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Siddharth Gaur

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उप सम्पादक दैनिक दृष्टि, सामाजिक-राजनीतिक-धार्मिक विचारक और पत्रकार, महामंत्री सोशल मीडिया एवं आईटी- राजस्थान ब्राह्मण महासभा। सभी विचार निजी।

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हिंदू धर्म के मुख्य शास्त्र दो प्रकार के हैं: 1. श्रुति और 2. स्मृति। श्रुति में 1. वेद (ऋग्वेद: देवताओं की स्तुति, यजुर्वेद: यज्ञ के नियम, सामवेद: भक्ति भजन, अथर्ववेद: रोज़मर्रा के उपाय) और 2. उपनिषद (आत्मा और ब्रह्म की गहरी बातें, जैसे जीवन का उद्देश्य) हैं। 2. स्मृति में

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श्रुति, यानी "जो सुना गया," हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्रामाणिक शास्त्र हैं, जिन्हें प्राचीन ऋषियों को ईश्वर से प्राप्त माना जाता है। इसमें 1. वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) और 2. उपनिषद शामिल हैं। वेदों में भजन, कर्मकांड, भक्ति गीत और दैनिक जीवन के उपाय हैं।

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वेद, हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्रुति शास्त्र हैं, जिन्हें ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। चार वेद हैं: 1. ऋग्वेद (देवताओं की स्तुति और भजन, जैसे अग्नि, इंद्र की पूजा), 2. यजुर्वेद (यज्ञ और कर्मकांड के नियम, जैसे हवन की प्रक्रिया), 3. सामवेद (भक्ति भजनों और संगीतमय

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ऋग्वेद, चार वेदों में सबसे प्राचीन और प्रमुख श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। इसमें 10 मंडलों में 1,028 सूक्त (भजन) हैं, जो अग्नि, इंद्र, वरुण जैसे देवताओं की स्तुति करते हैं। ये मंत्र प्रकृति, ब्रह्मांड और जीवन की महिमा बताते हैं, जैसे सूर्य की पूजा या

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यजुर्वेद, चार वेदों में से एक प्रमुख श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह मुख्य रूप से यज्ञ और कर्मकांड के नियमों का संग्रह है, जैसे हवन, पूजा और बलिदान की प्रक्रियाएँ। इसमें मंत्र (संहिता) और उनके उपयोग के निर्देश (ब्राह्मण) शामिल हैं। यजुर्वेद दो प्रमुख

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सामवेद, चार वेदों में से एक पवित्र श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह मुख्य रूप से भक्ति भजनों और संगीतमय मंत्रों का संग्रह है, जो यज्ञ और पूजा में गाए जाते हैं। सामवेद के मंत्र अधिकतर ऋग्वेद से लिए गए हैं, लेकिन इन्हें विशेष स्वरों और लय में गाया जाता

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अथर्ववेद, चार वेदों में से एक पवित्र श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह दैनिक जीवन से जुड़े मंत्रों और उपायों का संग्रह है, जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, समृद्धि और रोग निवारण के लिए मंत्र। इसमें दिव्य शक्ति, तंत्र, और प्राकृतिक उपचार भी शामिल हैं, जैसे बीमारी

अथर्ववेद, चार वेदों में से एक पवित्र श्रुति शास्त्र है, जिसे ईश्वर से प्रेरित माना जाता है। यह दैनिक जीवन से जुड़े मंत्रों और उपायों का संग्रह है, जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, समृद्धि और रोग निवारण के लिए मंत्र। 

इसमें दिव्य शक्ति, तंत्र, और प्राकृतिक उपचार भी शामिल हैं, जैसे बीमारी
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राजस्थान का नया खैरथल-तिजारा जिला अब भर्तृहरि नगर कहलाएगा। राजा भर्तृहरि, उज्जैन के शासक और संस्कृत कवि थे, जिन्होंने नीतिशतक, शृंगारशतक, और वैराग्यशतक लिखा। वैराग्य अपनाकर वे नाथ संप्रदाय के योगी बने। राजस्थान में अलवर के पास सरिस्का में भर्तृहरि मंदिर, जहाँ उनकी समाधि है, एक

राजस्थान का नया खैरथल-तिजारा जिला अब भर्तृहरि नगर कहलाएगा। राजा भर्तृहरि, उज्जैन के शासक और संस्कृत कवि थे, जिन्होंने नीतिशतक, शृंगारशतक, और वैराग्यशतक लिखा। 

वैराग्य अपनाकर वे नाथ संप्रदाय के योगी बने। राजस्थान में अलवर के पास सरिस्का में भर्तृहरि मंदिर, जहाँ उनकी समाधि है, एक
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बहुत समय पहले, असुर राजा महाबली ने भगवान विष्णु से वचन लिया कि वे सदा उनके महल में रहेंगे। विष्णु वचन निभाने पाताल लोक चले गए। लक्ष्मी जी उन्हें वापस लाना चाहती थीं। वे एक साधारण ब्राह्मणी के वेश में महाबली के पास पहुँचीं और राखी बाँधकर उन्हें भाई बना लिया। भाई का धर्म निभाते

बहुत समय पहले, असुर राजा महाबली ने भगवान विष्णु से वचन लिया कि वे सदा उनके महल में रहेंगे। विष्णु वचन निभाने पाताल लोक चले गए। 

लक्ष्मी जी उन्हें वापस लाना चाहती थीं। वे एक साधारण ब्राह्मणी के वेश में महाबली के पास पहुँचीं और राखी बाँधकर उन्हें भाई बना लिया। 

भाई का धर्म निभाते
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उपनिषद, हिंदू धर्म के पवित्र श्रुति शास्त्र हैं, जो सनातन वेदों का दार्शनिक हिस्सा हैं और ये सीधे ईश्वर से प्रेरित माने जाते हैं। ये आत्मा, ब्रह्म (परम सत्य), और जीवन के उद्देश्य की गहरी व्याख्या करते हैं। जैसे, छांदोग्य उपनिषद आत्मा और ब्रह्म की एकता बताता है, जबकि कठ उपनिषद

उपनिषद, हिंदू धर्म के पवित्र श्रुति शास्त्र हैं, जो सनातन वेदों का दार्शनिक हिस्सा हैं और ये सीधे ईश्वर से प्रेरित माने जाते हैं। 

ये आत्मा, ब्रह्म (परम सत्य), और जीवन के उद्देश्य की गहरी व्याख्या करते हैं। 

जैसे, छांदोग्य उपनिषद आत्मा और ब्रह्म की एकता बताता है, जबकि कठ उपनिषद
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भगवान स्वयं, अनंत शक्ति और करुणा के स्वरूप, युग-युग में भिन्न-भिन्न रूप धारण करके इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। उनका आगमन केवल एक कार्य के लिए नहीं, बल्कि चार प्रमुख उद्देश्यों के लिए होता है: 1. धर्म के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा करना। 2. अधर्म में लिप्त और अन्याय करने वालों

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संघ शताब्दी चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना । नहीं रुकना, नहीं थकना, सतत चलना सतत चलना । यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना. जय माँ भारती 🚩 #RSS100Years #संघमय_समाज

संघ शताब्दी

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।
नहीं रुकना, नहीं थकना, सतत चलना सतत चलना ।

यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना.

जय माँ भारती 🚩 

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