उदास लड़कों को खोजने के लिए
कोई मोहनजोदाड़ो जैसी खुदाई नहीं करनी पड़ती।
दिख जाएंगे कहीं भी, कभी भी
उदास न दिखने की कोशिश करते हुए।
मेट्रो या ऑटो की सवारी करते हुए
कभी देखते हुए आसमान को देर रात छत से
कभी गाँव को याद करते हुए
कभी पढ़ते-पढ़ते किसी पन्ने को मोड़कर
सोचते हुए कि
जो उतर जाता है दिल से वो उतर जाता है,
ऐब गिनवाँए तो फिर अपना हुनर जाता है !!
कोई रोने का सबब है न कोई हँसने का
बात ये है कि मेरा वक़्त गुज़र जाता है !!
ज़िंदगी तीसरा रस्ता भी तो होगा कोई
कोई मर जाता है और कोई सुधर जाता है !!
~ काशिफ़ मजीद
है भला सा नाम उस का मैं अभी से क्या बताऊँ
किया बे-क़रार हँस कर मुझे एक आदमी ने
कहीं बे-ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने
कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे-ख़ुदी ने
~ मजरूह सुल्तानपुरी 🤌🏻🩷