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Kushagra Aniket

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Author, MBA @Columbia_Biz, Tata Scholar @Cornell, New Book: Krishna-Niti, Views personal

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इंद्र की राजधानी अमरावती, कुबेर की अलकापुरी, और वासुकि की भोगावती। चंद्रमा की राजधानी क्या है?

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Kushagra Aniket Our article discussing Rāma worship as India's living heritage based on our discovery of the oldest Rāma temple Inscription from Prayagraj in December 2024. indoustribune.com/lifestyle/dhar…

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मौर्वीं महाहाटकमन्तरीपं कृत्वा महेन्द्रोऽद्य बिभर्ति चापम्

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कविप्रशस्तिः - जल्हणः कुनाथपदकर्दमस्नपनपानपुण्योदयात् कुदारभुजवल्लरीनिभृतकेलिकुञ्जालयात्। कुमित्रगणसेवनादुपदिशत्यहो निर्वृतो विमुग्धयुवमण्डलीं स्थविरसत्तमो जल्हणः॥

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I have studied the interpretation of this mantra by Bhatta Bhaskara and I do not agree with him. The statement is “कपिर्बभस्ति तेजनं पुनः जरायु गौरिव.” But he inserts the clause यस्य ते to connect it with the first line of the mantra. This is needed only in his scheme.

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शबरी-प्रसंग - भाग १ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत [यह करपात्री जी के मत का खंडन करने वाला लेख कई भागों में निबद्ध है, जिन्हें क्रमशः प्रेषित किया जाएगा।] पूर्वमीमांसा का मत है कि जब किसी शब्द का प्रसिद्ध अर्थ संभव हो तो उस प्रसिद्ध अर्थ को छोड़कर किसी अप्रसिद्ध अर्थ की

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शबरी-प्रसंग - भाग २ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत [यह करपात्री जी के मत का खंडन करने वाला लेख कई भागों में निबद्ध है, जिन्हें क्रमशः प्रेषित किया जाएगा।] लेख के प्रथम भाग में उद्धृत विष्णुधर्म-पुराण के श्लोक की व्याख्या के विरोध में पूर्वपक्षी कहते हैं - “यहाँ शबरी का

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करपात्री जी का मत पूर्वाचार्यों की परंपरा, वाल्मीकीय-रामायण की प्राचीन टीकाओं और अनेक मान्य शास्त्रों के विरुद्ध है। इन शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर करपात्री जी के मत का क्रमशः खंडन प्रस्तुत किया जाएगा। लेख कई भागों में निबद्ध है - अतः प्रतिदिन एक भाग प्रेषित किया जाएगा। दो भाग

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शबरी-प्रसंग - भाग ३ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत [यह करपात्री जी के मत का खंडन करने वाला लेख कई भागों में निबद्ध है, जिन्हें क्रमशः प्रेषित किया जाएगा। इस भाग में हम रामचरितमानस के विभिन्न टीकाकारों के मत को देखेंगे। यहाँ इन टीकाकारों को केवल परपक्षखंडन के लिए उद्धृत किया

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शबरी-प्रसंग - भाग ४ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत शबरी को ब्राह्मणी बताने वाले पूर्वपक्षी का तर्क वाल्मीकीय-रामायण में शबरी के लिए आए चार विशेषणों पर आश्रित है - श्रमणी, तपस्विनी, तपोधना और चीरकृष्णाजिनाम्बरा। अतः इन विशेषणों में हम सर्वप्रथम “श्रमणी” शब्द पर विचार करते

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शबरी-प्रसंग - भाग ५ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत अब हम वाल्मीकीय-रामायण में शबरी के लिए प्रयुक्त दो अन्य विशेषणों पर विचार करते हैं - “तपस्विनी” और “तपोधना”। इन विशेषणों से संबद्ध एक प्रश्न उठता है - क्या शबरी को तपस्या करने का अधिकार था? गीता (१७.१४-१६) के अनुसार तप तीन

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शबरी-प्रसंग - भाग ६ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत शबरी को ब्राह्मणी सिद्ध करने हेतु तर्कों का कोश लगभग रिक्त देखकर पूर्वपक्षी एक साहसिक तर्क अपनाते हैं। वाल्मीकीय-रामायण में शबरी को “चीरकृष्णाजिनाम्बरा” अर्थात् कृष्ण-मृगचर्म-धारिणी कहा गया है, जिसके आधार पर पूर्वपक्षी तर्क

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Have you ever stayed silent to avoid conflict—even when the truth was at stake? You’re not the first—and you won’t be the last. We have the perfect guide for navigating such moments. 𝘒𝘳𝘪𝘴𝘩𝘯𝘢-𝘕𝘪𝘵𝘪 by Nityananda Misra and Kushagra Aniket draws on eleven defining

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शबरी-प्रसंग - भाग ७ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत अब शबरी-प्रसंग पर पूर्वपक्षी के अनुयायियों द्वारा उठाए गए कुछ अवशिष्ट प्रश्नों का समाधान करते हैं।  एक अनुयायी पूछते हैं कि यदि शबरी शबरजातीया थीं तो उन्हें “विज्ञान में अबहिष्कृत” (“विज्ञाने अबहिष्कृता”, वाल्मीकीय-रामायण

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जाति बड़ी या कर्म? पद्मपुराण में एक चाण्डाल महात्मा की कथा। एक ब्राह्मण का छुआछूत को लेकर सन्देह। भगवान् विष्णु का उपदेश। पूरी विडिओ देखें : youtu.be/yuF5xGoWtBU?si…

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इस वक्तव्य में इतना कुछ अशास्त्रीय है कि सबका क्रमशः खंडन करने का अवकाश नहीं है। “अध्ययन पर सबका अधिकार है।” जी नहीं, प्रत्येक शास्त्र अपने अध्ययन का अधिकारी स्वयं निश्चित करता है। शास्त्राध्ययन पर सबका अधिकार नहीं है। “व्यास पीठ पर बैठ कर कथा प्रवचन करना ब्राह्मण का एकाधिकार

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Discovered a post-Gupta inscription at Deva Parvat in Panna, Madhya Pradesh. In Kuṭila characters of circa 7th century CE. Perhaps records an epithet for Shiva. There is a temple from around the same period higher up the cliff, couldn't access it owing to the rainy weather.

Discovered a post-Gupta inscription at Deva Parvat in Panna, Madhya Pradesh. In Kuṭila characters of circa 7th century CE. Perhaps records an epithet for Shiva. There is a temple from around the same period higher up the cliff, couldn't access it owing to the rainy weather.
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शबरी-प्रसंग - भाग ८ (करपात्र-मत-खंडन) -कुशाग्र अनिकेत अब मीमांसा के जिस मत से पूर्वपक्षी अपना पक्ष स्थापित करते हैं, हम उसी से उनका खंडन करेंगे। श्लोकवार्त्तिक (प्रत्यक्षसूत्र ९) के अनुसार जहाँ एक वाक्य का होना संभव हो, वहाँ वाक्य-भेद की अपेक्षा नहीं की जाती है