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Posham Pa

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Hindi Poetry, Stories and other literary works by renowned and new writers.

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#NewBookAlert "लोग दहेज में बीएमडब्ल्यू दे देते हैं, लेकिन बेटी को ड्राइविंग नहीं सिखाते। वह बीएमडब्ल्यू होने पर भी इन्तज़ार करती है कि कब कोई फ़्री हो और उसे बाहर ले जाए।" Rajkamal Prakashan 📚 Anuradha Beniwal

#NewBookAlert

"लोग दहेज में बीएमडब्ल्यू दे देते हैं, लेकिन बेटी को ड्राइविंग नहीं सिखाते। वह बीएमडब्ल्यू होने पर भी इन्तज़ार करती है कि कब कोई फ़्री हो और उसे बाहर ले जाए।"

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"अनायास ही मेरे कांधे पर जब रखती हो तुम अपना सर मैं थोड़ा ज़िम्मेदार हो जाता हूँ खुली सड़क पर जब तुम थामती हो मेरा हाथ टूटता है मेरा देहाती परिवेश मुझे साहस मिलता है जब तुम झगड़ती हो बच्चों की तरह मैं भूल जाता हूँ मेरी उम्र अट्ठाईस हो गई है।" poshampa.org/poems-by-gaura…

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#सालगिरह | अनामिका "छूट रही है पकड़ से अभिव्यक्ति भी धीरे-धीरे! किसी कालका-मेल-से धड़धड़ाकर सामने से जाते हैं शब्द निकल! एक पैर हवा में उठाए गठरी ताने बिलकुल अवाक् खड़े रहते हैं गन्तव्य!" #NewBookAlert Rajkamal Prakashan 📚

#सालगिरह | अनामिका

"छूट रही है पकड़ से
अभिव्यक्ति भी धीरे-धीरे!
किसी कालका-मेल-से धड़धड़ाकर
सामने से जाते हैं शब्द निकल!

एक पैर हवा में उठाए
गठरी ताने 
बिलकुल अवाक् खड़े रहते हैं
गन्तव्य!"

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"अंधकार का एक समकोण जहाँ रेंगती हुई मैं छुप सकती भुलाकर कि मेरे पास कान हैं और लोगों के पास जीभ!" poshampa.org/vinita-agrawal…

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#सालगिरह | त्रिलोचन "मुझे जगत जीवन का प्रेमी बना रहा है प्यार तुम्हारा!"

#सालगिरह | त्रिलोचन

"मुझे जगत जीवन का प्रेमी
बना रहा है प्यार तुम्हारा!"
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"रोज़ेल्वा यक़ीन से कहती है इकलौती चीज़ जो कभी नहीं बदलती, रेल की पटरी है रेल बदलती है, पटरी के किनारे जम जाती है खरपतवार लेकिन पटरी नहीं बदलती। कहती है, तीन साल से देख रही हूँ मैं एक पटरी को न वह मुड़ती है, न टूटती है, न बढ़ती है।" poshampa.org/trying-to-name…

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"एक पेड़ लगाना दरअसल परिन्दों के लिए एक घर और मुसाफ़िरों के लिए एक सराय बनाना है।" — आमिर हमज़ा

"एक पेड़ लगाना दरअसल
परिन्दों के लिए एक घर
और मुसाफ़िरों के लिए एक सराय बनाना है।"

— आमिर हमज़ा
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#NewBookAlert #SalmanAkhtar "इक इसी बात का तो रोना है हर कहानी को ख़त्म होना है ज़हन पर इल्म की हुकूमत है दिल के सरकस में जादू टोना है!" Rajkamal Prakashan 📚

#NewBookAlert
#SalmanAkhtar

"इक इसी बात का तो रोना है
हर कहानी को ख़त्म होना है

ज़हन पर इल्म की हुकूमत है
दिल के सरकस में जादू टोना है!" 

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#NewBookAlert #Keertigaan "न्याय और अन्याय में वर्तनी भर का फ़र्क़ रह गया है। अन्याय आपको एक झटके में ख़त्म कर सकता है और न्याय, क्योंकि वह 'प्रिविलेज्ड' है इसलिए, आपको ज़िबह करता है, धीरे-धीरे मारता है।" Rajkamal Prakashan 📚 Chandan Pandey

#NewBookAlert
#Keertigaan

"न्याय और अन्याय में वर्तनी भर का फ़र्क़ रह गया है। अन्याय आपको एक झटके में ख़त्म कर सकता है और न्याय, क्योंकि वह 'प्रिविलेज्ड' है इसलिए, आपको ज़िबह करता है, धीरे-धीरे मारता है।"

