Dharmpal kodape (𑴠𑴴𑴦𑴍𑴱𑴧 𑴓𑴽)🇮🇳 Indigenous (@dpkodape2250) 's Twitter Profile
Dharmpal kodape (𑴠𑴴𑴦𑴍𑴱𑴧 𑴓𑴽)🇮🇳 Indigenous

@dpkodape2250

मेरे पुरखों ने मुझे गर्व से जीने का राह दिखा चुके हैं, समझौता नहीं होगी.. क्योंकि इससे ही मेरी पीढ़ी बचेगी🙏

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calendar_today17-05-2020 05:50:53

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Dharmpal kodape (𑴠𑴴𑴦𑴍𑴱𑴧 𑴓𑴽)🇮🇳 Indigenous (@dpkodape2250) 's Twitter Profile Photo

"In our society, at the time of marriage, the responsibilities of each person are decided in front of the ancestors. But today people themselves choose the date and day and get the date sheet printed, which seems like an attack on the tradition of the ancestors."

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"हमारे यहाँ विवाह के समय पेन-पुरखाओं के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन आज लोग स्वयं दिन-तिथि चुनकर तिथिपत्रक छपवाते हैं, जो पेन-पुरखाओं की परंपरा पर प्रहार सा लगता है। इतना ही नहीं, विवाह के चूल में आग जलाने के लिए 'आग' को भी गाजे-बाजे के साथ परघाकर लाया..

"हमारे यहाँ विवाह के समय पेन-पुरखाओं के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन आज लोग स्वयं दिन-तिथि चुनकर तिथिपत्रक छपवाते हैं, जो पेन-पुरखाओं की परंपरा पर प्रहार सा लगता है। इतना ही नहीं, विवाह के चूल में आग जलाने के लिए 'आग' को भी गाजे-बाजे के साथ परघाकर लाया..
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"हमारे पूर्वज सुरक्षा के प्रति अत्यंत सजग थे। बाहरी शक्तियों और महामारियों से बचाव के लिए साल में एक बार 'खिला खूंटी' (ग्राम बंधन) की नेंग करते थे, जिसमें सरहदी देवताओं (राव पाट) को स्मरण कर सतर्क किया जाता था। यह परंपरा आज भी जीवित है।"

"हमारे पूर्वज सुरक्षा के प्रति अत्यंत सजग थे। बाहरी शक्तियों और महामारियों से बचाव के लिए साल में एक बार 'खिला खूंटी' (ग्राम बंधन) की नेंग करते थे, जिसमें सरहदी देवताओं (राव पाट) को स्मरण कर सतर्क किया जाता था। यह परंपरा आज भी जीवित है।"
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"Our ancestors were extremely security conscious. To protect themselves from external forces and epidemics, they used to perform 'Khila Khunti' (village bond) once a year, in which the border deities (Rao Pat) were remembered and alerted. This tradition is still alive today."

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कुछ ज्ञान की बातें जीबन में काम आएंगे आपकी । चार से विवाद मत करो 1. मूर्ख 2. पागल से 3. गुरु से और 4. माला पिता से चार से शर्म मत करना 1. पुराने कपड़ो में 2. गरीब साथियो में 3. बूढ़े माता पिता में 4. सादे रहन सहन

कुछ ज्ञान की बातें जीबन में काम आएंगे आपकी ।

चार से विवाद मत करो

1. मूर्ख

2. पागल से

3. गुरु से और

4. माला पिता से

चार से शर्म मत करना

1. पुराने कपड़ो में

2. गरीब साथियो में

3. बूढ़े माता पिता में

4. सादे रहन सहन
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#गुप्तेना है इसे #भुनाटी और #गोफन आदि नामो से जाना जाता है 🙏सेबाजोहार 🙏 ⚡साथियों यह एक ऐसा उपकरण है जिसने मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इसलिए हम इसे पवित्र "गो" से "#गोफन कहा गया है ! 🌻 इसका इतिहास हमें पाषाण काल से ही मिलने लगता है कई

#गुप्तेना है इसे #भुनाटी और #गोफन आदि नामो से जाना जाता है

             🙏सेबाजोहार 🙏
⚡साथियों यह एक ऐसा उपकरण है 
जिसने मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है 
इसलिए हम इसे  पवित्र "गो" से "#गोफन  कहा गया है !

🌻 इसका इतिहास हमें पाषाण काल से ही मिलने लगता है कई
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"बमलाई दाई की जय, सेवा जोहार, कोया भूम जोहार, जय जोहार" आज हम अपनी समृद्ध संस्कृति और इतिहास को भूलते जा रहे हैं। आइए, पुनः अपनी जड़ों से जुड़ें! मेरी पुस्तक "कोया बूमः एक समृद्ध ग्राम व्यवस्था" आपको ले जाएगी एक ऐसी यात्रा पर, जहाँ आप जानेंगे कि कैसे एक ग्राम की दाई, कुलदाई और

"बमलाई दाई की जय, सेवा जोहार, कोया भूम जोहार, जय जोहार"
आज हम अपनी समृद्ध संस्कृति और इतिहास को भूलते जा रहे हैं। 
आइए, पुनः अपनी जड़ों से जुड़ें!

