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Dilipshete

@dilipshete4

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calendar_today22-07-2018 14:25:43

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होळीच्या दुसर्‍या दिवशी करायच्या धार्मिक कृती वसंत ऋतूतील पहिल्या प्रतिपदेला समृद्धी प्राप्त व्हावी, यासाठी सकाळी प्रातर्विधी आटोपून पितरांना तर्पण करावे. त्यानंतर सर्व दुष्ट शक्तींच्या शांतीसाठी होलिकेच्या विभूतीला वंदन करावे.

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अग्निहोत्र अणुबाँबसारख्या प्रभावी संहारकाचा किरणोत्सर्ग थोपवण्यासाठी सूक्ष्मातील काहीतरी करावे लागते यासाठी ऋषीमुनींनी यज्ञाचा प्रथमावतार असलेले अग्निहोत्र हा उपाय सांगितला आहे करण्यास अतिशय सोपा व अतिशय अल्प वेळात होणारा पण प्रभावी असा सूक्ष्मातील परिणाम साधून देणारा उपाय आहे.

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अग्निहोत्रामुळे वातावरण चैतन्यदायी बनते व संरक्षककवचही बनते.अग्निहोत्र हा यज्ञ बंधन्मुक्त असल्यामुळे तो स्त्री, पुरुष, मुले असे कोणीही सहजपणे करू शकतो. अग्निहोत्रामुळे आकाशमंडलातील देवतांचे सूस्म तत्त्व जागृत होऊन त्या देवतांच्या लहरी भूमीमंडलावर खेचल्या जातात.

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अग्निहोत्र म्हणजे काय ? अग्निहोत्र म्हणजे अग्न्यन्तर्यामी (अग्नीमध्ये) आहुती अर्पण करून केली जाणारी ईश्‍वरी उपासना. सूर्योदयाच्या, तसेच सूर्यास्ताच्या वेळी केली जाणारी सूर्याची उपासना म्हणजे अग्निहोत्र ! अग्निहोत्र म्हणजे कामधेनूच आहे.

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#WorldAgnihotraDay #ThursdayThought 📙 #Agnihotra आगामी तीसरे विश्वयुद्ध में प्रयोग किए जानेवाले विनाशकारी परमाणु अस्त्रों के विकिरण तथा महामारी फैलानेवाले विषाणुओं के महाघातक परिणामों से हम अपनी रक्षा कैसे करेंगे ? 🛍 Buy book online, click here @ sanatanshop.com/tag/agnihotra

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#ThursdayThought 
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आगामी तीसरे विश्वयुद्ध में प्रयोग किए जानेवाले विनाशकारी परमाणु अस्त्रों के विकिरण तथा महामारी फैलानेवाले विषाणुओं के महाघातक परिणामों से हम अपनी रक्षा कैसे करेंगे ?

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🚩 हमारा नववर्ष- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 🚩 हिन्दू जनजगृति समिति द्वारा नववर्ष (संवत्सरारम्भ) फरीदाबाद के सैनिक कालोनी में नव वर्ष (गुड़ी पड़वा) किस प्रकार मनाएं । ब्रम्ह ध्वज लगाने के लाभ व प्रत्यक्ष कृति कैसे करे , इन विषयों पर मार्गदर्शन किया गया। HinduJagrutiOrg

🚩 हमारा नववर्ष- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 🚩
हिन्दू जनजगृति समिति द्वारा नववर्ष (संवत्सरारम्भ)
फरीदाबाद के सैनिक कालोनी में  नव वर्ष (गुड़ी पड़वा) किस प्रकार मनाएं । ब्रम्ह ध्वज लगाने के लाभ व प्रत्यक्ष कृति कैसे करे , इन विषयों पर मार्गदर्शन किया गया। 
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🚩#Haryana में हिन्दू जनजागृति समिति का संपर्क अभियान 🚩 👉समिति के राष्ट्र एवं धर्म रक्षण के कार्य में सहभाग लेने हेतु संपर्क करें : 9990223837 ✊ Join us @ hindujagruti.org/join

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Ritu #सत्यसाधक (@riturathaur) 's Twitter Profile Photo

Cow urine has been granted US Patents (No. 6,896,907&6,410,059) for its medicinal properties, particularly as a bioenhancer, antifungal,anticancer agent. We as a nation could not preserve our ancient knowledge systems Shame on us Narendra Modi @amitshah ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/P…

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जोधपुर में #Holi के अवसर पर हिंदू राष्ट्र स्थापना इस विषय पर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ) चारुदत्त पिंगले जी का मार्गदर्शन ! DrCharudatta pingale #Rajasthan #Jodhpur #HinduRashtra

