Basant satoniya
@basantsatoniya
poetry
ID: 3572670374
15-09-2015 15:14:21
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मैं उसे देख के लौटा हूँ तो क्या देखता हूँ शहर का शहर मुझे देखने आया हुआ है..! अब्बास ताबिश Divya Seth
ये ही सोचकर तेरी तरफ ना निगाह की तुझे देख लूँगा तो और क्या नज़र आएगा..! ये अजब तिलिस्म है उस गुलाब से बदन में उसे देखोगे तो वो हर जगह नज़र आएगा..! तहजीब हाफ़ी Divya Seth