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Jitendra Das

@dasjitendra3

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल महाराज की जय हो

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calendar_today09-06-2022 12:33:23

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#कबीर_भगवान_के_चमत्कार शेख तकी ने हजारों मुसलमानों को इकट्ठा करके कहा कि हम कबीर को उबलते तेल की कढ़ाई में डालेंगे। यदि नहीं मरा तो मान लेंगे कबीर अल्लाह है। कबीर साहेब उबलते तेल की कढ़ाई में स्वयं ही जाकर ऐसे बैठ गए जैसे ठंडे जल में बैठे हों उनके शरीर को खरोच तक नहीं आई।

#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
शेख तकी ने हजारों मुसलमानों को इकट्ठा करके कहा कि हम कबीर को उबलते तेल की कढ़ाई में डालेंगे। यदि नहीं मरा तो मान लेंगे कबीर अल्लाह है। कबीर साहेब उबलते तेल की कढ़ाई में स्वयं ही जाकर ऐसे बैठ गए जैसे ठंडे जल में बैठे हों उनके शरीर को खरोच तक नहीं आई।
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#कबीर_भगवान_के_चमत्कार परमात्मा के शरीर में कीलें ठोकने का व्यर्थ प्रयत्न कबीर साहेब को मारने के लिए एक दिन शेखतकी ने सिपाहियों को आदेश दिया की कबीर साहेब को पेड़ से बांधकर शरीर पर बड़ी बड़ी कील ठोक दो। God Kabir Prakat Diwas

#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
परमात्मा के शरीर में कीलें ठोकने का व्यर्थ प्रयत्न कबीर साहेब को मारने के लिए एक दिन शेखतकी ने सिपाहियों को आदेश दिया की कबीर साहेब को पेड़ से बांधकर शरीर पर बड़ी बड़ी कील ठोक दो।
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#कबीर_भगवान_के_चमत्कार एक बार शेखतकी ने कबीर परमेश्वर को मारने के उद्देश्य से कबीर परमेश्वर के हाथ पैर बांध कर खूनी हाथी को शराब पिलाकर छोड़ दिया । लेकिन जैसे ही हाथी कबीर परमेश्वर के पास आया तो कबीर परमेश्वर की जगह शेर दिखाई दिया। शेर को देखकर डरके मारे वहां से उल्टे पैर भाग

#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
एक बार शेखतकी ने कबीर परमेश्वर को मारने के उद्देश्य से कबीर परमेश्वर के हाथ पैर बांध कर खूनी हाथी को शराब पिलाकर छोड़ दिया ।
लेकिन जैसे ही हाथी कबीर परमेश्वर के पास आया तो कबीर परमेश्वर की जगह शेर दिखाई दिया। शेर को देखकर डरके मारे वहां से उल्टे पैर भाग
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#कबीर_भगवान_के_चमत्कार शेखतकी ने कबीर परमेश्वर को जान से मारने के लिए गंगा नदी के बीच में ले जाकर उनके हाथ पैरों को जंजीर से बांध कर शरीर पर बड़े बड़े पत्थर बांध कर नदी में डूबो दिया । लेकिन कबीर परमेश्वर नहीं डूबे । गंगा नदी में ऐसे बैठे रहे जैसे पृथ्वी पर बैठे हों ।

#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
शेखतकी ने कबीर परमेश्वर को जान से मारने के लिए गंगा नदी के बीच में ले जाकर उनके हाथ पैरों को जंजीर से बांध कर शरीर पर बड़े बड़े पत्थर बांध कर नदी में डूबो दिया । लेकिन कबीर परमेश्वर नहीं डूबे । गंगा नदी में ऐसे बैठे रहे जैसे पृथ्वी पर बैठे हों ।
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#କବୀରଜୀଙ୍କ_ସହିତ_ହୋଇଥିବା_୫୨ଅତ୍ୟାଚାର କବୀର ପରମେଶ୍ବରଙ୍କୁ ମାରିବା ପାଇଁ ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନ ଧର୍ମଗୁରୁମାନେ ବହୁତ ପ୍ରୟାସ କରିଥିଲେ। ସମ୍ରାଟ ସିକନ୍ଦର ଲୋଧୀ ନିକଟରେ ମିଥ୍ୟା ଅଭିଯୋଗ କରି ଅନେକ ଥର ଦଣ୍ଡ ଦେବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ କବୀର ସାହେବଜୀଙ୍କୁ ମାରିପାରି ନଥିଲେ କାରଣ ସେ ଅବିନାଶୀ।