जोधपुर में #Holi  के अवसर पर हिंदू राष्ट्र स्थापना इस विषय पर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ) चारुदत्त पिंगले जी का मार्गदर्शन ! <a href="/hjsdrpingale/">DrCharudatta pingale</a> 

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विश्वविख्यात श्री छिन्नमस्तिका देवी का अति प्राचीन मंदिर झारखंड की राजधानी रांची से ८० किलोमीटर दूर रामगढ जनपद के रजरप्पा गांव में श्री छिन्नमस्तिका देवी का विश्वविख्यात मंदिर है । भारत के अनेक प्राचीन मंदिरों में एक  यह मंदिर, भैरवी तथा दामोदर इन नदियों के संगम पर स्थित है ।

विश्वविख्यात श्री छिन्नमस्तिका देवी का अति प्राचीन मंदिर
झारखंड की राजधानी रांची से ८० किलोमीटर दूर रामगढ जनपद के रजरप्पा गांव में श्री छिन्नमस्तिका देवी का विश्वविख्यात मंदिर है । भारत के अनेक प्राचीन मंदिरों में एक  यह मंदिर, भैरवी तथा दामोदर इन नदियों के संगम पर स्थित है ।
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श्री छिन्नमस्तिका देवी की प्रतिमा मंदिर में स्वयंभू है मंदिर का प्रवेश द्वार पूरब में है देवी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में है मंदिर में उत्तर दिशा में स्थित शिला पर देवी के त्रिनेत्र हैं देवी के गले में सर्पमाला तथा मुंडमाला है यह देवी असुरोंका नाश करनेवाली है ।

श्री छिन्नमस्तिका देवी की प्रतिमा 
मंदिर में स्वयंभू है मंदिर का प्रवेश द्वार पूरब में है देवी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में है मंदिर में उत्तर दिशा में स्थित शिला पर देवी के त्रिनेत्र हैं देवी के गले में सर्पमाला तथा मुंडमाला है यह देवी असुरोंका नाश करनेवाली है ।
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क्रांतिवीर बाबाराव सावरकर (१८७९ – १९४५)बाबाराव सावरकर, स्वतंत्रतावीर विनायक दामोदर सावरकरके जेष्ठ बंधू थे । उन्होंने ही स्व. सावरकरको पितृतुल्य स्नेह देकर, अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितिमें विपत्तियोंका सामना करते हुए उनका लालन-पालन किया एवं उनके साथ ही साथ क्रांतिकार्यमें योगदान दिया

क्रांतिवीर बाबाराव सावरकर (१८७९ – १९४५)बाबाराव सावरकर, स्वतंत्रतावीर विनायक दामोदर सावरकरके जेष्ठ बंधू थे । उन्होंने ही स्व. सावरकरको पितृतुल्य स्नेह देकर, अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितिमें विपत्तियोंका सामना करते हुए उनका लालन-पालन किया एवं उनके साथ ही साथ क्रांतिकार्यमें योगदान दिया
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तांबूल-सेवनका आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्व भोजन के उपरांत तांबूल-सेवन के कारण पान के पत्ते से सूक्ष्म-वायु प्रक्षेपित होती है । परिणामस्वरूप अन्न से प्रक्षेपित सात्त्विक तरंगों को ग्रहण करने की, जीव के प्राणदेह तथा प्राणमयकोष की क्षमता बढ जाती है ।

तांबूल-सेवनका आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्व

भोजन के उपरांत तांबूल-सेवन के कारण पान के पत्ते से सूक्ष्म-वायु प्रक्षेपित होती है । परिणामस्वरूप अन्न से प्रक्षेपित सात्त्विक तरंगों को ग्रहण करने की, जीव के प्राणदेह तथा प्राणमयकोष की क्षमता बढ जाती है ।
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तांबूल सेवनका महत्त्व पान से प्रक्षेपित सूक्ष्म-वायु से शरीर के पंचप्राणों के कार्य को गति प्राप्त होती है तथा अन्न से प्रक्षेपित रज-तमयुक्त वायु का विघटन होने में सहायता मिलती है । इसलिए स्थूल तथा सूक्ष्म स्तर पर भी अन्न का पाचन भली-भांति होता है ।

तांबूल सेवनका महत्त्व 

पान से प्रक्षेपित सूक्ष्म-वायु से शरीर के पंचप्राणों के कार्य को गति प्राप्त होती है तथा अन्न से प्रक्षेपित रज-तमयुक्त वायु का विघटन होने में सहायता मिलती है । इसलिए स्थूल तथा सूक्ष्म स्तर पर भी अन्न का पाचन भली-भांति होता है ।
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#InternationalDayofHappiness प्रत्येक व्यक्ति पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धिद्वारा विषयसुख भोगनेका प्रयत्न करता है; परंतु विषयसुख तात्कालिक होता है, तो दूसरी ओर आनंद चिरकालीन एवं सर्वोच्च श्रेणीका होता है ।अध्यात्मशास्त्र आत्मसुख प्राप्त करवाता है। 🛍sanatanshop.com/product/spirit…

