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@be_khyali

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calendar_today08-10-2018 15:01:01

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महिलाओं ने प्रेमानंद महाराज जी को भी नहीं छोड़ा। महिलाओं ने सदा ही पुरुषों को बर्बाद करने का जिम्मा लिया है। खैर, जो स्वयं राधा राधा राधा वास में हैं उन्हें कौन बिगाड़ सकता है। ये व्यभिचारिणियों की झुंड ने कैसे उनके कथन को स्वयं के ऊपर ले लिया और उनकी छवि को स्त्री-द्वेषी रूप दे

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अभी मैंने फ़्योदोर दोस्तोव्स्की द्वारा लिखी गई ‘White Nights, पढ़ी। इसमें जो भावना है, वो इतनी गहरी, इतनी भरी हुई है कि कहानी की शुरुआत से ही समझ आ जाता है कि अंत कैसा होगा, फिर भी आप पढ़ते रहते हैं। इसकी भावना इतनी तीव्र है कि इसे एक ही बार में ख़त्म करना पड़ता है। प्यार कितना

अभी मैंने फ़्योदोर दोस्तोव्स्की द्वारा लिखी गई ‘White Nights, पढ़ी।
इसमें जो भावना है, वो इतनी गहरी, इतनी भरी हुई है कि कहानी की शुरुआत से ही समझ आ जाता है कि अंत कैसा होगा, फिर भी आप पढ़ते रहते हैं।
इसकी भावना इतनी तीव्र है कि इसे एक ही बार में ख़त्म करना पड़ता है।
प्यार कितना
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अहंकार यदि सीने में हो तो किसी हद तक समझ आता है, पर जब वह ‘लिंग’ में उतर जाए तो ‘पतन’ निश्चित है।

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किसी से मोह हो जाना, प्रेम से बिल्कुल भिन्न होता है। यह न तो कोई लगाव होता है, न ही पसंद करने, दया करने या सहायता करने जैसा। कभी-कभी किसी व्यक्ति से आपका संबंध ऐसा बन जाता है जिसमें कोई बंधन नहीं होता, न कोई मोड़ होता है और न ही कोई ठहराव। केवल एक सूक्ष्म-सी स्वीकृति होती है कि

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ये जो किसी से बात करने की भावनात्मक लत होती है, यह सिगरेट की घातक आदत के बराबर होती है। यह ऐसी लत है कि अगर आप इसे अचानक छोड़ दें, तो ‘विथड्रॉल’ के लक्षण आने लगते हैं, और दिमाग उस खालीपन को भरने के लिए आपको बेचैन कर देता है। आपकी पीड़ा और इंतज़ार मानो एक सुई की नोक पर आ टिकते

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क्या तुम्हें नहीं लगता कि अगर कोई व्यक्ति इतना नाज़ुक है, इतना टूटा हुआ है या रहा है, तो हमें रुक जाना चाहिए? हमें थोड़ी देर रुककर, उसे महसूस करने देना चाहिए, यहां तक कि प्यार जताने से पहले भी। कभी-कभी बस किसी के साथ होना, बिना कुछ कहे, सबसे बड़ी राहत होता है। अपना कीमती समय

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मैं बेहद कायर प्रवृति का व्यक्ति बन गया हूं। तनिक भी खतरा या छोटी बीमारी भी मुझे घर कर जाती है। किसी अपने के बुरी खबर हो या कोई मुझे मिलकर घेर ले, मै बेहद डरने लगा हूं। आशंका है कि मैं सच में बेहद कमजोर हूं या मैं की भय में जीवन जी रहा हूं। जीवन में बेहद अकेला हूं और किसी को जीवन

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पत्र, 16 अगस्त 2025 प्रिय, तुम्हारे मोह से कभी निकल पाऊंगा या नहीं, यह नहीं पता, लेकिन इतना ज़रूर जानता हूं कि सदैव तुम्हें सहेज कर रखूंगा। मेरी बातों में मत आना, मैं झूठा हूं और बेवजह बड़ी-बड़ी बातें करता हूं। मैं जानता हूं, बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले इंसान को एक सफल इंसान

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पत्र.... 19 अगस्त 2025 प्रिय, मै अपने आप को शापित मानता हूं क्योंकि मैं अपने भावों को लिख देता हूं। एक हद तक सफ़ल हूं परंतु इसके बाद भी आराम नहीं। लिखना एक श्राप जैसा है, आपके घाव आपके सामने तैरते दिखते हैं लेकिन आप उन्हें पकड़ कर नष्ट नहीं सकते क्योंकि इस दरिया में आपको तैरना

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मुंशी प्रेमचंद जी की ' निर्मला ' एक उपन्यास अभी पढ़ कर खत्म किया हूं जो शानदार किताब है। निर्मला पढ़ना मेरे लिए सिर्फ एक उपन्यास पढ़ना नहीं था, बल्कि अपने समाज का आइना देखने जैसा अनुभव रहा। निर्मला एक मासूम लड़की है, जिसकी ज़िंदगी दहेज की बेड़ियों और असमान विवाह में उलझकर बर्बाद