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#NewEdition #ChhakoKiVapsi "दंगा सिर्फ़ ग़ैर-इनसानी काम ही नहीं, इसके कुछ पहलू बेहद बेतुके और मज़हकाख़ेज़ (हास्यास्पद) भी हैं।" Rajkamal Prakashan 📚

#NewEdition
#ChhakoKiVapsi

"दंगा सिर्फ़ ग़ैर-इनसानी काम ही नहीं, इसके कुछ पहलू बेहद बेतुके और मज़हकाख़ेज़ (हास्यास्पद) भी हैं।"

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#RetSamadhi #GeetanjaliShree ‘नहीं’ से राह खुलती है। ‘नहीं’ से आज़ादी बनती है। ‘नहीं’ से मज़ा आता है। ‘नहीं’ अहमक़ाना है। अहमक़ाना सूफ़ियाना है।

#RetSamadhi
#GeetanjaliShree

‘नहीं’ से राह खुलती है। ‘नहीं’ से आज़ादी बनती है। ‘नहीं’ से मज़ा आता है। ‘नहीं’ अहमक़ाना है। अहमक़ाना सूफ़ियाना है।
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#सालगिरह | श्रीकान्त वर्मा "अंधकार कछुए-सा बैठा है पृथ्वी पर कछुए पर बैठा है नीला आकाश— इतने बड़े बोझ के नीचे भी दबी नहीं, छोटी-सी घास!"

#सालगिरह | श्रीकान्त वर्मा

"अंधकार कछुए-सा बैठा है पृथ्वी पर
कछुए पर बैठा है नीला आकाश—
इतने बड़े बोझ के नीचे भी
दबी नहीं, छोटी-सी घास!"
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"मुझे खिड़की खोल देनी चाहिए ताकि आसानी से साँस ले सकें सपने!" poshampa.org/chen-chien-wu-…

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"क्यूँ भी कहना जुर्म है, कैसे भी कहना जुर्म है साँस लेने की तो आज़ादी मयस्सर है मगर ज़िंदा रहने के लिए इंसान को कुछ और भी दरकार है और इस ‘कुछ और भी’ का तज़्किरा* भी जुर्म है!" — अहमद नदीम क़ासमी #AhmadNadeemQasmi

"क्यूँ भी कहना जुर्म है, कैसे भी कहना जुर्म है
साँस लेने की तो आज़ादी मयस्सर है मगर
ज़िंदा रहने के लिए इंसान को कुछ और भी दरकार है
और इस ‘कुछ और भी’ का तज़्किरा* भी जुर्म है!"

— अहमद नदीम क़ासमी

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#NewBookAlert "अकेले बैठे आदमी के पास धड़धड़ाते मत चले जाना— अपना समझकर अकेला बैठा आदमी अकेला नहीं है।" Rajkamal Prakashan 📚

#NewBookAlert

"अकेले बैठे आदमी के पास
धड़धड़ाते मत चले जाना—
अपना समझकर
अकेला बैठा आदमी अकेला नहीं है।"

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#NewBookAlert "घर से बाहर आने में क्या डर साथी डर से अगर घिरा हो पूरा घर साथी!" Rajkamal Prakashan 📚

#NewBookAlert

"घर से बाहर आने में
क्या डर साथी

डर से अगर घिरा हो
पूरा घर साथी!"

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#NewBookAlert " 'आप भगवान में विश्वास करते हो या नहीं' इस प्रश्न का उत्तर मैं एक शब्द में नहीं दे सकता। अर्थात् वह मैं दे नहीं सकता, ऐसी बात नहीं। लेकिन वह मैं देता नहीं, इसका कारण यह कि पूछे जाने वाले प्रश्न में 'ईश्वर क्या है?' इसकी व्याख्या नहीं की गई है।" Rajkamal Prakashan 📚

#NewBookAlert

" 'आप भगवान में विश्वास करते हो या नहीं' इस प्रश्न का उत्तर मैं एक शब्द में नहीं दे सकता। अर्थात् वह मैं दे नहीं सकता, ऐसी बात नहीं। लेकिन वह मैं देता नहीं, इसका कारण यह कि पूछे जाने वाले प्रश्न में 'ईश्वर क्या है?' इसकी व्याख्या नहीं की गई है।"

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"यह रियलाइज़ेशन होने के बाद मैं काफ़ी रिलैक्स हो गई। एकदम-से जैसे सब समझ में आने लगा। जैसे एक पहेली-सी सुलझ गई। अब सब फ़िट होने लगा था। अब मैं अपने लड़के दोस्तों के साथ भी ज़्यादा कम्फ़र्टेबल थी। अब कोई दिखावा नहीं था।" Rajkamal Prakashan 📚 Anuradha Beniwal poshampa.org/book-excerpt-l…