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Pardeep

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas Sant Rampal Ji Maharaj Kabir Sahib Prakat Diwas is the day God Kabir Ji descended on this mortal world in Lahartara lake on a lotus flower in Kashi, Uttar Pradesh, India.

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Sant Rampal Ji Maharaj
Kabir Sahib Prakat Diwas is the day God Kabir Ji descended on this mortal world in Lahartara lake on a lotus flower in Kashi, Uttar Pradesh, India.
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas कबीर परमेश्वर जी कभी मां के गर्भ से जन्म नही लेते। परमेश्वर कबीर साहेब जी का 14 जून को प्रकट दिवस हे। Sant Rampal Ji Maharaj pic.x.com/eu4DUUKrR0

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas ⚡️कबीर साहेब जी का नामकरण- काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पर भी कबीरअक्षर ही लिखा था pic.x.com/4teTGld8a3

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas Sant Rampal Ji Maharaj गरीब शिव उतरे शिवपुरी से, अविगत बदन विनोद। महके कमल खुशी भये, लिया ईश कूं गोद। सात बार चर्चा करी, बोले बालक बैन। शिव कूं कर मस्तक धरया, ला मोमन एक धैन। गरीब अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल।

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Sant Rampal Ji Maharaj
गरीब शिव उतरे शिवपुरी से, अविगत बदन विनोद।
महके कमल खुशी भये, लिया ईश कूं गोद।
सात बार चर्चा करी, बोले बालक बैन।
शिव कूं कर मस्तक धरया, ला मोमन एक धैन। 
गरीब अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल।
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।

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कबीर   परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas कबीर परमेश्वर सशरीर प्रकट हुए ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए।

#625th_KabirSahib_PrakatDiwas
कबीर परमेश्वर सशरीर प्रकट हुए
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए।
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas परमेश्वर कबीर साहेब जी किसी माँ से जन्म नहीं लेते। ऋग्वेद मंडल १० सूक्त ४ मंत्र ३ पूर्ण परमात्मा जब शिशु रूप धारण करके यहां आते हैं तब उनका जन्म किसी मां के द्वारा नहीं होता। Sant Rampal Ji Maharaj pic.x.com/FvzB9nUjkm

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455(सन् 1398)सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीरजी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए,इसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानन्द जी थे

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas Sant Rampal Ji Maharaj यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है जो अतिथि रूप में कुछ दिन संसार में आता है।

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामकरण करने आए काजियों ने जब कुरान शरीफ को खोला तो कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर - कबीर - कबीर हो गए । तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप... Sant Rampal Ji Maharaj अधिक जानकारी के लिए Satlok Ashram YouTube चैनल पर visit करें।

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas ⚡️625वां कबीर साहेब प्रकट दिवस 14 जून को काशी शहर की पवित्र भूमि पर परमेश्वर कबीर जी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण परमेश्वर कबीर/कविर्देव जी स्वयं अपने सतलोक से

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas जन्म नहीं लेते, ना ही उनकी कोई पत्नी थी। क्योंकि वे तो सबके उत्पत्तिकर्ता हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में प्रमाण है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। Sant Rampal Ji Maharaj

#625th_KabirSahib_PrakatDiwas
जन्म नहीं लेते, ना ही उनकी कोई पत्नी थी। क्योंकि वे तो सबके उत्पत्तिकर्ता हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में प्रमाण है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है।

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :- Sant Rampal Ji Maharaj

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स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :- 

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गरीब, दुनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश। ईश कहै परब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।। संत गरीबदास जी कहते हैं कि शिशु रूप में कबीर परमेश्वर जी को देखकर काशी के लोग कह रहे थे कि यह तो कोई देवता का अवतार है। #625th_KabirSahib_PrakatDiwas Sant Rampal Ji Maharaj pic.x.com/Q4YZJBlbx8

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas कबीर परमेश्वर का कलयुग में प्रकट होना ज्येष्ठ मांस की पूर्णमासी सन् 1398(विक्रम संवत 1455) को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए। Sant Rampal Ji Maharaj

#625th_KabirSahib_PrakatDiwas

कबीर परमेश्वर का कलयुग में प्रकट होना
ज्येष्ठ मांस की पूर्णमासी सन् 1398(विक्रम संवत 1455) को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए।

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को विक्रमी संवत 1455 (सन 1398 ई.) को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर सतलोक (ऋतधाम) से सशरीर आकर शिशु रूप में लहरतारा तालाब के ही कमल के पुष्प में विराजमान हुए।

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ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को विक्रमी संवत 1455 (सन 1398 ई.) को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर सतलोक (ऋतधाम) से सशरीर आकर शिशु रूप में लहरतारा तालाब के ही कमल के पुष्प में विराजमान हुए।
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas तुम साहेब तुम सन्त हो तुम सतगुरु तुम हंस। गरीबदास तुम रूप बिन और न दूजा अंस।। तुम स्वामी मैं बाल बुद्धि भर्म कर्म किये नाश। गरीबदास निज ब्रह्म तुम, हमरै दृढ विश्वास।। Sant Rampal Ji Maharaj

#625th_KabirSahib_PrakatDiwas
तुम साहेब तुम सन्त हो तुम सतगुरु तुम हंस। गरीबदास तुम रूप बिन और न दूजा अंस।।
तुम स्वामी मैं बाल बुद्धि भर्म कर्म किये नाश। गरीबदास निज ब्रह्म तुम, हमरै दृढ विश्वास।।

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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas Kabir Prakat Diwas 14 June नीरू-नीमा (निःसन्तान दम्पति थे) 600 वर्ष पूर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। Sant Rampal Ji Maharaj

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Kabir Prakat Diwas 14 June
नीरू-नीमा (निःसन्तान दम्पति थे)
 600 वर्ष पूर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। 
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#625th_KabirSahib_PrakatDiwas काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों पर भी कबीर-कबीर-कबीर अक्षर ही लिखा था। कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मंत्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला। Sant Rampal Ji Maharaj

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काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों पर भी कबीर-कबीर-कबीर अक्षर ही लिखा था।
कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मंत्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला।

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