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ADIVASI VIKAS PARISHAD MADHYA PRADESH

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आदिवासी विकास परिषद, मध्यप्रदेश
आदिवासियों के विकास और सांस्कृतिक धरोहर के लिए समर्पित हैI

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छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव जनपद के नजरपुर गांव से आई खबर सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक आईना है। भीषण गर्मी में जब हर घर को पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब आदिवासी बहुल वार्डों में जानबूझकर पानी की आपूर्ति रोक देना केवल भेदभाव नहीं, बल्कि

छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव जनपद के नजरपुर गांव से आई खबर सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक आईना है।

भीषण गर्मी में जब हर घर को पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब आदिवासी बहुल वार्डों में जानबूझकर पानी की आपूर्ति रोक देना केवल भेदभाव नहीं, बल्कि
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महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं जोहार। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, ऊँच-नीच और अन्याय के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हुए उन्होंने वंचित, शोषित और महिलाओं के लिए स्कूल खोले और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का

महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं जोहार।

उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, ऊँच-नीच और अन्याय के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हुए उन्होंने वंचित, शोषित और महिलाओं के लिए स्कूल खोले और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का
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वीर बलिदानी खाज्या नायक को पुण्यतिथि पर विनम्र नमन एवं जोहार। 1857 की क्रांति में भीमा नायक के साथ भील सेना का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। 11 अप्रैल 1858 को आमल्यापानी के युद्ध में अपने पुत्र सहित वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान

वीर बलिदानी खाज्या नायक को पुण्यतिथि पर विनम्र नमन एवं जोहार।
1857 की क्रांति में भीमा नायक के साथ भील सेना का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। 11 अप्रैल 1858 को आमल्यापानी के युद्ध में अपने पुत्र सहित वीरगति को प्राप्त हुए।
उनका बलिदान
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खंडवा जिले के भकराड़ा गांव के मेहनती युवाओं को मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती में चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। एक ही आदिवासी परिवार के 3 सगे भाइयों रविंद्र डावर, ललित डावर और गुलाब डावर सहित राहुल मोरे, रेणु चौहान, लीला चौहान एवं रानू जामोद का चयन, सीमित

खंडवा जिले के भकराड़ा गांव के मेहनती युवाओं को मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती में चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।  

एक ही आदिवासी परिवार के 3 सगे भाइयों रविंद्र डावर, ललित डावर और गुलाब डावर सहित राहुल मोरे, रेणु चौहान, लीला चौहान एवं रानू जामोद का चयन, सीमित
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उड़ीसा के 59 गांवों के आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक अधिकार "जल-जंगल-जमीन" की रक्षा हेतु शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष कर रहे हैं। मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद की ओर से माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विनम्र निवेदन है कि वे इस विषय पर संज्ञान लेकर आदिवासी समाज की पीड़ा

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मैं मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार से समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता हूं। क्या इसमें आदिवासी समुदायों के परंपरागत अधिकार, उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज और “जल-जंगल-जमीन” से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहेंगे या नहीं? आदिवासी समाज की पहचान उसकी परंपराओं, प्रकृति से उसके

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भारत रत्न, भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर जी की जयंती पर शत-शत नमन एवं जोहार। बाबासाहेब ने जल-जंगल-जमीन, पहचान और अधिकारों की लड़ाई को संवैधानिक शक्ति दी। उनके बनाए संविधान ने आदिवासी समाज को सुरक्षा, सम्मान और अपने अस्तित्व को बचाने का अधिकार दिया। आज

भारत रत्न, भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर जी की जयंती पर शत-शत नमन एवं जोहार।  

बाबासाहेब ने जल-जंगल-जमीन, पहचान और अधिकारों की लड़ाई को संवैधानिक शक्ति दी। उनके बनाए संविधान ने आदिवासी समाज को सुरक्षा, सम्मान और अपने अस्तित्व को बचाने का अधिकार दिया। 

आज
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केन–बेतवा परियोजना के खिलाफ छतरपुर में आदिवासी समाज का आक्रोश अब आंदोलन में बदल चुका है। विस्थापित आदिवासी नदी में उतरकर “मिट्टी सत्याग्रह” कर रहे हैं, वहीं आदिवासी महिलाएं और लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं जिनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आदिवासी

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देवास में आदिवासियों की जमीनों को फर्जी आदेशों के जरिए बेचने का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि “जल-जंगल-जमीन” की सुनियोजित लूट है। हम इस प्रकरण में उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग करते हैं। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा

देवास में आदिवासियों की जमीनों को फर्जी आदेशों के जरिए बेचने का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि “जल-जंगल-जमीन”  की सुनियोजित लूट है।

हम इस प्रकरण में उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग करते हैं। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा
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प्रदेश कार्यालय में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती मनाई गई। इसमें मुख्य रूप से युवा प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह सैयाम जी, जिला भोपाल के युवा प्रभाग के अध्यक्ष श्री नवीन खेस जी,छात्र प्रभाग भोपाल के जिला अध्यक्ष श्री गोलू सोलंकी जी एवं जिला मंडला मुख्य

