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Khangar Singh Rathore Araba

@ks_araba

सभ्य भाषा और मर्यादित शब्दावली में अपनी बात लिखने वाले ही फॉलो करें।
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ID: 1425284334

calendar_today13-05-2013 11:35:26

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“पावक सर छाड़ेउ रघुबीरा, छिन महुँ जरे निशाचर भीरा।” #OperationSindoor

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तुम्हें तुम्हारी मातृभूमि और रक्त की एक–एक बूंद की सौगंध है 140 करोड़ भारतीयों, देश बहुत बड़े दौर से गुजर रहा है तुम इस देश से गद्दारी मत करना। जय हिंद जय हिंद की सेना जय जवान 🇮🇳 #PakistanIsATerrorState

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देश युद्ध के दौर से गुजर रहा है टोंटीचोर गिद्ध। राजनीति बाद में कर लेना । Akhilesh Yadav

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जय श्री कृष्ण🙏 अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः । सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि ॥४.३६॥ भावार्थ : यदि तुम्हें समस्त पापियों में भी सर्वाधिक पापी समझा जाये तो भी तुम दिव्यज्ञान रूपी नाव में स्थित होकर दुःख सागर को पार करने में समर्थ होगे।

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(1) सबसे बड़ा कुकृत्य ये था कि बाबर की नाजायज औलादों ने 1892 में बनी ऐतिहासिक धरोहर हमारी छतरियों को तोड़ा। उससे भी बड़ा अपराध ये है कि छतरी विनाशक समुदाय संगठित रूप से छतरी के पुनर्निर्माण को रोकने के लिए हिंसक बना हुआ है। कौनसा भाईचारा? कौनसा सौहार्द? कौनसी अपणायत? #बासनपीर

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(2) मुस्लिम समुदाय पहले स्पष्ट करें कि जैसलमेर की वीर प्रसूता भूमि उनके समुदाय की मातृभूमि है या नहीं? जैसलमेर को यदि मुस्लिम समुदाय अपनी मातृभूमि मानता है तो फिर जैसलमेर रियासत की तरफ से लड़कर झंझार हुए महापुरुषों के स्मारकों की इतनी दुर्दशा कैसे कर सकता है? #बासनपीर

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(3) एक पार्टी विशेष (कांग्रेस) के बड़े–बड़े नेताओं के द्वारा इस पूरे प्रकरण को जमीन का विवाद बताकर तुष्टिकरण का घिनौना खेल खेला जा रहा है। इन हरामखोरो के 🧬 में तुष्टिकरण इतना अन्दर तक घर कर चुका है कि उस समुदाय के घिनौने से घिनौने कृत्य के बचाव में भी ये उतर पड़ते है। #बासनपीर

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(4) जिस भूमि पर 1892 से वीर झुंझारों की छतरियां सीना तानकर उन महापुरुषों की वीरता की विरदावली बनी हुई थी उस भूमि पर ये नमकहराम किस बात का हक मांग रहे है? जिन मूर्खों द्वारा इस घटना को जमीनी विवाद के रूप में प्रचारित किया जा रहा है उनका ध्येय केवल तुष्टिकरण है। #बासनपीर

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(5) महापुरुषों के ऐतिहासिक स्मारकों को तोड़ने का ये कृत्य मीरबांकी द्वारा प्रभु श्री रामलला के मंदिर को तोड़ने के बराबर है और छतरियों के पुनःनिर्माण में बाधक बनने वाले सभी लोग श्रीराम मंदिर के पुनर्निर्माण में सदियों तक बाधक रहे धर्मविरोधियों के समान है। #बासनपीर

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(6) छतरियों के ध्वस्तीकरण से लेकर पुनर्निर्माण के वक्त की हिंसा तक के समय में नेताओं(विशेषत कांग्रेसियों) द्वारा नपे तुले अंदाज में भाईचारा,सौहार्द,अपनायत,प्रेम और शांति जैसे भारी भरकम शब्दों को जैसलमेर पर थोंपकर अपने तुष्टिकरण वाले मंसूबों को प्रदर्शित किया जा रहा है। #बासनपीर

