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काट अंध-उर के बंधन-स्तर बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर; कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर जगमग जग कर दे! नव गति, नव लय, ताल-छंद नव नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव; नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर, नव स्वर दे! वर दे, वीणावादिनि वर दे। -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
        जगमग जग कर दे!

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
        नव पर, नव स्वर दे!

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

-सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
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सकल बन फूल रही सरसों बन बन फूल रही सरसों अम्बवा फूटे टेसू फूले कोयल बोले डार-डार और गोरी करत सिंगार मलनियाँ गढवा ले आईं कर सों सकल बन फूल रही सरसों तरह तरह के फूल खिलाए ले गढवा हाथन में आए निजामुद्दीन के दरवज्जे पर आवन कह गए आशिक़ रंग और बीत गए बरसों सकल बन फूल रही सरसों

सकल बन फूल रही सरसों
बन बन फूल रही सरसों
अम्बवा फूटे टेसू फूले
कोयल बोले डार-डार
और गोरी करत सिंगार
मलनियाँ गढवा ले आईं कर सों
सकल बन फूल रही सरसों
तरह तरह के फूल खिलाए
ले गढवा हाथन में आए
निजामुद्दीन के दरवज्जे पर
आवन कह गए आशिक़ रंग
और बीत गए बरसों

सकल बन फूल रही सरसों
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सिद्धिदा 1.0 (मिरांडा हाउस कॉलेज) की ऐतिहासिक और यादगार सफलता के बाद, एक बार फिर काव्यपीडिया एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी. केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में प्रस्तुत है — सिद्धिदा 2.0 साहित्य, संगीत और संस्कृति का एक अविस्मरणीय महासमागम

सिद्धिदा 1.0 (मिरांडा हाउस कॉलेज) की ऐतिहासिक और यादगार सफलता के बाद,
एक बार फिर काव्यपीडिया एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, एन.सी.डब्ल्यू.ई.बी. केंद्र
के संयुक्त तत्वावधान में प्रस्तुत है —

सिद्धिदा 2.0 
साहित्य, संगीत और संस्कृति का एक अविस्मरणीय महासमागम
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और इक तरह से यूँ भी तो फिर मार ही डाला उसे ज़िंदा रखा लेकिन पराया मानकर पाला उसे पगड़ी, रसोई, आग, तेज़ाबी अनाएँ और हवस पड़ता रहा हर सम्त अपनी जान का लाला उसे क़ालिख कभी अपनी नज़र की साफ़ कर देखा नहीं आँखों के अंधे बेहिचक कहते रहे काला उसे #urdu #urdushayari #shayari

और इक तरह से यूँ भी तो फिर मार ही डाला
उसे ज़िंदा रखा लेकिन पराया मानकर पाला उसे

पगड़ी, रसोई, आग, तेज़ाबी अनाएँ और हवस
पड़ता रहा हर सम्त अपनी जान का लाला उसे

क़ालिख कभी अपनी नज़र की साफ़ कर देखा नहीं 
आँखों के अंधे बेहिचक कहते रहे काला उसे

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पुण्यतिथि विशेष: निदा फ़ाज़ली 💐🙏🏻 #nidafazli #urdu #urdupoetry #shayari #poetry

पुण्यतिथि विशेष: निदा फ़ाज़ली 💐🙏🏻

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मोहिनी राय 💗 । सिद्धिदा 2.0 | श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज #poetry #hindi #kavita #kaavyapedia #poetrycommunity