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प्रतीक सिंह

@prateek63559588

भारत हमको जान से भी प्यारा है
सबसे प्यारा गुलिस्तां हमारा है।
U. P. 60 की बागी धरती का एक बागी।
💪💪💪💪🤝🤝🤝🤝🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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calendar_today22-01-2021 12:51:53

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खुद से जुड़े लोगों के लिए फिक्रमंद रहना या उनके लिए कुछ अच्छा करने के सोचने के लिए भी उनकी रजामंदी जरूरी है। नहीं तो खुद के दमपर अगर आप कुछ करेंगे तो तपाक से जवाब मिलेगा कि ' मैंने कहा था क्या करने के लिए ' और ये जवाब आपकी छाती चीरकर आरपार कर देगा। 💯😔💔 #आज_के_दौर_में

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लाख पीजिए अमूल, सुधा की लस्सी मगर घर पर जो मथनी (रही) से मथा जाने वाला मट्ठा मिलता है। वो किसी भी कंपनी के स्वाद का बाप और स्वास्थ्यवर्धक होता है। अब तो बहुएं केवल कंपनी के नाम जानती हैं तरीका नहीं। आज के जमाने में ये सब दुर्लभ है। 😔 #मट्ठा

लाख पीजिए अमूल, सुधा की लस्सी मगर घर पर जो मथनी (रही) से मथा जाने वाला मट्ठा मिलता है। वो किसी भी कंपनी के स्वाद का बाप और स्वास्थ्यवर्धक होता है। अब तो बहुएं केवल कंपनी के नाम जानती हैं तरीका नहीं। आज के जमाने में ये सब दुर्लभ है। 😔
#मट्ठा
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सबकी अपनी कल्पनाएं हैं मगर वास्तविकता स्थानों के अनुसार बदल जाती हैं। ये शहरों में होती हैं जहां धन सौंदर्य मुख्य हैं। मगर वो स्त्री जो पसीने से तर बोझ लिए धूलभरे नंगे पांव आती है तब ये नौटंकी दम तोड़ जाती हैं। ये उन्हें भाता है जहां केवल धन को प्रमुखता दी जाती है।😡 #गंवई_बातें

सबकी अपनी कल्पनाएं हैं मगर वास्तविकता स्थानों के अनुसार बदल जाती हैं। ये शहरों में होती हैं जहां धन सौंदर्य मुख्य हैं।
मगर वो स्त्री जो पसीने से तर बोझ लिए धूलभरे नंगे पांव आती है तब ये नौटंकी दम तोड़ जाती हैं। ये उन्हें भाता है जहां केवल धन को प्रमुखता दी जाती है।😡
#गंवई_बातें
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अपने दिल पर अपनी मनमर्जियां अच्छी नहीं, शायद इसीलिए उसने मेरी बातें समझी नहीं, बस इक जरा सी नजरंदाजी उसकी खटक गई मुझे, खुद की मज़म्मत करते हुए खुद से कहा मैंने नहीं अब हर्गिज नहीं। 😡💔 - ✍️ प्रतीक सिंह #नासमझी

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निबाहने के लिए एक दूसरे का सम्मान और कुछ स्तर पर सहनशक्ति होना आवश्यक है। रिश्ते जब बंधन तोड़ते हैं तो बाहरी आंखों में चमक और होंठों की कुटिल मुस्काने असह्य कर देती हैं। फिर जब मजलिसों में चर्चाओं का दौर तबतक चलता है जब किसी और या उनपर पर उसकी पुनरावृत्ति नहीं होती। 💯😔 #रिश्ते

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मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है या फिर ये मेरे साथ ही क्यों होता है? ये सब एकदम निराशावादी वाले सवाल हैं। क्योंकि ये पूरी तरह मानसिक ह्वास कर देते हैं। अगर आप सक्षम नहीं हैं तो फिर ये बातें आपको खा जाएंगी और आप केवल अफसोस करते रह जाएंगे। 😔💯 #वास्तविकता

