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Banti Malviya

@bantimalviya143

Computer Operator in MPEB

ID: 3179170710

calendar_today29-04-2015 11:12:41

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वाक़िफ़ हैं निगाहें 👀 (@tere_do_nainaaa) 's Twitter Profile Photo

हर्फ़-ए-ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है बाब इक और मोहब्बत का खुला चाहता है एक लम्हे की तवज्जोह नहीं हासिल उस की और ये दिल कि उसे हद से सिवा चाहता है ~परवीन शाकिर 🌻✨ December returns ♥️

अमीर चतुर्वेदी (@copsanuofficial) 's Twitter Profile Photo

मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना हर एक चीज़ की क़ीमत बताने लगते हैं। —— मलिकजादा जावेद🌷

Ranvijay Singh (@ranvijaylive) 's Twitter Profile Photo

साल 2013 का वीडियो है. क्या आज मीडिया मोदी का ऐसा वीडियो बना सकता है? जवाब आपको पता है.

अमीर चतुर्वेदी (@copsanuofficial) 's Twitter Profile Photo

बनाया है मैंने ये घर धीरे-धीरे, खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे-धीरे। किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला, कटा ज़िंदगी का सफ़्रर धीरे-धीरे। जहाँ आप पहुँचे छ्लाँगे लगाकर, वहाँ मैं भी आया मगर धीरे-धीरे। —— रामदरश मिश्र🌷

हिंदी सोपान (@hindisopan) 's Twitter Profile Photo

दरवाज़ा बारिश में भीगा फूल गया है। कभी पेड़ था, हम समझे थे भूल गया है। ~ नरेश सक्सेना

उम्दा_पंक्तियां (@umda_panktiyaan) 's Twitter Profile Photo

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ~ अहमद फ़राज़

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

~ अहमद फ़राज़
शून्य (@shoonyapoetry) 's Twitter Profile Photo

तारीखें याद करने में कच्चे रहे मर्द ~ आसिफ़ ख़ान 🌻❤️

Shakeel Azmi (@poetshakeelazmi) 's Twitter Profile Photo

एक ही दिन में सब नहीं हुआ ख़त्म हम कई रोज से बिछड रहे थे - शकील आज़मी

Murlidhar Taalib (مرلی دھر طالب) (@murlidhartaalib) 's Twitter Profile Photo

भले वो धूप से बचने अमान में आया, चलो कोई तो शिकस्ता मकान में आया !! हज़ार शहर में थे फूल बेचने वाले ज़ह-ए-नसीब वो मेरी दुकान में आया !! पहल पहल तो बहुत पास पास थे दोनों फिर एक रोज़ कोई दरमियान में आया !! इमरान नज़ीर मानी

हिंदी सोपान (@hindisopan) 's Twitter Profile Photo

यही हुआ था पिछली बार यही होगा अगली बार भी हम फिर मिलेंगे किसी दूसरे शहर में और ताकते रह जाएँगे एक दूसरे का मुँह -केदारनाथ सिंह

मुसाफिर🇮🇳 (@musafir_vj) 's Twitter Profile Photo

ज़िंदा है तो ज़िंदा है मर गए तो फिर कहां जिंदा है...🩶🙌

शून्य (@shoonyapoetry) 's Twitter Profile Photo

“मैं देख चुका हूं ख़ुद को तुम्हारी निगाहों में अब मैं अपने घर में आईना नहीं रखता”❤️ ~ पंकज झा 🌻

शून्य (@shoonyapoetry) 's Twitter Profile Photo

इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं आप कश्ती हैं तो हम को पार होना चाहिए ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें टूटा-फूटा

इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए

आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हम को पार होना चाहिए

ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों
आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए

ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें
टूटा-फूटा
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क़लम पे उस के नहीं है अब ए'तिबार मुझे, मिटा चुका है वो लिख लिख के बार-बार मुझे !! अगर मैं ज़ख़्म हूँ तो मुझ को दरमियान में रख, अगर मैं तीर हूँ तो कर ले आर-पार मुझे !! उसे पुकार रहा था मैं अपनी आँखों से पलट के देख तो लेता वो एक बार मुझे !! ~ अज़हर नवाज़

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ज़िंदा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या, दुनिया से ख़ामुशी से गुज़र जाएँ हम तो क्या !! हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने, इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या !! अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ, शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या !! मुनीर नियाज़ी

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जो एक उम्र हँसा था मुझे सताते हुए वो रो पड़ा है मिरी दास्ताँ सुनाते हुए किसी के प्यार की ये आख़िरी निशानी है हवा ने ये भी न सोचा दिया बुझाते हुए तुम्हें भी वक़्त की गर्दिश निगल न जाए कहीं ज़रा ख़याल हो मेरी हँसी उड़ाते हुए वो शख़्स जिस का तअ'ल्लुक़ न था कोई मुझ से ये क्या कि

जो एक उम्र हँसा था मुझे सताते हुए
वो रो पड़ा है मिरी दास्ताँ सुनाते हुए

किसी के प्यार की ये आख़िरी निशानी है
हवा ने ये भी न सोचा दिया बुझाते हुए

तुम्हें भी वक़्त की गर्दिश निगल न जाए कहीं
ज़रा ख़याल हो मेरी हँसी उड़ाते हुए

वो शख़्स जिस का तअ'ल्लुक़ न था कोई मुझ से
ये क्या कि
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ग़मगीन मनाज़िर के तलबगार मुझे देख, तेरे लिए होता हूँ मैं तैयार मुझे देख !! मेमार ही तकता नहीं तामीर की जानिब तामीर तो कहती है कि मेमार मुझे देख !! रौनक़ के समुंदर में मुझे देखने वाले ख़लवत के जज़ीरे पे भी इक बार मुझे देख !! अहमद अब्दुल्लाह

संतोष त्रिवेदी (केदारखंडी) (@santoshtrivedi_) 's Twitter Profile Photo

मेरे मुकाबले पे किसको लाओगे, मेरे सिवा किसी को मानता है दिल, तुम्हारे बाद का तो खैर क्या कहें, तुम्हारे साथ भी बहुत दुखा है दिल ..... फरीहा नकवी

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ख़िज़ाँ का रंग दरख़्तों पे आ के बैठ गया मैं तिलमिला के उठा फड़फड़ा के बैठ गया !! पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया !! मैं अपने आप से आगे निकलने वाला था सो ख़ुद को अपनी नज़र से गिरा के बैठ गया !! ~ फ़ाज़िल जमीली

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हमारे शहर की ख़ामोशियाँ निराली हैं, सुकून-बख़्श हैं चेहरे मगर सवाली हैं !! मैं अपने सर को बचाने कहाँ कहाँ जाऊँ, ये राहें सारी ही मक़्तल को जाने वाली हैं !! हम अपने ज़ेहन पे वो ज़ख़्म सह चुके 'शाहिद' दवाएँ जिन की ज़माने ने अब निकाली हैं !! ~ शाहिद अनवर