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पैगम्बर मुहम्मद ﷺ की तालीमात

@muhammad4peace1

रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:-

“अल्लाह जिसके साथ भलाई चाहता है, उसे दीन की समझ अता कर देता है।”(सहीह बुखारी हदीस 71)

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रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : जिस किसी रोज़ेदार को इफ़्तार करा दे तो उसको रोज़ेदार के बराबर सवाब मिलेगा और रोज़ेदार के सवाब में से कोई कमी नहीं होगी - (सुनन इब्ने हदीस न. हदीस 1746) Daily Hadith Muwahid

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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:- “जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाया, नमाज़ क़ायम की, रमजान के रोज़े रखे तो अल्लाह पर हक़ है की इसे जन्नत में दाखिल करे” (बुखारी 7423) #HadithOfTheDay

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रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: तुम्हारे पास ये महीना (रमजान)आ गया और इस में एक ऐसी रात है ( शब ए कद्र ) जो हज़ार महीनों से बेहतर है, जो उस से मेहरूम रहा वो हर तरह के ख़ैर ( भलाई ) से मेहरूम रहा, और उसकी भलाई से मेहरूम वही रहेगा जो (वाक़ई) मेहरूम हो। (सुनन इब्ने माज़ा हदीस न.1644 )

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अल्लाह के रसूल ﷺ रमज़ान के आखिरी अशरे में एतिकाफ़ करते और फरमाते के आखरी अशरा (रमज़ान के आखिरी 10 रातें) में शबे कद्र को तलाश करो। (सहीह बुखारी हदीस न. 2020)

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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:- “मक्का मुकर्रमा में रमजान का रोज़ा रखना मक्का के अलावा कहीं और एक हज़ार रमजान से ज़्यादा फ़ज़ीलत रखता है” (मज़मा अल-जवाईद 4799) #HadithOfTheDay

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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: मैं आया था तुम्हें शब-ए-कद्र बतला दूँ लेकिन दो लोगो में झगड़ा हो गया ,बस इसका इल्म उठा लिया गया उम्मीद यही है तुम्हारे हक़ में ये बेहतर हो (सहीह बुखारी हदीस न. 2023 )

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रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:- "जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाया, नमाज़ क़ायम की, रमज़ान के रोज़े रखे, तो अल्लाह पर हक़ है कि उसे जन्नत में दाख़िल करें। (सहीह बुखारी हदीस नं .7423)

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हज़रत अबू बकर रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं: मैने रसूल अल्लाह ﷺ को फरमाते सुना: शबे कद्र को 21वीं या 23वीं या 25 वीं या 27 वीं या 29 वीं रात में तलाश करो" (जामे तिरमिजी हदीस न . 794) Daily Hadith

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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:- “जो शख़्स रोज़ेदार हो और फिर बीमार की अयादत करे और ज़नाजे में शरीक़ हो तो इसकी मग़फ़िरत हो जाती है, अलबत्ता बाद में अगर वह कोई नया काम करले तो मामला मुख्तलिफ़ है” (मज़मा अल-जवाईद 4944) #HadithOfTheDay

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अल्लाह तआला फ़रमाता है = रमज़ान का महीना जिसमें क़ुरआन उतारा गया, हिदायत है लोगों के लिए और खुली निशानियाँ रास्ते की और हक़ व बातिल के बीच फ़ैसला करने वाला, पस तुम में से जो कोई इस महीने को पाए वह उसके रोज़े रखे (सूरह बकर आयात न. 185 )

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हुजूर ﷺ ने फरमाया:- “जब तुम अपने माल की ज़कात अदा कर दो, तो तुमने अपने लाज़िम फ़र्ज़ को अदा कर दिया और जो शख़्स हराम तौर पर माल को जमा करता है और फिर इसे सदक़ा करता है तो उसे इसका अज़र नहीं मिलता अलबत्ता उसका वबाल इसके जिम्मे होता है” (इब्ने हिब्बान 3216) #HadithOfTheDay

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हज़रत आयशा ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल अगर मुझे मालूम हो जाये की कौन सी रात लैलत-अल-क़द्र है तो में उसमें क्या पढ़ू फ़रमाया: पढ़ो अल्लाह हुम्मा इन्नका अफुवुन तुहिब्बुल अफवा फफु अन्नी ऐ अल्लाह! तू माफ करने वाला है और माफी को पसंद करता है, इसलिए तू मुझे माफ़ कर दे (तिर्मिज़ी 3513)

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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :- "जिसने अपने किसी भाई पर ज़ुल्म किया हो तो उसे चाहिए कि उससे (इस दुनिया में) माफ करा ले, इसलिए कि आखिरत में रुपए पैसे नहीं होंगे इससे पहले (माफ करा ले) कि इसके भाई के लिए इसकी नेकियों में से हक़ दिलाया जाएगा और अगर इसके पास नेकियां ना होंगी तो इस

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रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: जिसने रमज़ान के रोज़े रखे, फिर उसके बाद शव्वाल के 6 रोज़े रखे तो ये पूरा साल लगातार रोज़े रखने की तरह है। (सहीह मुस्लिम हदीस न. 2758)

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अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया:- रोज़ा और क़ुरआन कयामत के दिन बंदे के लिए शिफारिश करेंगे (मुसनद अहमद हदीस न.8324 )

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रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया: चाँद ही देख कर रोज़े शुरू करो और चाँद ही देख कर रोज़ा मौक़ूफ़ करो और अगर बादल हो जाए तो तीस दिन पूरे कर लो। (सहीह बुखारी हदीस न .1909)

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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:- “जिस शख़्स ने रमजान के रोज़े रखे फिर इसके बाद शव्वाल में भी छह रोज़े रख लिए तो इसने गोया ज़माने भर के रोज़े रखे” (इब्ने माज़ा 1716) #HadithOfTheDay

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“…और जो किसी बात का पक्का ईरादा कर लो तो अल्लाह पर भरोसा करो, बेशक तवक्कल करने वाले अल्लाह को प्यारे है” (सूरा अल इमरान 159) #HadithOfTheDay

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रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया: ''सारी उम्मत जन्नत में जाएगी सिवाए उनके जिन्होंने इनकार किया।" सहाबा ने कहा : या रसूलुल्लाह! इनकार कौन करेगा? फ़रमाया : जो मेरी इताअत करेगा वो जन्नत में दाख़िल होगा और जो मेरी नाफ़रमानी करेगा उसने इनकार किया। 📓(सहीह बुखारी : 7280) #Hadith

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नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया : तुममें से कोई शख़्स ईमानदार न होगा जब तक उसके वालिद और उसकी औलाद और तमाम लोगों से ज़्यादा उसके दिल में मेरी मुहब्बत न हो जाएँ। 📓 (सहीह बुखारी : 15) #HadithOfTheDay