Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile
Dipan Prajapat

@dipanprajapat

मैं प्रजापत समाज से जुड़ा हुआ हूं।

ID: 1276539939170078720

calendar_today26-06-2020 15:37:08

6,6K Tweet

325 Followers

752 Following

Duleshwari Sahu (@missds07) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया। जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां। जीवित बाप के साथ तो लड़ाई रखते हैं और उनके मरने के उपरांत उनके श्राद्ध निकालते हैं। परमात्मा कहते हैं रे भोली सी दुनिया सतगुरु बिन कैसे सरिया।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया। 
जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां।
जीवित बाप के साथ तो लड़ाई रखते हैं और उनके मरने के उपरांत उनके श्राद्ध निकालते हैं। 
परमात्मा कहते हैं रे भोली सी दुनिया सतगुरु बिन कैसे सरिया।
Manaram Sahu (@manaram_byt) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि What does Shrimad Bhagavad Gita say about Shradh!? Sant Rampal Ji Maharaj

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
What does Shrimad Bhagavad Gita say about Shradh!? Sant Rampal Ji Maharaj
🅱️harat Das (@bharat__dass) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया। जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां। जीवित बाप के साथ तो लड़ाई रखते हैं और उनके मरने के उपरांत उनके श्राद्ध निकालते हैं। परमात्मा कहते हैं रे भोली सी दुनिया सतगुरु बिन कैसे सरिया।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया। 
जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां।
जीवित बाप के साथ तो लड़ाई रखते हैं और उनके मरने के उपरांत उनके श्राद्ध निकालते हैं। 
परमात्मा कहते हैं रे भोली सी दुनिया सतगुरु बिन कैसे सरिया।
Nisha verma (@nishuverma03) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि श्राद्ध करने वाले पुरोहित कहते हैं की श्राद्ध करने से वह जीव एक वर्ष तक तृप्त हो जाता है फिर एक वर्ष में श्रद्धा फिर कर रहे हैं विचार करें - जीवित व्यक्ति दिन में तीन बार भोजन करता था अब एक दिन भोजन करने से 1 वर्ष तक कैसे तृप्त हो सकते हैं? 👇

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
श्राद्ध करने वाले पुरोहित कहते हैं की श्राद्ध करने से वह जीव एक वर्ष तक तृप्त हो जाता है फिर एक वर्ष में श्रद्धा फिर कर रहे हैं
विचार करें - जीवित व्यक्ति दिन में तीन बार भोजन करता था अब एक दिन भोजन करने से 1 वर्ष तक कैसे तृप्त हो सकते हैं?
👇
𝐒𝐚𝐭𝐲𝐚𝐦 𝐊𝐮𝐦𝐚𝐫❤️ (@sadanandsahu295) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि श्राद्ध और पितृ पूजा से जीव की गति नहीं होती" प्रेत शिला पर जाय विराजे, फिर पितरों पिण्ड भराहीं। बहुर श्राद्ध खान कूं आया, काग भये कलि माहीं।।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
श्राद्ध और पितृ पूजा से जीव की गति नहीं होती"

प्रेत शिला पर जाय विराजे, फिर पितरों पिण्ड भराहीं।
बहुर श्राद्ध खान कूं आया, काग भये कलि माहीं।।
RAJEEV KUMAR (@rajeev93813619) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि भक्ति नहीं करने वाले व शास्त्रविरुद्ध भक्ति करने वाले, नकली गुरु बनाने वाले एवं पाप अपराध करने वालों को मृत्यु पश्चात्‌ यमदूत घसीटकर ले जाते हैं और नरक में भयंकर यातनाएं देते हैं। तत्पश्चात् 84 लाख कष्टदायक योनियों में जन्म मिलता है।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
भक्ति नहीं करने वाले व शास्त्रविरुद्ध भक्ति करने वाले, नकली गुरु बनाने वाले एवं पाप अपराध करने वालों को मृत्यु पश्चात्‌ यमदूत घसीटकर ले जाते हैं और नरक में भयंकर यातनाएं देते हैं। तत्पश्चात् 84 लाख कष्टदायक योनियों में जन्म मिलता है।
Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है। अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुर

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि

गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर जो साधक मनमाना आचरण करते हैं उनको ना तो कोई सुख होता है ना कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा ना ही उनकी गति अर्थात मोक्ष होता है।
अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुर
Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि हमारी भी तो सुनो, हे बुद्धिमान हिन्दुओं! श्री देवकीनंदन जी, जबकि राधे -राधे बोलना न वेदों में है, न गीता में है। किसी भी शास्त्र में प्रमाण नहीं है। पवित्र गीता जी में अध्याय 17 श्लोक 23 में ‛ओम तत सत’ सांकेतिक मंत्रों से ही मोक्ष बताया है

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि

हमारी भी तो सुनो, हे बुद्धिमान हिन्दुओं!
श्री देवकीनंदन जी, 

जबकि राधे -राधे बोलना न वेदों में है, न गीता में है। किसी भी शास्त्र में प्रमाण नहीं है। 
पवित्र गीता जी में अध्याय 17 श्लोक 23 में ‛ओम तत सत’ सांकेतिक मंत्रों से ही मोक्ष बताया है
Dhanidas (@dhanidas123) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि Sant Rampal Ji Maharaj सूक्ष्मवेद (तत्वज्ञान) में तथा चारों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथवर्वेद) तथा इन चारों वेदों के सारांश गीता में स्पष्ट किया है कि आन-उपासना नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये शास्त्रों में वर्णित न होने से मनमाना आचरण है