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आज समयचक्र ऐसा चल रहा है कि माता - पिता अपनी औलादों जो उन्हीं के अंश हैं। उनसे ये तक कहने का अधिकार नहीं रखते या उन्हें एक डर है कि भविष्य में वो उनकी लाठी बनेगा/ बनेगी की नहीं। एक छोटा नैतिक कर्तव्य भी लोगों को पहाड़ लगता है। फिर लोग इसे यही समय है कहकर निकल जाते हैं।😔😔 #आज

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सब के सब चंद्रशेखर वाले लग रहे हैं। ओरिजिनल जाति सहित नाम रख देने पर क्या पता और खुश हो जाएं।

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" तुम अपने हो इसीलिए तुम्हीं से कह रहा हूं ये बात किसी से कहना मत"। ये दुनिया का वो विश्वासघात है जिसके आगे किसी स्त्री का पर पुरुष से सम्बन्ध रखना भी लज्जित हो जाए। 💯💯 #घात_की_चरमसीमा

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बागी जनपद के लाल, राष्ट्रवाद के प्रणेता, युवा तुर्क से प्रसिद्ध, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को उनके जन्मदिवस पर सादर नमन। 🙏🙏 Neeraj Shekhar

बागी जनपद के लाल, राष्ट्रवाद के प्रणेता, युवा तुर्क से प्रसिद्ध, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को उनके जन्मदिवस पर सादर नमन। 🙏🙏
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दिवाकर राय (@dkdkrai) 's Twitter Profile Photo

जेहि बिधि नाथ होई हित मोरा । करहु सो बेगि दास मैं तोरा ।। #जय_सियाराम 🙏 #सुप्रभात 🙏

जेहि बिधि नाथ होई हित मोरा ।

करहु  सो  बेगि  दास  मैं  तोरा ।।

#जय_सियाराम 🙏 
#सुप्रभात 🙏
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ऐसी परिस्थिति में अपनी स्वीकार्यता पहले होती है। किस पर क्या बीतेगी वो दिमाग में कहीं दूर दूर तक नहीं होता। घर वालों की मर्जी और उनकी इज्जत हवाला अपने विश्वासघात को छुपाने का केवल जरिया होता है। 💯🥺😤

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मेरे घर के बगल में या मेरे पड़ोस में फलाना लड़की की दहेज से शादी रुक गई, उस लड़के ने पत्नी के कहने पर मां बाप पर हाथ उठा दिया, वो लड़की भाग गई etc पोस्ट करने वाले लोग बहुतायत में दिखते हैं यहां। अगर कभी उन बगल वालों या पड़ोसियों को पता चल जाए तो ये तो गए काम से। 😤🥺 #रीच_की_भूख

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दूरियां क्यों बढ़ती हैं? इसका भरोसा तोड़ना, द्वेष रखना, नीचा दिखाने जैसे कई कारण हो सकते हैं। मगर इसका मुख्य कारण यह है कि कोई आपसे चाहता ही नहीं संबंध रखना, उसका मतलब ही नहीं आपसे, वो आपको कुछ समझता ही नहीं। चाहे आप उसके बहुत काम आए पसीने हों कोई मायने नहीं रखता।💯😔 #बात

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मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ। वो जो प्यार में होता है, ऐतबार में होता है तेरे साथ ए यार मेरे वही तो हुआ।

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दो वक्त की रोटी काफी नहीं इस दुनियादारी में उन्हें वो सब चाहिए जो मुमकिन नहीं इस बेरोजगारी में चाहकर भी खोल नहीं सकते जेबें अपनी पर उन्हें शर्म नहीं आपकी लाचारी में फिर पसंद आते हैं उन्हें कोई आप से बेहतर हसरतों को टूटते देखते हैं आप उन्हीं की बेगारी में 💔 -✍️ प्रतीक सिंह #आज

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किसी के जैसा बनने वाली कभी प्रतियोगी भावना नहीं आई। अब इसे प्रकृति कह लीजिए या थोड़ा अपने में रहने का दर्प कह लीजिए। ये स्वीकार्य है। मगर किसी की सफलता पर कुंठित होना ये कभी हुआ ही नहीं। बस प्रदर्शन ना हो और एक दूसरे की गरिमा बनी रहे इससे बढ़कर कोई क्या दे सकता है।😔🙏 #अपनी_कुछ