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Ajay Rai

@ajayrai71

I am an engineer by profession & passionate of Automobile. A patriot & love social work for human being. My views are personal & I endorse what I like.

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calendar_today15-10-2010 13:45:53

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Raghav Chadha (@raghav_chadha) 's Twitter Profile Photo

1 extra kg of baggage and airline bills you exorbitantly. But 4 hours of flight delay and airline owes you nothing. Airlines track your baggage weight to the gram. Why don’t they value your time to the hour? If they can charge you by the gram, they must compensate you by the

SP Shukla (@prakashukla) 's Twitter Profile Photo

This kind lady fed #monkeys regularly. This monkey came to bid farewell to her when she passed away. #Humans can learn something from our cousins. #nature #animals #gratitude

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Delighted & proud at great news👏 Making it to list of Top Global Auto Companies is a milestone not just for Mahindra Automotive but entire corporate sector. Besides Auto, Mahindra Group has other businesses also among the global leaders, including Mahindra Tractors & Club Mahindra 👍

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सञ्चितं भुज्यतेऽस्माभि: न वेति संशयो महान्। तदर्थं कृतकर्माणि भोक्तव्यानीति निश्चितम्।। जो संचित किया गया है उसका भोग हो पाएगा या नहीं इसमें संशय है, किंतु संचित करने के लिए किए गए कर्मों का फल तो भुगतना ही पड़ेगा।

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यथा न तोयतो भिन्नाः तरङ्गाः फेनबुद्बुदाः। आत्मनो न तथा भिन्नं विश्वमात्मविनिर्गतम्।। अर्थात् - जैसे जल से उत्पन्न तरङ्ग, फेन और बुलबुले जल से भिन्न नहीं होते वैसे ही यह दिखाई देने वाला जगत (संसार) भी आत्म-सत्ता से पृथक् नहीं होता, क्योंकि यह आत्म-सत्ता से ही प्रकाशित होता है।

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कार्यं विना यदुद्यान- नगराद्युपसर्पणम्। वृथाटननं तत् शस्तं तु शरीरालस्य शान्तये।। (श्येनिक शास्त्र - ०२/२८) अर्थात् - विना विशेष आवश्यकता के भी सायंकाल बाग-बगीचे तथा नगर आदि में भ्रमण करना चाहिए। इससे शरीर का आलस्य नष्ट होता है और शरीर में स्फूर्ति आती है।

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व्यक्तित्व की भी अपनी वाणी होती है जो कलम या जीभ के इस्तेमाल के बिना भी लोगों के अंर्तमन को छू जाती है!

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दोषदर्शी भवेत् तत्र यत्र रागः प्रवर्तते। अनिष्टवर्धितं पश्येत् तथा क्षिप्रं विरज्यते।। (महाभारत, शांति पर्व) अर्थात - जहाँ चित्त की आसक्ति बढ़ने लगे, वहीं दोष-दृष्टि करनी चाहिये और उसे अनिष्ट को बढ़ानेवाला समझना चाहिये। ऐसा करने पर उससे शीघ्र ही वैराग्य हो जाता है।

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*दीनेष्वार्तेषु भीतेषु* *याचमानेषु जीवितम्।* *प्रतिकारपरा बुद्धिः* *कारुण्यमभिधीयते।।* (अध्यात्मकल्पद्रुम- १०/११ अर्थात - दीन, दुःखी, भयभीत तथा जीवन की भीख मांगने वालों के प्रति उपकार की बुद्धि करुणा कहलाती है।

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*जीविते यस्य जीवन्ति,* *विप्रा: मित्राणि बान्धवाः।* *सफलं जीवितं तस्य,* *आत्माऽर्थे को न जीवति।।* अर्थात - जिसके जीवन से विप्र, मित्र और बंधुजन जीते है, उसी का जीवन सफल है। अपने लिए तो कौन नही जीता है अर्थात अपने लिए तो सभी जीते है।

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शब्द और व्यवहार ही मनुष्य! की असली पहचान है! चेहरे और हैसियत का क्या है! आज है कल न रहे!

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अगर आपके अच्छे व्यवहार के बावजूद आपके साथ कुछ बुरा होता है, तो समझ लीजिए। आप गलत जगह पर बुरे लोगों की भलाई करने की कोशिश कर रहे थे।

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गुरुलाघवमर्थानाम् आरम्भे कर्मणां फलम्। दोषं वा यो न जानाति स बाल इति उच्यते।। (वा. रामायण, आयो. कांड - ६३.७) अर्थात - कार्यों को प्रारम्भ करते समय जो उनके गुरु-लाघव (श्रेष्ठता और हेयर) को तथा उनसे होने वाले लाभ - हानि को नहीं जानते उन्हें बाल (बच्चा) कहा जाता है।

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किसी दूसरे के बुरे व्यवहार में इतनी भी ताक़त नही होनी चाहिए कि वो आपके मन की शांति को खत्म कर दे...!!

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सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते। मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।। (महाभारत, उद्योग पर्व - ३४/३९) अर्थात - सत्य से धर्म की रक्षा होती है, विद्या की रक्षा अभ्यास से होती है, रूप की रक्षा शुद्धि अर्थात् श्रृंगार से होती है तथा कुल की रक्षा चरित्र से होती है।