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
Sant Rampal Ji Maharaj
सूक्ष्मवेद (तत्वज्ञान) में तथा चारों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथवर्वेद) तथा इन चारों वेदों के सारांश गीता में स्पष्ट किया है कि आन-उपासना नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये शास्त्रों में वर्णित न होने से मनमाना आचरण है
Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि गीताजी अध्याय 4 श्लोक 5 में गीता ज्ञान देने वाला भगवान स्वयं को जन्म मरण के अंतर्गत बता रहा है, फिर जन्म मरण से परे अविनाशी व पूजनीय पूर्ण परमात्मा कौन है? जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
गीताजी अध्याय 4 श्लोक 5 में गीता ज्ञान देने वाला भगवान स्वयं को जन्म मरण के अंतर्गत बता रहा है, फिर जन्म मरण से परे अविनाशी व पूजनीय पूर्ण परमात्मा कौन है? 
जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App
Madhusudan Chouhan Official (@pojaachouhand) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेकर कबीर साहेब जी की भक्ति करने से सतलोक की प्राप्ति होती है। सतलोक अविनाशी लोक है। वहां जाने के बाद साधक जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करता है।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेकर कबीर साहेब जी की भक्ति करने से सतलोक की प्राप्ति होती है।
सतलोक अविनाशी लोक है। वहां जाने के बाद साधक जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करता है।
Monu Saini (@monusai92487929) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि संत गरीबदास जी ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में कहा है कि यदि सतगुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो न पित्तर बनते न प्रेत, न गधा, न बैल बनते। Sant Rampal Ji Maharaj

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
संत गरीबदास जी ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में कहा है कि यदि सतगुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो न पित्तर बनते न प्रेत, न गधा, न बैल बनते।
Sant Rampal Ji Maharaj
Ghansyam sahu (@ghansyamsahu19) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि मार्कण्डेय पुराण (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पृष्ठ 237) में श्राद्ध के विषय मे एक कथा का वर्णन मिलता है जिसमें रूची नामक एक ऋषि को अपने चार पूर्वज जो शास्त्र विरुद्ध साधना करके पितर बने हुए थे तथा कष्ट भोग रहे थे, दिखा Sant Rampal Ji Maharaj

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
मार्कण्डेय पुराण (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पृष्ठ 237) में श्राद्ध के विषय मे एक कथा का वर्णन मिलता है जिसमें रूची नामक एक ऋषि को अपने चार पूर्वज जो शास्त्र विरुद्ध साधना करके पितर बने हुए थे तथा कष्ट भोग रहे थे, दिखा
Sant Rampal Ji Maharaj
Hemant K Gavel 𝕏 (@hemant_k_gavel) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि श्री विष्णु पुराण के तीसरे अंश में अध्याय 15 श्लोक 55-56 पृष्ठ 153 पर लिखा है कि श्राद्ध के भोज में यदि एक योगी यानी शास्त्रोक्त साधक को भोजन करवाया जाए तो श्राद्ध में आए हजार ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे परिवार सहित सर्व पितरों का उद्धार कर देता है।

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
श्री विष्णु पुराण के तीसरे अंश में अध्याय 15 श्लोक 55-56 पृष्ठ 153 पर लिखा है कि श्राद्ध के भोज में यदि एक योगी यानी शास्त्रोक्त साधक को भोजन करवाया जाए तो श्राद्ध में आए हजार ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे परिवार सहित सर्व पितरों का उद्धार कर देता है।
Ashwani Yadav (@ashwani15926863) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि श्राद्ध आदि शास्त्रविरूद्ध क्रियाऐं झूठे गुरूओं के कहने से करके अपना जीवन नष्ट करते हैं। सतगुरू (तत्वदर्शी संत) का सत्संग सुनते, उसकी सर्ब पापकर्म नष्ट हो जाते। सत्य साधना करके अमर लोक यानि गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहे Sant Rampal Ji Maharaj

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
श्राद्ध आदि शास्त्रविरूद्ध क्रियाऐं झूठे गुरूओं के कहने से करके अपना जीवन नष्ट करते हैं।  सतगुरू (तत्वदर्शी संत) का सत्संग सुनते, उसकी  सर्ब पापकर्म नष्ट हो जाते। सत्य साधना करके अमर लोक यानि गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहे

Sant Rampal Ji Maharaj
Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें

#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। 
अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें
Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

हमारी भी तो सुनो, हे बुद्धिमान हिन्दुओं! पवित्र गीता जी में अध्याय 17 श्लोक 23 में ‛ओम तत सत’ सांकेतिक मंत्रों से ही मोक्ष बताया है जिसका वास्तविक भेद व अधिकार केवल संत रामपाल जी महाराज जी के पास है। youtu.be/vDbVnuM-Io8?si…

Dipan Prajapat (@dipanprajapat) 's Twitter Profile Photo

संत रामपाल जी महाराज सभी शास्त्र के आधार से ज्ञान बताते हैंyoutu.be/P8T7vcRbXws?si…