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Umesh Jangid

@umeshjangid07

जय श्री राम 🚩 RJ_19💫

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calendar_today18-04-2021 05:00:28

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उनसे मत डरिए जो बहस करते है, बल्कि उनसे डरिए जो अपने बनकर छल करते है !

उनसे मत डरिए जो बहस करते है,
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पीड़ाओं का कभी पूर्णतया अंत नहीं होता, वो बस कुछ पल के लिए कम होती है, हमें छलने के लिए। ताकि हम भूल सके पिड़ाओ का स्वरूप और क्षण भर के लिए प्रसन्न हो सके। अंत होता है तो केवल जीवन का, सुख का, हमारी पसंद का, हमारी इच्छाओं का, हमारी घुटन का और अंत में हमारी सांसों का...!

पीड़ाओं का कभी पूर्णतया अंत नहीं होता,
वो बस कुछ पल के लिए कम होती है, 
हमें छलने के लिए।
ताकि हम भूल सके पिड़ाओ का स्वरूप
और क्षण भर के लिए प्रसन्न हो सके।

अंत होता है तो केवल जीवन का, सुख का, हमारी पसंद का, हमारी इच्छाओं का, हमारी घुटन का और अंत में हमारी सांसों का...!
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“Invest वहां करो जहां से return आए, फिर बात चाहें पैसों की हो ,   या emotions की हो, या फ़िर time की हों...।” 🏵️

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“जो तस्वीर में साथ खड़े रहते है वो मित्र नही होते जो तकलीफ में साथ खड़े होते है वो मित्र होते है…!”

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चेहरा देखकर इंसान पहचानने की कला थी मुझमे..! तकलीफ तो तब हुई जब इन्सानों के पास चेहरे बहुत थे......!!

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ख़ुशी मेरी तलाश में यूँ ही भटकती रही साहब...! कभी उसे हमारा घर ना मिला तो कभी उसे हम घर पर ना मिले...!!

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एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।" आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।" लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ

एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।"

आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।"

लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ
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बड़े बड़े युद्ध अकसर शांत कमरो में अकेले लड़े जाते है ! ⏳💯

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