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Deen Dayal Sharma Chau

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calendar_today13-05-2022 10:27:09

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जो भी संत शास्त्रों के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

जो भी संत शास्त्रों के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है। यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है।
यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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जब तक सच्चे गुरु (सतगुरू) की प्राप्ति नहीं होती है तब तक गुरु बदलते रहना चाहिए। जब तक गुरु मिले ना सांचा। तब तक करो गुरु दस पांचा।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

जब तक सच्चे गुरु (सतगुरू) की प्राप्ति नहीं होती है तब तक गुरु बदलते रहना चाहिए।
जब तक गुरु मिले ना सांचा। तब तक करो गुरु दस पांचा।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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आज कलियुग में भक्त समाज के सामने पूर्ण गुरु की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों द्वारा करवाता है वही पूर्ण संत है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

आज कलियुग में भक्त समाज के सामने पूर्ण गुरु की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों द्वारा करवाता है वही पूर्ण संत है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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जैसे कुम्हार कच्चे घड़े को तैयार करते समय एक हाथ घड़े के अन्दर डाल कर सहारा देता है। तत्पश्चात् ऊपर से दूसरे हाथ से चोटें लगाता है। यदि अन्दर से हाथ का सहारा घड़े को न मिले तो ऊपर की चोट को कच्चा घड़ा सहन नहीं कर सकता वह नष्ट हो जाता है। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

जैसे कुम्हार कच्चे घड़े को तैयार करते समय एक हाथ घड़े के अन्दर डाल कर सहारा देता है। तत्पश्चात् ऊपर से दूसरे हाथ से चोटें लगाता है। यदि अन्दर से हाथ का सहारा घड़े को न मिले तो ऊपर की चोट को कच्चा घड़ा सहन नहीं कर सकता वह नष्ट हो जाता है। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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कुमार का घड़ा यदि थोड़ा सा भी टेढ़ापन घड़े में रह जाए तो उस की कीमत नहीं होती। फैंकना पड़ता है। इसी प्रकार गुरूदेव अपने शिष्य की आपत्तियों से रक्षा भी करता है तथा मन को रोकता है तथा प्रवचनों की चोटें लगा कर सर्व त्राुटियों को निकालता है। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

कुमार का घड़ा यदि थोड़ा सा भी टेढ़ापन घड़े में रह जाए तो उस की कीमत नहीं होती। फैंकना पड़ता है। इसी प्रकार गुरूदेव अपने शिष्य की आपत्तियों से रक्षा भी करता है तथा मन को रोकता है तथा प्रवचनों की चोटें लगा कर सर्व त्राुटियों को
निकालता है।
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कबीर, गुरू कुम्हार शिष्य कुम्भ है, घड़ घड़ काढे खोट। अन्दर हाथ सहारा देकर, ऊपर मारै चोट।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

कबीर, गुरू कुम्हार शिष्य कुम्भ है, घड़ घड़ काढे खोट। अन्दर हाथ सहारा देकर, ऊपर मारै चोट।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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कबीर, सतगुरु शरण में आने से, आई टले बलाय। जै मस्तिक में सूली हो वह कांटे में टल जाय।। सतगुरु अथार्त् तत्वदर्शी संत से उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से प्रारब्ध कर्म के पाप अनुसार यदि भाग्य में सजाए मौत हो तो वह पाप कर्म हल्का होकर सामने आएगा।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

कबीर, सतगुरु शरण में आने से, आई टले बलाय।
जै मस्तिक में सूली हो वह कांटे में टल जाय।।
सतगुरु अथार्त् तत्वदर्शी संत से उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से प्रारब्ध कर्म के पाप अनुसार यदि भाग्य में सजाए मौत हो तो वह पाप कर्म हल्का होकर
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सतगुरू के बिना खालिक (परमात्मा) का विचार यानि यथार्थ ज्ञान नहीं मिलता। जिस कारण से संसार के व्यक्ति चौरासी लाख प्रकार के प्राणियों के शरीरों को प्राप्त करते हैं क्योंकि वे सार नाम, मूल ज्ञान को नहीं पहचानते। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

सतगुरू के बिना खालिक (परमात्मा) का विचार यानि यथार्थ ज्ञान नहीं मिलता। जिस कारण से संसार के व्यक्ति चौरासी लाख प्रकार के प्राणियों के शरीरों को प्राप्त करते हैं क्योंकि वे सार नाम, मूल ज्ञान को नहीं पहचानते। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या ।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या ।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज जो भी संत शास्त्रों के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत को

#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
जो भी संत शास्त्रों के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत को
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तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वेद के जानने वाला कहा जाता है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वेद के जानने वाला कहा जाता है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्य।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्य।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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पूर्ण गुरु की पहचान पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में मिलता है व गीता जी के अध्याय नं. 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नं. 822 में मिलता है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

पूर्ण गुरु की पहचान
पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में मिलता है व गीता जी के अध्याय नं. 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नं. 822 में मिलता है।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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श्री गुरु ग्रन्थ साहिब पृष्ठ 946 बिन सतगुरु सेवे जोग न होई। बिन सतगुरु भेटे मुक्ति न होई। बिन सतगुरु भेटे नाम पाइआ न जाई। बिन सतगुरु भेटे महा दुःख पाई। बिन सतगुरु भेटे महा गरबि गुबारि। नानक बिन गुरु मुआ जन्म हारि।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

श्री गुरु ग्रन्थ साहिब पृष्ठ 946
बिन सतगुरु सेवे जोग न होई। बिन सतगुरु भेटे मुक्ति न होई।
बिन सतगुरु भेटे नाम पाइआ न जाई। बिन सतगुरु भेटे महा दुःख पाई।
बिन सतगुरु भेटे महा गरबि गुबारि। नानक बिन गुरु मुआ जन्म हारि।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मंड का एक रति नहीं भार। सतगुरू पुरूष कबीर हैं कुल के सृजनहार।। #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मंड का एक रति नहीं भार। सतगुरू पुरूष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।
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कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते हैं कि- जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै। या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी।। कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को इस वाणी में ये समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते हैं कि-
जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै।
या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी।।
कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को इस वाणी में ये समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति 
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कबीर, दण्डवत् गोविन्द गुरू, बन्दू अविजन सोय। पहले भये प्रणाम तिन, नमो जो आगे होय।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

कबीर, दण्डवत् गोविन्द गुरू, बन्दू अविजन सोय।
पहले भये प्रणाम तिन, नमो जो आगे होय।।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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गुरु के समान कोई तीर्थ नहीं श्री नानक देव जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी के पृष्ठ 437 पर कहा है:- नानक गुरु समानि तीरथु नहीं कोई साचे गुरु गोपाल।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

गुरु के समान कोई तीर्थ नहीं 
श्री नानक देव जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी के पृष्ठ 437 पर कहा है:-
नानक गुरु समानि तीरथु नहीं कोई साचे गुरु गोपाल।#पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज
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श्री नानक देव जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी के पृष्ठ 1342 पर कहा है:- ‘‘गुरु सेवा बिन भक्ति ना होई, अनेक जतन करै जे कोई’’ #पूर्णगुरु_संतरामपालजी_महाराज

श्री नानक देव जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी के पृष्ठ 1342 पर कहा है:-
‘‘गुरु सेवा बिन भक्ति ना होई, अनेक जतन करै जे कोई’’
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