मुंशी प्रेमचंद जी की ' निर्मला ' एक उपन्यास अभी पढ़ कर खत्म किया हूं जो शानदार किताब है। निर्मला पढ़ना मेरे लिए सिर्फ एक उपन्यास पढ़ना नहीं था, बल्कि अपने समाज का आइना देखने जैसा अनुभव रहा। निर्मला एक मासूम लड़की है, जिसकी ज़िंदगी दहेज की बेड़ियों और असमान विवाह में उलझकर बर्बाद
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जो आपके जीवन से चला गया हो मस्तिष्क वही पकड़ के बैठा रहेगा। इस भावनात्मक परिदृश्य से उबरना बेहद कष्ट भरा एवं मार्मिक हो सकता है। किसी के साथ भवनात्मक डोरी बांधने के बाद उसका चला जाना, आपके जीवन को मानसिक गर्त तक ले जा सकता है। जिसके साथ सिर्फ अतीत हो कोई भविष्य नहीं, वह रिश्ता

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प्रिय खत दीपावली चली गई। ऐसा प्रतीत होता है, जीवन के हर प्रपत्र में मैने तुम्हे अनंत काल के लिए खो दिया है। मनोस्थिति यूं हो चुकी है; तनिक भी कांटे चुभ जाए तो लगता है मृत्यु पास आ गई। मेरे भीतर जो सैलाब था वह मात्र तुम्हारे जाने भर से सुख चुका है। प्रतीक्षा की डोरी टूट चुकी है

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प्रिय अक्टूबर, हो सकता है तुमने हार मान ली हो। लेकिन मैं अभी भी तुम्हारी जीत में विश्वास रखता हूँ। जो अंदर से टूटी हुई हो, मैं तुम्हारी हर बिखरावट को प्यार से छूने को तैयार हूँ। प्यार कोई दवा नहीं, पर एक ठहराव है, जो तुम्हारी रूह के ज़ख्मों का मरहम बन सकता है। यदि तुम सिर्फ़

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प्रिय बेख्याली, तुमने अपने आप को इन वर्षों में जितना नुकसान किया है इतना तो तुम्हारा दुश्मन भी नहीं करता। अपनी मानसिक स्थिति से लेकर अपनी निजी जीवन तक के हर पहलू को तुमने नोच खाया है जिसका अब अप्रतिस्थापनीय भी होना मुश्किल है। अपनी भावनाओं के उथलपुथल में तुमने अपने सबसे चाहते

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आख़िरी ख़त तुम्हारे नाम... प्रियतमा, यदि जीवन में तुम कभी न मिली, तो मैं जीवन भर तुम्हारे शहर में रहना पसंद करूंगा, जहां तुमने अपना बचपन बिताया है। तुम्हारे बिताए उन जगहों पर शाम बिताऊंगा, तुम्हारे जिए बचपने में अपनी जिंदगी के धुन लिखूंगा। अपनी प्रेम भावनाओं को तुम्हारी यादों

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एक वक्त के बाद आप इंतजार करना बंद कर देते हैं। उम्मीदों का चिराग अपने आप बुझने देते हैं। वक्त इतना बेरहम है कि आपको हर हाल में जीना सीखा देता है। जो पहले इंतजार करता था, वो आंखे मृत हो चुकी होती हैं। अब आप जोर नहीं लगाते, आप बल नहीं देते, आप अपनी हद को समझने लगते हैं। अब धुंधला

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दो-हज़ार-छब्बीस में आपका स्वागत है। साल बीतते हैं और कुछ एहसास नहीं होता। एक-एक करके तमाम मुख्य वर्ष बीतते जा रहे हैं और मैं अभी भी उसी मोड़ पे खुद को ढूंढ रहा हूं जहां मैने अपनी बरबादी लिखी थी। उम्मीद करता हूं यह नववर्ष आपको स्वस्थ रखें और आगे ले जाए। प्रसन्न रहें, आबाद रहें।

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प्रिय मनपंसद, नया साल हमलोगों के लिए बेहद दुर्भाग्य एवं मजबूरी के साथ आया। हमारी नोंक झोंक कब अलगाव में बदल गई और हम एक दूसरे से अलग रहने लगे। मैने हमेशा अपने दिल में तुम्हे सबसे उच्च स्थान दिया है। प्रेम इतना की मैने हमेशा अपना बच्चा जैसा चाहा है। मेरा सदैव कोशिश रही है कि मैं

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मन के भीतर एक अनजान पीड़ा है जिसकी कोई परिभाषा नहीं, उसकी कोई लिखावट नहीं। उस दर्द के छाए में पल पल अपने आपको जलता देख जीवन बिल्कुल निराश और हतोत्साह हो चुका है। सिवाय उस दर्द के साथ जीने के, और अपने आप पर तरस खाने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता। अंधेरे में हूं। अब कुछ अंधेरा है।