#କବୀରଜୀଙ୍କ_ସହିତ_ହୋଇଥିବା_୫୨ଅତ୍ୟାଚାର

କବୀର ପରମେଶ୍ବରଙ୍କୁ ମାରିବା ପାଇଁ  ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନ ଧର୍ମଗୁରୁମାନେ ବହୁତ ପ୍ରୟାସ କରିଥିଲେ। ସମ୍ରାଟ ସିକନ୍ଦର ଲୋଧୀ ନିକଟରେ ମିଥ୍ୟା ଅଭିଯୋଗ କରି ଅନେକ ଥର ଦଣ୍ଡ ଦେବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ କବୀର ସାହେବଜୀଙ୍କୁ ମାରିପାରି ନଥିଲେ କାରଣ ସେ ଅବିନାଶୀ।
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#କବୀରଜୀଙ୍କ_ସହିତ_ହୋଇଥିବା_୫୨ଅତ୍ୟାଚାର କବୀର ପରମେଶ୍ବରଙ୍କୁ ମାରିବା ପାଇଁ ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନ ଧର୍ମଗୁରୁମାନେ ବହୁତ ପ୍ରୟାସ କରିଥିଲେ। ସମ୍ରାଟ ସିକନ୍ଦର ଲୋଧୀ ନିକଟରେ ମିଥ୍ୟା ଅଭିଯୋଗ କରି ଅନେକ ଥର ଦଣ୍ଡ ଦେବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ କବୀର ସାହେବଜୀଙ୍କୁ ମାରିପାରି ନଥିଲେ କାରଣ ସେ ଅବିନାଶୀ। God Kabir Prakat Diwa

#କବୀରଜୀଙ୍କ_ସହିତ_ହୋଇଥିବା_୫୨ଅତ୍ୟାଚାର

କବୀର ପରମେଶ୍ବରଙ୍କୁ ମାରିବା ପାଇଁ  ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନ ଧର୍ମଗୁରୁମାନେ ବହୁତ ପ୍ରୟାସ କରିଥିଲେ। ସମ୍ରାଟ ସିକନ୍ଦର ଲୋଧୀ ନିକଟରେ ମିଥ୍ୟା ଅଭିଯୋଗ କରି ଅନେକ ଥର ଦଣ୍ଡ ଦେବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ କବୀର ସାହେବଜୀଙ୍କୁ ମାରିପାରି ନଥିଲେ କାରଣ ସେ ଅବିନାଶୀ।
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#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા ઇ. સ.1398માં જ્યારે કબીર પરમેશ્વર સતલોકથી અવતરીત થયા ત્યારે આખું કાશી શહેર પરમેશ્વરને બાળક રૂપમાં જોવા ઊમટ્યું હતું. સ્ત્રી-પુરુષના ટોળેટોળાં મંગળ ગીતો ગાતાં-ગાતાં નીરુના ઘરે બાળકને જોવા માટે આવ્યાં. God Kabir Prakat Diwas

#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા
ઇ. સ.1398માં જ્યારે કબીર પરમેશ્વર સતલોકથી અવતરીત થયા ત્યારે આખું કાશી શહેર પરમેશ્વરને બાળક રૂપમાં જોવા ઊમટ્યું હતું. સ્ત્રી-પુરુષના ટોળેટોળાં મંગળ ગીતો ગાતાં-ગાતાં નીરુના ઘરે બાળકને જોવા માટે આવ્યાં.
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#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા કબીર સાહેબજી આ કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455(ઇ. સ. 1398) જેઠ સુદ પૂનમના દિવસે સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર બાળક રૂપમાં પ્રગટ થયા હતા. ત્યાં નીરુ અને નીમા નામના પતિ-પત્ની સ્નાન કરવા આવતાં હતાં, તેમને મળ્યા.