#InternationalDayofHappiness
 प्रत्येक व्यक्ति पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धिद्वारा विषयसुख भोगनेका प्रयत्न करता है; परंतु विषयसुख तात्कालिक होता है, तो दूसरी ओर आनंद चिरकालीन एवं सर्वोच्च श्रेणीका होता है ।अध्यात्मशास्त्र आत्मसुख प्राप्त करवाता है।

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भोजन करना,केवल पेट भरना नहीं है अपितु यह एक ‘यज्ञकर्म’ है अतः यह कार्य बातें करते हुए न कर, शांतचित्त से नामजप करते हुए करना अपेक्षित है उस समय किसी पर क्रोध करनेसे यज्ञकर्म नहीं हो पाता,अर्थात उस अन्न से हमें सात्त्विकता नहीं मिलती परिणाम यह होता है कि अन्नपाचन ठीक से नहीं होता

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भोजन करते समय चल-दूरभाष पर (‘मोबाइल’पर) बात न करें भोजन करते समय चल-दूरभाष पर (‘मोबाइल’पर) बात करना देह के रजतमात्मक स्पंदनों से युक्त धारणा के लिए पोषक है । अतएव दूषित तरंगों की सहायता से देह को हानि पहुंचानेवाले कृत्यों से बचें

भोजन करते समय चल-दूरभाष पर (‘मोबाइल’पर) बात न करें

भोजन करते समय चल-दूरभाष पर (‘मोबाइल’पर) बात करना देह के रजतमात्मक स्पंदनों से युक्त धारणा के लिए पोषक है । अतएव दूषित तरंगों की सहायता से देह को हानि पहुंचानेवाले कृत्यों से बचें
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आयुर्वेद म्हणजे आयुष्याचा वेद किंवा मानवी जीवनाचे शास्त्र.त्यात शारीरिक मानसिक सामाजिक वआध्यात्मिक स्वास्थ्य कसे राखावे याचे मार्गदर्शन केले आहे.आयुष्याला हितकर व अहितकर आहार,विहार व आचार यांचे विवेचन केलेले आहे मानवी आयुष्याचे ध्येय व खरे सुख कशात आहे याचाही विचार केलेला आहे

आयुर्वेद म्हणजे आयुष्याचा वेद किंवा मानवी जीवनाचे शास्त्र.त्यात शारीरिक मानसिक सामाजिक वआध्यात्मिक स्वास्थ्य कसे राखावे याचे मार्गदर्शन केले आहे.आयुष्याला हितकर व अहितकर आहार,विहार व आचार यांचे विवेचन केलेले आहे मानवी आयुष्याचे ध्येय व खरे सुख कशात आहे याचाही विचार केलेला आहे
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आयुर्वेदात रोगांची कारणे, लक्षणे, उपचार व रोग होऊ नये म्हणून उपाय दिलेले आहेत. याच आयुष्यातच नव्हे, तर पुढील जन्मांतही सर्वांगीण उन्नति करून मानवी जीवनाचे अंतिम ध्येय, दुःखापासून कायमची मुक्ति व सच्चिदानंद स्वरूपाची सतत अनुभूति कसी घ्यायची याचेही मार्गदर्शन आयुर्वेदाने केले आहे.

आयुर्वेदात रोगांची कारणे, लक्षणे, उपचार व रोग होऊ नये म्हणून उपाय दिलेले आहेत. याच आयुष्यातच नव्हे, तर पुढील जन्मांतही सर्वांगीण उन्नति करून मानवी जीवनाचे अंतिम ध्येय, दुःखापासून कायमची मुक्ति व सच्चिदानंद स्वरूपाची सतत अनुभूति कसी घ्यायची याचेही मार्गदर्शन आयुर्वेदाने केले आहे.
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आयुर्वेद म्हणजे मानवी जीवनाचा सर्वांगीण विचार करणारे व यशस्वी, पुण्यमय, दीर्घ, आरोग्यसंपन्न जीवन कसे जगावे याचे मार्गदर्शन करणारे शास्त्र होय.

आयुर्वेद म्हणजे मानवी जीवनाचा सर्वांगीण विचार करणारे व यशस्वी, पुण्यमय, दीर्घ, आरोग्यसंपन्न जीवन कसे जगावे याचे मार्गदर्शन करणारे शास्त्र होय.