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Amol das Amol das

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अमोल दास जिला ललितपुर उत्तर प्रदेश
काम, मजदूरी

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#GodNightWednesday #हिन्दूसाहेबान_नहीं_समझे गीता वेद पुराण कबीर साहेब जी को जहरीले सर्प से मारने का प्रयास सिपाहियों द्वारा कबीर साहेब के गले में जहरीला सर्प डालते ही वह सर्प, सुंदर पुष्पों की माला बन गया। क्योंकि कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा हैं। ⏩WATCH SADHNA TV 7:30 PM

#GodNightWednesday 
#हिन्दूसाहेबान_नहीं_समझे गीता वेद पुराण
कबीर साहेब जी को जहरीले सर्प से मारने का प्रयास सिपाहियों द्वारा कबीर साहेब के गले में जहरीला सर्प डालते ही वह सर्प, सुंदर पुष्पों की माला बन गया। क्योंकि कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा हैं।
⏩WATCH SADHNA TV 7:30 PM
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान He is mentioned in Holy Srimad Bhagavad Gita chapter 2:17, 7:29, 8:1, 8:3, 8:8-10, 15:4, 15:17, 18:62,64,66 with the name as Param Akshar Purush and Kavir Dev. Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान

He is mentioned in Holy Srimad Bhagavad Gita chapter 2:17, 7:29, 8:1, 8:3, 8:8-10, 15:4, 15:17, 18:62,64,66 with the name as Param Akshar Purush and Kavir Dev.

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According to Gita Adhyay 16 Shlok 23- 24 Devotees who are doing the Paath of Holy Gita Ji every day, but are doing worship opposite to the holy text will not get Salvation. This the #श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान which is Explained it by Enlightened Sant Rampal Ji Maharaj.

According to Gita Adhyay 16 Shlok 23- 24 Devotees who are doing the Paath of Holy Gita Ji every day, but are doing worship opposite to the holy text will not get Salvation. This the #श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान which is Explained it by Enlightened Sant Rampal Ji Maharaj.
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 62 “हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। ’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान
गीता अध्याय 18, श्लोक 62 
“हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। 
’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा 
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 17 अनुसार सबका धारण पोषण करने वाला परमात्मा कौन है? जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें। Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान
 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 17 अनुसार सबका धारण पोषण करने वाला परमात्मा कौन है?
जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें।
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान गीता अध्याय 18, श्लोक 62 “हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। ’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा Sant Rampal Ji Maharaj

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गीता अध्याय 18, श्लोक 62 
“हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। 
’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा 
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान
गीताजी अध्याय 2 श्लोक 17 में कहा गया है कि अविनाशी तो उस परमात्मा को जानो जिस का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। 
अधिक जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड 
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 17 अनुसार सबका धारण पोषण करने वाला परमात्मा कौन है? जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें। Sant Rampal Ji Maharaj

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 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 17 अनुसार सबका धारण पोषण करने वाला परमात्मा कौन है?
जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें।
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#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं Sant Rampal Ji Maharaj

#श्रीमद्भगवद्गीता_का_यथार्थ_ज्ञान
पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे।
फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं
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#शास्त्रविरुद्ध_Vs_शास्त्रानुकूल श्री ज्ञानानंद जी ने गीता अध्याय 18 श्लोक 66 का अनुवाद किया है: सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझ में त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्व शक्तिमान की ही शरण में (व्रज) आजा। जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी Sant Rampal Ji Maharaj

#शास्त्रविरुद्ध_Vs_शास्त्रानुकूल
श्री ज्ञानानंद जी ने गीता अध्याय 18 श्लोक 66 का अनुवाद किया है:
सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझ में त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्व शक्तिमान की ही शरण में (व्रज) आजा। 
जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी 
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#शास्त्रविरुद्ध_Vs_शास्त्रानुकूल अनुत्तम का अर्थ अश्रेष्ठ है जबकि इसका अर्थ ‘‘अति उत्तम’’ किया है जो गलत है। गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहा है कि मेरी भक्ति से पूर्ण मोक्ष प्राप्त नहीं होता यानि अपनी गति अर्थात मोक्ष को अश्रेष्ठ बताया है Sant Rampal Ji Maharaj

#शास्त्रविरुद्ध_Vs_शास्त्रानुकूल
अनुत्तम का अर्थ अश्रेष्ठ है जबकि इसका अर्थ ‘‘अति उत्तम’’ किया है जो गलत है।
गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहा है कि मेरी भक्ति से पूर्ण मोक्ष प्राप्त नहीं होता यानि
अपनी गति अर्थात मोक्ष को अश्रेष्ठ बताया है
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