#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા
કબીર સાહેબજી આ કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455(ઇ. સ. 1398) જેઠ સુદ પૂનમના દિવસે સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર બાળક રૂપમાં પ્રગટ થયા હતા. ત્યાં નીરુ અને નીમા નામના પતિ-પત્ની સ્નાન કરવા આવતાં હતાં, તેમને મળ્યા.
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#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા કબીર સાહેબજી આ કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455(ઇ. સ. 1398) જેઠ સુદ પૂનમના દિવસે સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર બાળક રૂપમાં પ્રગટ થયા હતા. ત્યાં નીરુ અને નીમા નામના પતિ-પત્ની સ્નાન કરવા આવતાં હતાં, તેમને મળ્યા.

#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા
કબીર સાહેબજી આ કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455(ઇ. સ. 1398) જેઠ સુદ પૂનમના દિવસે સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર બાળક રૂપમાં પ્રગટ થયા હતા. ત્યાં નીરુ અને નીમા નામના પતિ-પત્ની સ્નાન કરવા આવતાં હતાં, તેમને મળ્યા.
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#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા ગરીબ, અનંત કોટ બ્રહ્માંડ મેં, બંદી છોડ કહાય। સો તૌ એક કબીર હૈં, જનની જન્યા ન માય।। ગરીબ, દુની કહૈ યોહ દેવ હૈ, દેવ કહત હૈં ઈશ। ઈશ કહૈ પાર બ્રહ્મ હૈ, પૂર્ણ બિસ્વે બિસ।। God Kabir Prakat Diwas

#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા
ગરીબ, અનંત કોટ બ્રહ્માંડ મેં, બંદી છોડ કહાય।
સો તૌ એક કબીર હૈં, જનની જન્યા ન માય।।

ગરીબ, દુની કહૈ યોહ દેવ હૈ, દેવ કહત હૈં ઈશ।
ઈશ કહૈ પાર બ્રહ્મ હૈ, પૂર્ણ બિસ્વે બિસ।।
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#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા કબીર પરમેશ્વર કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455 (ઇ.સ 1398) માં જેઠ સુદ પૂનમની સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર શિશુરૂપમાં પ્રકટ થયા હતા, તેઓ 120 વર્ષ સુધી રહ્યા અને ઘણા ચમત્કાર, અને લીલા કરી. God Kabir Prakat Diwas

#કબીરપરમેશ્વરની_પ્રગટલીલા
કબીર પરમેશ્વર કળિયુગમાં ભારતના કાશી શહેરના લહરતારા તળાવમાં વિક્રમ સંવત 1455 (ઇ.સ 1398) માં જેઠ સુદ પૂનમની સવારે બ્રહ્મ મુહૂર્તમાં કમળના ફૂલ પર શિશુરૂપમાં પ્રકટ થયા હતા, તેઓ 120 વર્ષ સુધી રહ્યા અને  ઘણા ચમત્કાર, અને લીલા કરી.
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#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य कबीर साहेब जी का नामकरण- काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। 3 Days Left Kabir Prakat Diwas

#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य
कबीर साहेब जी का नामकरण-
काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। 

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#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले। 3 Days Left Kabir Prakat Diwas

#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
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#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले। 3 Days Left Kabir Prakat Diwas

#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य
कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
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#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :- जाति मेरी जगत्गुरु, परमेश्वर है पंथ। 3 Days Left Kabir Prakat Diwas

#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य
स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :- जाति मेरी जगत्गुरु, परमेश्वर है पंथ। 
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#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य कबीर साहेब जी का नामकरण- काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों 3 Days Left Kabir Prakat Diwas

#कबीरजी_का_कलयुगमें_प्राकट्य
कबीर साहेब जी का नामकरण-
काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों 

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