मेरी पुस्तक "कोया बूमः एक समृद्ध ग्राम व्यवस्था" आपको ले जाएगी एक ऐसी यात्रा पर, जहाँ आप जानेंगे कि कैसे एक ग्राम की दाई, कुलदाई और
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"मासिक धर्म और इसके दौरान हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित व्यवस्था का उद्देश्य और महत्व हमेशा से हमारी मातृशक्ति के लिए जिज्ञासा का विषय रहा है। कुछ प्रबुद्ध महिलाएँ इस व्यवस्था की उपेक्षा तक करती हैं। मेरी पुस्तक "कोया बूम: एक समृद्ध ग्राम व्यवस्था" इस विषय पर जवाब प्रस्तुत करती

"मासिक धर्म और इसके दौरान हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित व्यवस्था का उद्देश्य और महत्व हमेशा से हमारी मातृशक्ति के लिए जिज्ञासा का विषय रहा है।
 कुछ प्रबुद्ध महिलाएँ इस व्यवस्था की उपेक्षा तक करती हैं। मेरी पुस्तक "कोया बूम: एक समृद्ध ग्राम व्यवस्था" इस विषय पर जवाब प्रस्तुत करती
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पुकराल जोहार "युवा पीढ़ी आपके तरकश में अनेक तीर है, जिसे सही दिशा में चलाएं, वरना आपकी वजूद जख्मी होगा।" "आज की युवा पीढ़ी को तर्क का सही उपयोग करना होगा, अन्यथा कोई भी आपके सदेह को बढ़ा-चढ़ाकर गलत अर्थ निकाल सकता है। कई स्थानों पर आपको ऐसे प्रतीक (स्तंभ) मिलेंगे, जिनके पीछे

पुकराल जोहार
"युवा पीढ़ी आपके तरकश में अनेक तीर है, जिसे सही दिशा में चलाएं, वरना आपकी वजूद जख्मी होगा।"

"आज की युवा पीढ़ी को तर्क का सही उपयोग करना होगा, अन्यथा कोई भी आपके सदेह को बढ़ा-चढ़ाकर गलत अर्थ निकाल सकता है। कई स्थानों पर आपको ऐसे प्रतीक (स्तंभ) मिलेंगे, जिनके पीछे
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कोइटूर गोंड़ आदिवासी की पारंपरिक पहनाव की साथ एक बेहतरीन छबि सुंदर सी बच्ची की । क्या आपको पसंद आया !!!

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हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं #अमलेशनागेश समधी जी की आने वाली फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहेगा गोण्डी कल्चर से बने हैं फ़िल्म इस फिल्म का नाम दण्डाकोटुम गोंडी में है। कोया फिल्म प्रोडक्शन व उनके टीम को ढेरों शुभकामनाएं व गाड़ा गाड़ा बधाई ।। #AMLESH_NAGESH

हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं  #अमलेशनागेश समधी जी की आने वाली  फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहेगा गोण्डी कल्चर से बने हैं फ़िल्म
इस फिल्म का नाम दण्डाकोटुम गोंडी में है।
 कोया फिल्म प्रोडक्शन व उनके टीम को ढेरों शुभकामनाएं व गाड़ा गाड़ा बधाई ।।
#AMLESH_NAGESH
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एक तरफ सोना मंहगा हो रहा है और दूसरी तरफ आदिवासियों के नाम पर चांदी का धुआंधार प्रचार चल रहा है। बाकी आप जो भी समझें। न सोना खाने के काम आयेगा न चांदी। वोधिराज Nk

एक तरफ सोना मंहगा हो रहा है और दूसरी तरफ आदिवासियों के नाम पर चांदी का धुआंधार प्रचार चल रहा है।
बाकी आप जो भी समझें।
न सोना खाने के काम आयेगा न चांदी।
वोधिराज
Nk
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🐃🐢🐍 #बैंसासुर/#भैंसासुर/#महिषासुर पेन हमारे हर गांव में है ▪▪▪ यह हमारे मूलनिवासी बहुल गावों की आत्मा है ...उनकी ऊर्जा हैं... उनकी समृद्ध जैवविविधता के वाहक हैं.. ▪▪▪ इसे कोई भी ताकत झुठला नही सकता • बस्तर का हर मूलनिवासी बैंसासूर को अपने आराध्य पेन के रूप मे

🐃🐢🐍 #बैंसासुर/#भैंसासुर/#महिषासुर  पेन हमारे  हर गांव  में है ▪▪▪ यह हमारे मूलनिवासी  बहुल गावों  की आत्मा है ...उनकी ऊर्जा हैं... उनकी समृद्ध जैवविविधता के वाहक हैं.. ▪▪▪ इसे कोई भी ताकत झुठला  नही सकता •
  बस्तर का हर मूलनिवासी बैंसासूर को अपने आराध्य पेन के रूप मे
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“आज मेरी परीक्षा के अंतिम पेपर के बाद, नए विचारों के साथ कल से पुनः आग़ाज़ करेंगे। 🙏”

“आज मेरी परीक्षा के अंतिम पेपर के बाद, नए विचारों के साथ कल से पुनः आग़ाज़ करेंगे। 🙏”