प्रदेश कार्यालय में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती मनाई गई।
इसमें मुख्य रूप से युवा प्रभाग प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह सैयाम जी, जिला भोपाल के युवा प्रभाग के अध्यक्ष श्री नवीन खेस जी,छात्र प्रभाग भोपाल के जिला अध्यक्ष श्री गोलू सोलंकी जी एवं जिला मंडला मुख्य
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ग्राम पलसोडी (रतलाम) में आदिवासी भाई-बहनों को उनकी पुश्तैनी जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने का प्रयास निंदनीय ही नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में बिना वैधानिक प्रक्रिया के बुलडोजर चलाने की तैयारी, संविधान की आत्मा और आदिवासी अस्मिता को

ग्राम पलसोडी (रतलाम) में आदिवासी भाई-बहनों को उनकी पुश्तैनी जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने का प्रयास निंदनीय ही नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में बिना वैधानिक प्रक्रिया के बुलडोजर चलाने की तैयारी, संविधान की आत्मा और आदिवासी अस्मिता को
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छतरपुर, मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ-मझगुवा डैम से प्रभावित आदिवासी परिवारों का 11 दिनों से जारी विरोध अब जनआंदोलन बन चुका है। सैकड़ों आदिवासी महिलाओं का ‘पंचतत्व आंदोलन’ अपने जल-जंगल-जमीन और अस्तित्व की रक्षा का सशक्त प्रतीक है। आदिवासी विकास परिषद मांग करती

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“जय बिरसा, जय भीम” की गूंज के साथ रायगड़ा और कालाहांडी के आदिवासी अपने जंगल, जमीन और अस्तित्व की रक्षा में अडिग खड़े हैं। वेदांता की बॉक्साइट माइनिंग के खिलाफ यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अपनी पहचान, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। हर आवाज में दर्द है,

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'बिरसा मुंडा के वंशजों को प्रताड़ित करती भाजपा' अंग्रेज़ी में एक कहावत है “Villains are not born—they are made.” आज मध्यप्रदेश की ज़मीनी हकीकत इसी ओर इशारा कर रही है। छतरपुर की एक आदिवासी महिला की आवाज़ पूरे प्रदेश की सच्चाई बता रही है, 10–11 दिनों से महिलाएं अपने जंगल, ज़मीन

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“क्या आदिवासियों के बच्चे सरकार के कार्यक्रमों में केवल डांस करने के लिए हैं?" राज्यपाल यह बयान मध्यप्रदेश की जमीनी हकीकत पर एक गहरा सवाल है। आदिवासी बच्चों को जहां शिक्षा, पोषण और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए, वहां उन्हें केवल प्रतीक बनाकर छोड़ दिया गया है। जब राज्यपाल जैसे

“क्या आदिवासियों के बच्चे सरकार के कार्यक्रमों में केवल डांस करने के लिए हैं?"  राज्यपाल 

यह बयान मध्यप्रदेश की जमीनी हकीकत पर एक गहरा सवाल है।
आदिवासी बच्चों को जहां शिक्षा, पोषण और बेहतर भविष्य मिलना चाहिए, वहां उन्हें केवल प्रतीक बनाकर छोड़ दिया गया है।

जब राज्यपाल जैसे
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मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद (युवा प्रभाग) द्वारा श्री एडवोकेट सुनील धुर्वे जी को आमला ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमें विश्वास है कि आप अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान में

मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद (युवा प्रभाग) द्वारा श्री एडवोकेट सुनील धुर्वे जी को आमला ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

हमें विश्वास है कि आप अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान में
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आदिवासी परिवारों को डराने-धमकाने एवं “कब्र बना दूंगा” जैसी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग अत्यंत निंदनीय एवं अस्वीकार्य है। यह घटना न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और गरिमा पर सीधा आघात है। आदिवासी समाज प्रदेश की अस्मिता एवं सांस्कृतिक पहचान का

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राजमाता रानी हिराई अत्राम जी की जयंती पर नमन एवं जोहार। दक्षिण गोंडवाना साम्राज्य की इस महान वीरांगना ने अपने साहस, नेतृत्व और स्वाभिमान से आदिवासी इतिहास में अमिट पहचान बनाई। उनका जीवन संघर्ष, सम्मान और समाज के उत्थान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास

राजमाता  रानी हिराई अत्राम जी की जयंती पर नमन एवं जोहार।

दक्षिण गोंडवाना साम्राज्य की इस महान वीरांगना ने अपने साहस, नेतृत्व और स्वाभिमान से आदिवासी इतिहास में अमिट पहचान बनाई। उनका जीवन संघर्ष, सम्मान और समाज के उत्थान के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

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आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर यह कैसी लचर व्यवस्था ? #सांदीपनी_स्कूल खोलकर सरकार ने कई बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन, जमीनी सच्चाई बेहद चिंताजनक है। #बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में छात्र-छात्राओं को रोज 4 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय करना पड़ रहा है। न बस सुविधा और न

आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर यह कैसी लचर व्यवस्था ?

#सांदीपनी_स्कूल खोलकर सरकार ने कई बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन, जमीनी सच्चाई बेहद चिंताजनक है। #बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में छात्र-छात्राओं को रोज 4 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय करना पड़ रहा है। न बस सुविधा और न