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(7) तुष्टिकरण के इस घिनौने खेल में खानदानी कांग्रेसी तो छोड़ो लेकिन नए–नए कांग्रेसी बने हुए और कांग्रेसी बनने की राह पर निकले हुए नेता भी इस पूरे प्रकरण को ज़मीनी विवाद बनाकर अपने वोटबैंक को साध रहे है । थू है तुम्हारी राजनीति। क्यों रे कट्टर हिन्दुओं? हिंदुत्व कहां गया? #बासनपीर

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(8) अंतिम और मुद्दे की बात ये है कि जब इस मुद्दे को राजपूत बनाम मुस्लिम बना ही दिया है तो कान खोलकर सुन लो, छतरियां तो वहीं बनेगी और बनकर रहेगी। राजपूत समाज को किसी के छद्म और खोखले हिंदुत्व की जरूरत नहीं है। हमारे पूर्वजों की कीर्ति को हम अपने दम पर अक्षुण्ण रखेंगे। #बासनपीर

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आपने भी तो एक चवन्नी छाप यूट्यूबर से दिहाड़ी पत्रकार बनने तक का ऐतिहासिक सफर किया है महोदय। अब तो आपके ज्ञान कौशल के सामने राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार भी खुद को छोटा महसूस करने लगे है। हमें तो अब आपकी भारी–भरकम खबर पढ़ने के लिए भी कमेंट बॉक्स से लिंक खोलने पड़ते है🤣 Ashok Shera

आपने भी तो एक चवन्नी छाप यूट्यूबर से दिहाड़ी पत्रकार बनने तक का ऐतिहासिक सफर किया है महोदय।
अब तो आपके ज्ञान कौशल के सामने राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार भी खुद को छोटा महसूस करने लगे है।
हमें तो अब आपकी भारी–भरकम खबर पढ़ने के लिए भी कमेंट बॉक्स से लिंक खोलने पड़ते है🤣
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ऐतिहासिक धरोहरें हमारे पूर्वजों की वीरता, बलिदान और गौरवशाली परंपराओं की अमिट छाप हैं। हर एक पत्थर, हर एक स्तंभ, रणबांकुरों के त्याग और समर्पण की मौन गाथा है। ये वही धरोहरें हैं जिन पर हमें गर्व है, जिनसे जैसलमेर की पहचान है। ऐसे स्मारकों के पुनरुद्धार पर कोई आपत्ति जताना, इस

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किसी बाप की बेटी यदि किसी मुस्लिम से शादी कर ले तो जनता उस बाप का जीना हराम कर देते है कि इससे अच्छा तो वो बाप उसे होली मार देता। अब जब बाप ने मार डाला तो वही जनता बाप को गालियां दे रही है कि कोई अपनी बेटी को कैसे मार सकता है। ये जनता आखिर चाहती क्या है? केवल मजे लेना? या कुछ और?

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X प्लेटफॉर्म पर कुछ महीने पहले तक अच्छा खासा सफर चल रहा था और काफी अच्छे लोग जुड़ रहे थे। जब से इस प्लेटफॉर्म पर दूरी बनाई तभी से धीरे धीरे काफी मित्र अपनी फॉलो रूपी संपत्ति लेकर फरार हो गए। काफी रोचक लोग है यहां🤣🤣 खैर! बहुत ही आभासी दुनियां है ।

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मेरा नेता जो कहेगा मैं भी वही कहूंगा मेरा नेता जिसे स्वीकार करेगा मैं भी उसी को स्वीकार करूंगा। मेरा नेता ही मेरा मान,सम्मान,स्वाभिमान और फलां फलां फलां है। आजकल केवल यही चल रहा है। अरे मूर्खों! जहां तुम्हारा नेता गलत हो वहां पर उसको उसकी नानी याद क्यों नहीं दिलाते?

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जैसाण धणी के प्रत्येक शब्द में उनके पूर्वजों के बलिदानों से खड़े इस जैसलमेर के दुर्गती की पीड़ा झलक रही है। आज सबसे ज्यादा कोई दुःखी है तो वो महारावल साहब Chaitanya Raj Singh जी है जिनके कंधों पर उनके महान पूर्वजों की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने की जिम्मेदारी है।