant Rampal Ji Maharaj
Vandna (@vandnadassi) 's Twitter Profile Photo

गीताजी अध्याय 18 श्लोक 62 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा गीता ज्ञानदाता से भिन्न है। हे भारत! तू संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सदा रहने वाले अविनाशी स्थान को अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा।” #यथार्थ_गीता_ज्ञान

गीताजी अध्याय 18 श्लोक 62 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा गीता ज्ञानदाता से भिन्न है। 
हे भारत! तू संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की ही शरण में जा। उस परमात्मा की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सदा रहने वाले अविनाशी स्थान को अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा।” 
#यथार्थ_गीता_ज्ञान
Dhanidas (@dhanidas5) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान Sant Rampal Ji Maharaj 🎉गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई गई है तथा कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की खोज करनी चाहिए।

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
Sant Rampal Ji Maharaj
🎉गीता अध्याय नं. 15 श्लोक नं. 1 व 4 में तत्वदर्शी सन्त की पहचान बताई गई है तथा कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान जानकर उसके पश्चात् उस परमपद परमेश्वर की खोज करनी चाहिए।
Harish Rawat (@harishr81883801) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा":- जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।" #यथार्थ_गीता_ज्ञान

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा":-
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि 'अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।"
#यथार्थ_गीता_ज्ञान
Birbal Sinhmar (@singhmarbirbal) 's Twitter Profile Photo

गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 व 9 तथा अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने आप को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाला बताया है। #यथार्थ_गीता_ज्ञान Sant Rampal Ji Maharaj

𝘿𝙞𝙠𝙨𝙝𝙖 𝘾𝙝𝙖𝙤𝙧𝙖𝙨𝙞𝙮𝙖 (@real_diksha) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में बताया है कि वह तत्वदर्शी संत होगा जो संसार रूपी वृृक्ष का पूर्ण विवरण बता देगा कि मूल तो पूर्ण परमात्मा है, तना अक्षर पुरुष अर्थात् परब्रह्म है, डार ब्रह्म अर्थात् क्षर पुरुष है तथा शाखा तीनों गुण

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में बताया है कि वह तत्वदर्शी संत होगा जो संसार रूपी वृृक्ष का पूर्ण विवरण बता देगा कि मूल तो पूर्ण परमात्मा है, तना अक्षर पुरुष अर्थात् परब्रह्म है, डार ब्रह्म अर्थात् क्षर पुरुष है तथा शाखा तीनों गुण
Mohan (@mohan13520563) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन् ! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान पवित्र वेदों के मंत्रों द्वारा उच्चारण कर रहे हैं। जानने के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा Sant Rampal Ji Maharaj

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह
रहा है कि भगवन् ! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान पवित्र वेदों के मंत्रों द्वारा उच्चारण कर रहे हैं।
जानने के लिए अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा Sant Rampal Ji Maharaj
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#यथार्थ_गीता_ज्ञान पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं। Sant Rampal Ji Maharaj

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे।
फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं।
Sant Rampal Ji Maharaj
Kush Yadav (@kushyadav__) 's Twitter Profile Photo

#यथार्थ_गीता_ज्ञान पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं। Sant Rampal Ji Maharaj

#यथार्थ_गीता_ज्ञान
पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे।
फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं।
Sant Rampal Ji Maharaj