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Ankit Trivedi

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calendar_today21-06-2019 09:12:11

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#जननायक_प्रताप आप सब ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन उनका एक हाथी भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद।

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#जननायक_प्रताप आगे अल बदायुनी लिखता है की- वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।

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#जननायक_प्रताप तब अकबर ने कहा था कि- जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया, उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा.?

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#जननायक_प्रताप अनेकानेक महापुरूषों ने अपना आदर्श रखकर यह संघर्ष किया है। इन्हीं की बदौलत आज हम खुली सांस ले पा रहे है। इसमें उल्लेखनीय नाम महाराणा प्रताप का है।

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#जननायक_प्रताप महाराणा प्रताप ने हिन्दू संस्कृति के मूल्यों का आचरण कर जन्मभूमि की रक्षार्थ अपना जीवन लगाया।

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#जननायक_प्रताप 1540 ई. में जन्में। 1540 ई. से 1552 ई. तक कुम्भलगढ़ तथा 1552 ई. से 1568 ई. तक चित्तौड़गढ़, 1568 ई. से 1576 ई. तक गोगुन्दा में रहे। 1576 ई. में हुए हल्दीघाटी युद्ध के बाद आवरगढ़ को संघर्ष कालीन राजधानी बनाकर 1584 ई. तक वन-वन घूमते संघर्ष किया।

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#जननायक_प्रताप अकबर ने प्रताप पर 7 असफल आक्रमण किये। हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप विजयी रहे। दिवेर युद्ध में तो मुगलों के छक्के छुड़ा दिये। 1585 ई. में सम्पूर्ण मेवाड़ स्वतंत्र करा लिया।

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#जननायक_प्रताप संघर्ष काल के साथ-साथ 1585 से 1597 तक के शांतिकाल के भी प्रताप महानायक थे। इसमें निर्माण व सृजन बहुतायत में हुआ है।

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#जननायक_प्रताप मेवाड़ की पावन भूमि में बप्पारावल, पद्मिनी, मीराँबाई, महाराणा हम्मीर, महाराणा कुम्भा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, महाराणा राजसिंह तथा हाड़ी रानी, पन्नाधाय जैसे श्रेष्ठ सपूत व सत्पुत्रियाँ पैदा हुई है। जिनके तेजस्वी जीवन ने समाज को प्रेरणा दी।

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#जननायक_प्रताप निहत्थे शत्रु पर वार न करने की सलाह देकर, दो तलवारें रखने का आग्रह किया। माँ की शिक्षा से प्रताप निरन्तर शस्त्र व शास्त्र का ज्ञान प्राप्त कर रहे थे।

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#जननायक_प्रताप सोलह-सत्रह वर्ष की अल्पायु में प्रताप सैनिक अभियानों पर जाने लगे। वागड़ के सावँलदास व उनके भाई करमसी चौहान को सोम नदी के किनारे युद्ध में परास्त किया। छप्पन क्षैत्र के राठौड़ों व गौड़वाड़ क्षैत्र को भी परास्त कर अपने अधीन किया। उनकी वीरता की सर्वत्र प्रंशसा होने ल

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#जननायक_प्रताप इसी समय महाराणा प्रताप का विवाह राव मामरख पंवार की पुत्री अजबांदे के साथ हुआ। प्रताप ने इस समय देश की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करना प्रारंभ कर दिया।

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#जननायक_प्रताप बाद में महलों में जाकर जगमाल को गद्दी से उतार कर 32 वर्षीय प्रताप का विधिवत् राज्याभिषेक किया गया। यह काँटो भरा ताज था। मेवाड़ क्षैत्रफल, धन-धान्य में छोटा हो गया था। प्रताप ने सैन्य पुनर्गठन व राज्य व्यवस्था पर ध्यान दिया।

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#जननायक_प्रताप प्रताप की इस भीषण प्रतिज्ञा का व्यापक प्रभाव हुआ। सारे जनजाति क्षैत्र के भील आदिवासी प्रताप की सेना में शामिल होने लगे। मेरपुर-पानरवा के भीलू राणा पूँजा अपने दल-बल के साथ प्रताप की सेना में शामिल हो गये। इन्हीं वीर सैनिकों ने वनवास काल में प्रताप का साथ दिया था।

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#जननायक_प्रताप प्रताप को मालूम था कि युद्ध होकर रहेगा किन्तु तैयारी हेतु समय चाहिये। इसलिए कूटनीति का जवाब कूटनीति से दिया। जलाल खाँ को पुचकार कर भेज दिया।

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#जननायक_प्रताप प्रताप की सेना में 36 बिरादरी के लोग शामिल थे। प्रताप की 3000 की सेना शत्रुओं पर टूट पड़ने को तत्पर थी। 400 भील सैनिकों ने पहाड़ों पर मोर्चा बंदी कर ली थी।

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#जननायक_प्रताप और महाराणा प्रताप ने तलवार के एक ही वार से जिरह बख्तर व घोड़े सहित बहल्लोल खाँ को दो फाड़ में काट दिया।

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#जननायक_प्रताप प्रताप के लगभग 150 वीर शहीद हुए, मुगल सेना को भारी क्षति पहुँची, लगभग 500 सैनिक मारे गये। प्रताप सेना के पहाड़ों में घात लगाये बैठे होने के कारण मुगल सेना डर कर अपने डेरे में लौट गई।

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#जननायक_प्रताप "चेतक का बलिदान" युद्ध से लौटते समय घायल चेतक ने प्रताप को लेकर 20 फीट चौड़ा बरसाती नाला पार कर डाला। नाला पार करते ही वह बुरी तरह घायल हो गया। समीप ही इमली के पेड़ के पास जाकर गिर पड़ा तथा यहीं पर उसका प्राणांत हो गया। इस स्वामीभक्त प्राणी के बलिदान से प्रताप बहुत

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#जननायक_प्रताप लगभग 4 मास तक हल्दीघाटी युद्ध चला, जिसमें अकबर जैसे भारत विजेता को मेवाड़ जैसे छोटे राज्य से मात खानी पड़ी। उसने मानसिंह व आसफ खाँ की ढ़योढ़ी (दरबार में प्रवेश) बंद कर दी।