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Ved Sutra

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A proud Indian. A proud Hindu.
Promoting Vedic Hinduism. 🕉️

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calendar_today02-06-2023 04:53:37

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⚠️ Please pay attention ⚠️ Since teenage girls of this country are almost brainwashed by instagram reels and this kind of motherfuckers posing as friends and true lovers, I sincerely urge Hindu parents to please take care of your teenage children especially girls. Once they

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I don't think anybody will pay attention to this. Current govt in India has buldozed more temples that any other before. They are certainly not going to save one in some other country.

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.61 तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः। वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥61॥ ______________________________________ वे जो अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेते हैं और अपने मन को मुझमें स्थिर कर देते हैं, वे दिव्य ज्ञान में स्थित होते

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.62 ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । सङ्गत्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥62॥ ______________________________________ इन्द्रियों के विषयों का चिंतन करते हुए मनुष्य उनमें आसक्त हो जाता है और आसक्ति कामना की ओर ले जाती है और कामना से क्रोध

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.63 क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥63॥ ______________________________________ क्रोध निर्णय लेने की क्षमता को क्षीण करता है जिसके कारण स्मृति भ्रम हो जाता है। जब स्मृति भ्रमित हो जाती है

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.64 रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्। आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ॥64॥ ______________________________________ लेकिन जो मन को वश में रखता है वह इन्द्रियों के विषयों का भोग करने पर भी राग और द्वेष से मुक्त रहता है और भगवान की कृपा

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.65 प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते ॥65॥ ______________________________________ भगवान की दिव्य कृपा से शांति प्राप्त होती है जिससे सभी दुःखों का अन्त हो जाता है और ऐसे शांत मन वाले मनुष्य की बुद्धि

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.66 नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना। न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ॥66॥ ______________________________________ लेकिन असंयमी व्यक्ति का अपने मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं होता, न ही उसकी बुद्धि दृढ़ होती है और न ही उसका मन भगवान

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.67 इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते। तदस्य हरति प्रज्ञां वायु वमिवाम्भसि ॥67॥ ______________________________________ जिस प्रकार प्रचंड वायु अपने तीव्र वेग से जल पर तैरती हुई नाव को दूर तक बहा कर ले जाती है उसी प्रकार से अनियंत्रित इन्द्रियों

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.68 तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥68॥ _____________________________________ इसलिए हे महाबाहु। जो मनुष्य इन्द्रियों के विषय भोगों से विरक्त रहता है, वह दृढता से प्रज्ञा से युक्त हो जाता

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.69 या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥69॥ ______________________________________ जिसे सब लोग दिन समझते हैं वह आत्मसंयमी के लिए अज्ञानता की रात्रि है तथा जो सब जीवों के लिए रात्रि है, वह

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.70 आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् । तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाजोति न कामकामी ॥70॥ ______________________________________ जिस प्रकार से समुद्र उसमें निरन्तर मिलने वाली नदियों के जल के प्रवाह से विक्षुब्ध नहीं होता

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.71 विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ॥71॥ ______________________________________ जिस मुनष्य ने अपनी सभी भौतिक इच्छाओं का परित्याग कर दिया हो और इन्द्रिय तृप्ति की लालसा, ममत्व के भाव और अंहकार से रहित

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#सांख्ययोग  #भगवद्गीता BG 2.72 एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति । स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥72॥ ______________________________________ हे पार्थ! इस अवस्था में रहने वाली प्रबुद्ध आत्मा जब ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर लेती है, वह फिर कभी भ्रमित

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#भगवद्गीता  #सांख्ययोग 🕉️अनुक्रम : अध्याय : 2 : सांख्ययोग । 1/2 इस अध्याय के समग्र 72 श्लोकों का यह अनुक्रम पाठकों को के सहज पठन के लिए है। धन्यवाद। 🙏 श्लोक – 2.1 से 2.36 श्लोक :: 2.1 :: 👇 x.com/VedSutra/statu… ______________________________________ श्लोक :: 2.2 ::

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#भगवद्गीता  #सांख्ययोग 🕉️अनुक्रम : अध्याय : 2 : सांख्ययोग । 2/2 इस अध्याय के समग्र 72 श्लोकों का यह अनुक्रम पाठकों को के सहज पठन के लिए है। धन्यवाद। 🙏 श्लोक – 2.37 से 2.72 श्लोक :: 2.37 :: 👇 x.com/VedSutra/statu… ______________________________________ श्लोक :: 2.38 ::

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लगता है यह Vidit Gujrathi ने जाने अनजाने कुछ एलोपैथिक डॉक्टरों की दुखती नस पर हाथ रख दिया है। अपने परिवार को डॉक्टर दिवस की बधाई देने के लिए एक पोस्ट क्या कर दिया, बहुत सारे डॉक्टर पढ़े लिखे गंवारो की तरह उलझना शुरू हो गए।😁

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On one side there is this Jane Street making money in indian stock market, on the other there is this pathetic troll of a doctor who trolls a kid's family!🤔 #JaneStreet #TrollDoctor